जून, 2023 के दौरान, 11.42 ट्रैक किलोमीटर का थ्रू स्लीपर रिनुअल किया गया, जिससे 30.45 ट्रैक किलोमीटर की संचयी प्रगति हासिल की गई। जून, 2023 में 5.25 समतुल्य सेटों का थ्रू टर्नआउट रिनुअल भी किया गया, जिससे 22.25 सेटों की संचयी प्रगति हुई।

इसके अलावा, जून, 2023 में यूएसएफडी (अल्ट्रा सोनिक फ्लॉ डिटेक्शन) तकनीक द्वारा 1730.92 किलोमीटर ट्रैक का परीक्षण किया गया है। यूएसएफडी तकनीक दरारों जैसी खामियों का पता लगाने के लिए किया जाता है और इसके बाद सुरक्षा कारणों के लिए दोषपूर्ण पटरियों को समय पर हटाया जाता है।
जून, 2023 के दौरान 03 ईएसपी (इंजीनियरिंग स्केल प्लान) और 18 सिग्नल एवं दूरसंचार योजनाओं को अनुमोदित की गई है। फ्लैश बट वेल्डिंग विधि का उपयोग कर 342 रेल ज्वाइंटों की वेल्डिंग की गई है, इस प्रकार कुल संचयी प्रगति 2405हुई। इसके अलावा, इस अवधि के दौरान पू. सी. रेल पर विभिन्न क्षमताओं की 684 सिग्नलिंग बैटरियां बदली गईं।
नियमित अंतराल पर पटरियों के रखरखाव के परिणामस्वरूप ट्रेनों का सुचारू संचालन हुआ है और रेल यात्रियों को बेहतर सवारी का अनुभव मिलता है। रेलवे ट्रैक के लिए सुरक्षा उपायों पर बढ़ते जोर के कारण ट्रेनों की गति में वृद्धि और बेहतर यात्:रा अनुभव के साथ सुरक्षित परिचालन संभव हुआ है।
]]>कटिहार/मालदा टाउन से डिब्रुगढ़ तक का रेल मार्ग पूर्वोत्तर सीमा रेल प्रणाली का प्रमुख मार्ग है। यह महत्वपूर्ण रेल मार्ग सात राज्यों वाले पूर्वोत्तर क्षेत्र को भारत के शेष राज्यों से जोड़ता है। निर्धारित सेक्शनों के ब्रॉड गेज लाइन का दोहरीकरण पू.सी. रेल के लिए उच्च प्राथमिकता है, क्योंकि यह हिस्सा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में कार्य करता है।

प्रस्तावित दोहरीकरण कार्यों के पूरा होने पर, कटिहार से पूर्वोत्तर राज्यों तक चार लाइनों की कनेक्टिविटी होगी, जो भारत के उत्तरी हिस्से से पूर्वोत्तर राज्यों को रेल परिवहन में बेहतर गतिशीलता प्रदान करने में मदद करेगी। ‘एक्ट नॉर्थईस्ट पॉलिसी’ के तहत, भारत सरकार कृषि सहित बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भारी निवेश कर रही है, जिससे परिवहन की आवश्यकता में वृद्धि होगी। ऐसे में इस रूट पर ट्रैफिक बोझ काफी बढ़ने की संभावना है।
यह क्षेत्र पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और अंतर्राष्ट्रीय देश जैसे नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के लिए व्यापार,वाणिज्य और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है। रेलवे लाइन का दोहरीकरण पूरा होने पर इन सेक्शनों को जोन के लिए एक प्रमुख वैकल्पिक कनेक्टिविटी के रूप में विचार किया जाएगा, जिससे लोगों और सामग्रियों दोनों के परिवहन में लगने वाले समय, लागत और दूरी में कमी होगीतथा इस प्रकार इस संपूर्ण क्षेत्र को एक बड़े पैमाने पर सामाजिक-आर्थिक बढ़ावा मिलेगा।

इस परियोजना से कुशल और अकुशल दोनों तरह के लोगों के लिए बड़ी मात्रा में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। बुनियादी ढांचे के विकास जैसे नए स्टेशन, सड़क संपर्क, गुड्स यार्ड, व्यवसाय से आस-पास के जिलों की समग्र आर्थिक वृद्धि होगी।
साथ ही, इन दोहरी लाइनों से अंतरराष्ट्रीय देश जैसे भूटान, नेपाल, बांग्लादेश के साथ परिवहन को प्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि कच्चे माल के परिवहन में आसानी होगी और अन्य आवश्यकतायें कम लागत और समय पर उपलब्ध होगी।
कोचिंग ट्रेनों के समयपालन से यात्रियों के आवागमन के समय में भी काफी बचत होगी। माल की निर्बाध आवाजाही होगी, जिससे माल ढुलाई सेवाओं का उपयोग करने वाले मौजूदा व्यवसायों की लागत में काफी कमी आएगी। इस क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी के लिए भारतीय रेल लगातार निवेश कर रही है।
इस परियोजना के कार्यान्वयन से, एक ही समय सीमा के भीतर अधिक रेकों को लोड किया और ले जाया जा सकता है, जिससे भारतीय रेल के आर्थिक आय में इजाफा होगा। इस क्षेत्र में सड़क मार्गों की तुलना में रेल की लागत और समय की प्रतिस्पर्धात्मकता काफी बढ़ जाएगी।
]]>तदनुसार, ट्रेन सं. 05695 (अगरतला – सिलचर) स्पेशल अगरतला से 06:00 बजे रवाना होगी और 11:30 बजे सिलचर पहुंचेगी। वापसी की दिशा में ट्रेन सं. 05696 (सिलचर – अगरतला) स्पेशल सिलचर से 16:35 बजे रवाना होगी और 22:05 बजे अगरतला पहुंचेगी।
दोनों तरफ की यात्रा के दौरान, यह स्पेशल ट्रेन आमबासा, धर्मनगर, न्यू करीमगंज, बदरपुर और अरुणाचल स्टेशनों पर रुकेगी। ट्रेन में यात्रियों के लिए एक एसी चेयर कार, चार जनरल चेयर कार, एक विस्टाडोम कोच होगा।
इस ट्रेन का ठहराव और समय-सूची का विवरण आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध है तथा विभिन्न समाचारपत्रों और पू. सी. रेल के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर भी जारी की जा रही है। यात्रियों से अपनी यात्रा शुरू करने से पहले इन विवरणों पर ध्यान देने का अनुरोध किया जाता है।

अलग अलग जिलों से प्रतिनिधित्व कर रहे 49 युवा प्रतिनिधियों ने एकमत होकर मणिपुर हिंसा पर शांति बहाली हेतु तत्काल कार्यवाही की मांग की है।

इस खुले पत्र में उन्होंने मणिपुर भ्रमण के दौरान वहां की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता और सौहार्द्रता का वर्णन करते हुए भावपूर्ण शब्दों में मणिपुर की प्रशंसा की है तथा इस हिंसा से प्रभावित लोगों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की है।
यह पत्र काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्ययनरत परास्नातक विद्यार्थी कार्तिक बाछाड़ और स्नातक के छात्र सोनू सिंह मरावी द्वारा मध्यप्रदेश प्रतिनिधिमंडल की ओर से प्रेषित किया है।
ज्ञातव्य हो कि केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के सहयोग से 28 मार्च से 2 अप्रैल तक आईआईटी इंदौर के नेतृत्व में युवा संगम का यह दल पूर्वोत्तर की कला , संस्कृति , रहन-सहन, खान- पान ,रीति-रिवाज, खेलकूद ,विज्ञान और प्रौद्योगिकी का प्रत्यक्ष अध्य्यन करने हेतु कल्चरल एक्सपोजर टूर के माध्यम से मणिपुर के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर वहां की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को गहराई से जाना ।
]]>पू. सी. रेल के मुख्यालय में, “आर्ट ऑफ लिविंग” गुवाहाटी केंद्र के सहयोग से रेलवे इंडोर स्टेडियम, मालीगांव में कार्यक्रम आयोजित कर इस योग दिवस का पालन किया गया। इस मौके पर पू. सी. रेल के महाप्रबंधक चेतन कुमार श्रीवास्तव तथा पू. सी. रेल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जहां रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने परिवार के साथ पूरे मनोयोग से भाग लिया। मंडलों में, इस योग दिवस का पालन सभी महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों और कार्यालयों में किया गया।
]]>वे रविवार को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस ग्रेटर नोएडा द्वारा आयोजित ‘गीता एवं अनु-गीता से समग्र नेतृत्व के पाठ’ विषय पर आईआईएफ इंटरनेशनल रिसर्च कॉन्फ्रेंस एंड अवार्ड समिट 2023 के प्रतिभागियों को ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे। प्रो. अमन अग्रवाल निदेशक आईआईएफ एवं संयोजक ने स्वागत भाषण दिया और प्रो. एम. एम. गोयल की उपलब्धियों का प्रशस्ति पत्र प्रस्तुत किया।
प्रो. गोयल ने बताया कि सभी स्तरों पर सुशासन हेतु नेतृत्व को स्ट्रीट स्मार्ट (सरल, नैतिक, क्रिया-उन्मुख, उत्तरदायी और पारदर्शी ) होना चाहिए।
प्रो. गोयल ने समझाया कि समाज को सर्वश्रेष्ठ देने हेतु नेता को ((आध्यात्मिक भागफल , अंतर्ज्ञान, नैतिक, शारीरिक, प्रेम-स्वभाव और भावनात्मक गुणक) के विकास के साथ सिंपल बनकर अपनी क्षमताओं का उपयोग करना चाहिए।
प्रो. गोयल ने कहा कि काम के माहौल को हर जगह प्रचलित करने के लिए हमें इसे नेतृत्व का वास्तविक नियम बनाने के लिए रूप, कार्य और शब्दों को बदलने की आवश्यकता है ।
प्रो. गोयल का मानना है कि महान नेता नहीं तो अच्छा नेता बनने के लिए हमें केवल एक उपलब्धि और सच्ची उपलब्धि के बीच के अंतर को समझना चाहिए ।
प्रो. गोयल ने कहा कि सफलता की सीढ़ी पर आगे बढ़ने के लिए हमें अपने अच्छे या बुरे कर्मों के साक्षी के रूप में ईश्वर पर भरोसा करना चाहिए ।
प्रो. गोयल का मानना है कि जीवन के सभी क्षेत्रों में बिना किसी चिंता के काम करने के लिए हमें सिर, हृदय और हाथों के उचित, उत्पादक और व्यावहारिक (3 पी ) उपयोग (3 एच ) के अलावा वास्तविक शिक्षा के रूप में आत्मा के प्रति जागरूक होना होगा।
]]>इस अवसर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि पूर्वोत्तर में हमेशा भौगोलिक रूप से संपर्क की कमी एक मुद्दा था, जिसे वर्तमान सरकार द्वारा सड़क, रेल और हवाई संपर्क पर जोर देकर हल किया जा रहा है। पिछले 9 वर्षों के दौरान ब्रॉडगेज ट्रेनें मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा पहुंचीं। पूर्वोत्तर में पहले की तुलना में नई रेल लाइनें तीन गुना तेजी से बिछाई जा रही हैं और रेल लाइनों का दोहरीकरण 10 गुणा अधिक तेजी से हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज 6,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 5 रेल परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया है, जो असम सहित क्षेत्र के एक बड़े हिस्से के विकास को गति प्रदान करेंगी। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि रेल पहली बार असम के एक बड़े हिस्से में पहुंची है और रेल लाइनों के दोहरीकरण से असम के साथ-साथ मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और नागालैंड को आसानी से जोड़ा जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आस्था और पर्यटन स्थलों की यात्रा अब और भी आसान हो जाएगी।
ये नवनिर्मित लाइनें इस क्षेत्र में रेल परिवहन परिदृश्य को बदलेगी। आवश्यक वस्तुओं का वहन करने वाली ट्रेनों सहित अधिक से अधिक ट्रेनें पूरे देश में फैले उत्पादन केंद्रों से काफी कम समय में पूर्वोत्तर राज्यों में पहुंच सकेंगी। डिगारू से लामडिंग तक 147 कि.मी. लंबी दोहरी लाइन सेक्शन का निर्माण 2,538 करोड़ रुपये की लागत से किया गया। 17 बड़े पुलों, 106 छोटे पुलों और 07 रोड ओवर ब्रिजों का निर्माण इसमें शामिल है। यह सेक्शन असम के कामरूप (मेट्रो), मरीगांव और नगांव जिलों से होकर गुजरता है। यह मार्ग की परिचालन संबंधी बाधाओं को कम करने में मदद करेगी, जो दक्षिण और ऊपरी असम क्षेत्रों के अलावा नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा जैसे राज्यों की ओर सभी ट्रेनों की आवाजाही के लिए जिम्मेदार है।

न्यू बंगाईगांव-धुपधरा 102 कि.मी. लंबे सेक्शन का निर्माण न्यू बंगाईगांव-गोवालपारा-कामाख्या 176 कि.मी. लंबी दोहरीकरण परियोजना के एक हिस्से के रूप में किया गया। इस खंड में 35 बड़े पुलों, 228 छोटे पुलों और 24 रोड अंडर ब्रिज का निर्माण शामिल है। इस परियोजना की लागत 1,962 करोड़ रुपये थी। असम के बंगाईगांव और गोवालपारा जिलों से गुजरते हुए यह पूर्वोत्तर क्षेत्र की ओर ट्रेनों के संचालन के लिए लाभदायक होगा।
गौरीपुर – अभयापुरी 86 कि.मी. नई लाइन सेक्शन न्यू मैनागुड़ी (पश्चिम बंगाल) से जोगीघोपा (असम) 279 कि.मी. लंबी नई रेलवे लाइन परियोजना का हिस्सा है। यह 5 स्टेशनों- आलमगंज, बगरीबारी, बिलासीपारा, चापर और बेचिमारी से होकर गुजरती है।
इस सेक्शन के पूरा होने से असम के धुबड़ी और बंगाईगांव जिलों के अधीन एक बड़े क्षेत्र की आबादी को पहली बार रेल सेवा का लाभ मिला। 1,267 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस परियोजना में 30 प्रमुख पुलों, 305 छोटे पुलों, 03 सुरंगों, 133 रोड अंडर ब्रिजों और 02 रोड ओवर ब्रिजों का निर्माण शामिल है।
विश्व में सबसे बड़ा “ग्रीन रेलवे” बनने की भारतीय रेल की महत्वाकांक्षी योजना के एक हिस्से के रूप में, 2030 तक इसे शून्य कार्बन उत्सर्जन नेटवर्क बनाये जाने की योजना है। नव विद्युतीकृत 381 कि.मी. रानीनगर जलपाईगुड़ी – गुवाहाटी और 131 कि.मी. चापरमुख – सेनचोवा और सेनचोवा – मैराबारी सेक्शन से पूर्वोत्तर से विभिन्न मेट्रो शहरों जैसे नई दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद आदि के लिए ट्रेनों की निर्बाध कनेक्टिविटी हो जाएगी। पूर्वोत्तर की ओर भारी ढुलाई वाली मालगाड़ियों का परिचालन संभव हो पायेगा। जीवाश्म ईंधन की खपत में बचत से ट्रेन परिचालन लागत में भी काफी कमी आई है।

बैठक के पहले दिन शैक्षिक कार्य समूह, डिजिटल अर्थव्यवस्था कार्यकारी समूह, फाइनेंस ट्रैक, G20 उद्यमिता अनुसंधान केंद्र और L20 तथा B20 समूहों जैसे विभिन्न प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए। पैनल चर्चा के बाद महाबाहु ब्रह्मपुत्र रिवर हेरिटेज सेंटर में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
इस तीन दिवसीय आयोजन में सदस्य देशों, अतिथि देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कुल 74 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। रोजगार कार्य समूह की यह बैठक 5 अप्रैल तक चलेगी। दूसरे ईडब्ल्यूजी के दौरान आम सहमति पर पहुंचने के लिए मंत्रिस्तरीय विज्ञप्ति और परिणाम दस्तावेजों पर चर्चा की गई। G20 EWG की दूसरी बैठक भारतीय अध्यक्षता के तहत तीन प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के परिणामों पर आम सहमति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिनमें पहला है ग्लोबल स्किल गैप पर चर्चा करना, दूसरा, गिग एंड प्लेटफॉर्म इकोनॉमी और सोशल प्रोटेक्शन और तीसरा है सामाजिक सुरक्षा का सतत वित्तपोषण।
सोमवार को प्रतिनिधियों के लिए योग सत्र भी आयोजित किया गया। मंगलवार के सत्रों में ‘मसौदा मंत्रिस्तरीय घोषणा’ और ‘गिग और प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक सुरक्षा’पर विचार-विमर्श शामिल होगा। बुधवार को समापन दिवस पर ‘सामाजिक संरक्षण के सतत वित्तपोषण’ और ‘वैश्विक कौशल अंतराल को दूर करना’ जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। पहली रोजगार कार्य समूह की बैठक राजस्थान के जोधपुर में इस साल 2 से 4 फरवरी 2023 तक आयोजित की गई थी।
31 मार्च को गुवाहाटी प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस साल के गुवाहाटी हाफ मैराथन की घोषणा करते हुए, टेक्नीश 2023 दल ने हाफ मैराथन के विषय पर प्रकाश डाला। इस वर्ष गुवाहाटी हाफ मैराथन का विषय होगा “रन फॉर जीरो हंगर” और रेईज अवेरनेस फॉर जीरो हंगर। हाफ मैराथन दौड़ नेहरू स्टेडियम, गांधीबस्ती, गुवाहाटी से 9 अप्रैल को सुबह 5:15 बजे शुरू होगी और 6 किलोमीटर की दौड़ सुबह 6:00 बजे शुरू होगी।

इस साल गुवाहाटी हाफ मैराथन ने ‘रन फॉर जीरो हंगर’ थीम के माध्यम से क्षेत्रीय आधार पर भूख और कुपोषण से लड़ने के लिए जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की है। यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 2 के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य भूख को मिटाना, खाद्य सुरक्षा प्राप्त करना और वैश्विक पोषण में सुधार करना है।
यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को विषय का समर्थन करने और अपने संबंधित समुदायों में सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। गुवाहाटी हाफ मैराथन के बाद, टीम टेक्नीश एक पोषण अभियान चलाएगी जिसमें भाग लेने वाले प्रत्येक धावक के विपरीत एक जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन प्रदान किया जाएगा।
“ASICS की ओर से हम आईआईटी गुवाहाटी के गुवाहाटी हाफ मैराथन बाय टेक्नीश के साथ जुड़कर प्रसन्न हैं क्योंकि यह खेल और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने में हमारी रुचि को दर्शाता है। हम शरीर और मन दोनों के उत्थान के लिए गति शक्ति में दृढ़ता से विश्वास करते हैं और शहर में अपना पहला स्टोर खोलना हमेशा खेल तथा फैशन के प्रति उत्साही गुवाहाटी के लोगों के साथ मजबूत संबंध बनाने की दिशा में हमारा पहला कदम है।” ASICS इंडिया और साउथ एशिया के प्रबंध निदेशक, GHM 2023 के टाइटल प्रायोजक श्री रजत खुराना ने कहा।
“टेक्नीश हमेशा नवाचार के लिए एक मंच रही है, गुवाहाटी हाफ मैराथन भी इससे अलग नहीं है। यह आयोजन फिटनेस, दृढ़ता और मानवीय क्षमता का उत्सव होने के साथ साथ टेक्नीश की भावना का एक प्रमाण है। “रन फॉर जीरो हंगर” के विषय को शामिल करके यह शो एक सामाजिक आयाम पर प्रकाश डालता है, यह प्रतिभागियों को न केवल अपनी शारीरिक सीमाओं को जानने के लिए प्रोत्साहित करता है, बल्कि हमारे समाज में भूख के मुद्दे के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए भी प्रोत्साहित करता है।
हमें यकीन है कि यह अधिक लोगों को दौड़ने के बारे में उत्साहित होने और भूख के उन्मूलन में योगदान करने के लिए प्रेरित करेगा। हमारा मानना है कि प्रौद्योगिकी और प्रबंधन में समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने की क्षमता है, और इस कार्यक्रम के माध्यम से हमने उस दिशा में एक कदम आगे बढ़ाया है। हमें भारत के विभिन्न हिस्सों के प्रतिभागियों के साथ गुवाहाटी और टेक्नीश में शामिल होने की उम्मीद है।” टेक्नीश 2023 के संयोजक पार्थ राठौड़ ने कहा।
]]>इस शोध के निष्कर्ष हाल ही में जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में प्रकाशित किए गए। यह शोध पत्र डॉ. विनीत शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, जैविक विज्ञान विभाग, आईआईएसईआर भोपाल और उनके शोध विद्वानों श्री आदित्य मालवे और श्री गोपाल श्रीवास्तव ने मिल कर लिखा है । गटबग https://metabiosys.iiserb.ac.in/qutbug पर उपलब्ध है और उपयोग किया जा सकता है।
मनुष्य की आंत में लाभदायक बैक्टीरिया भी होते हैं जिन्हें सामुहिक रूप से गट माइक्रोबायोम कहते हैं। हम कोई चीज जो मुंह से खाते हैं उस पर होने वाली शारीरिक प्रक्रियाओं में माइक्रोबायोम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मानव शरीर में कोशिकाओं से अधिक संख्या में पेट आंत नली में माइक्रोब्स होते हैं। मनुष्य की आंत के माइक्रोबायोम में बैक्टीरिया की एक हजार से अधिक प्रजातियों रहती हैं।
इनमें 3.3 मिलियन से अधिक यूनिक जीन हैं। ये बैक्टीरिया विभिन्न एंजाइमों का स्राव करते हैं जो मनुष्य के आहार को प्रॉसेस करते हैं और शरीर को विभिन्न मेटाबोलाइट प्रदान करते हैं जो स्वस्थ और शारीरिक गतिविधियों के सुचारु रहने के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, मनुष्य- माइक्रोब का यह संबंध जटिल है और यह माइक्रोबायोम विशाल है। आर फिर लोगों में बैक्टीरिया का यह समूह भिन्न-भिन्न होता है इसलिए यह अध्ययन अधिक चुनौती भरा है। आईआईएसईआर भोपाल की टीम ने इसके लिए एक एआई टूल बनाया है जिसे “गटबग” नाम दिया गया है। यह जैव सक्रिय आहार मोलेक्यूल के साथ-साथ जो दवाइयां हम खाते हैं उन पर काम करने वाले सभी संभावित बैक्टीरिया एंजाइमों का पूर्वानुमान देता है।
शोध की तकनीकी जानकारी देते हुए डॉ. विनीत के. शर्मा, आईआईएसईआर भोपाल ने कहा, “गटबग मशीन लर्निंग, न्यूरल नेटवर्क और केमोइंफॉर्मेटिक के तालमेल से काम करता है। हम ने एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए मनुष्य की आंत के लगभग 700 बैक्टीरिया स्ट्रेन से प्राप्त 363,872 एंजाइमों का डेटाबेस और 3,457 एंजाइम युक्त सब्सट्रेट डेटाबेस का उपयोग किया है।
डॉ. विनीत शर्मा ने यह भी कहा, “गटबग इसकी बेहतर समझ होगी कि हम जो खाना या दवाइयां खाते हैं, उन्हें हमारे पेट में मौजूद बैक्टीरिया कैसे प्रॉसेस करते हैं और इससे हमारा स्वास्थ्य कैसे प्रभावित होता है। इस जानकारी के साथ सही आहार सुनिश्चित करना, नए प्रीबायोटिक्स का विकास करना, न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद तैयार करना आसान होगा। इससे प्रत्येक व्यक्ति के आंत में मौजूद बैक्टीरिया की प्रकृति के आधार पर सटीक दवा देने में भी सुधार होगा। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति विशेष की जरूरत के अनुसार दवा दी जा सकती है।”
इस शोध की खासियत यह है कि इसमें मॉडल को ट्रेन करने के लिए सबसे बड़े एंजाइम सब्सट्रेट डेटाबेस का उपयोग किया गया था। डेटाबेस में आठ आबादियों से प्राप्त आंत के बैक्टीरिया की प्रजातियों की जानकारी रखी गई ताकि यह पता लगे कि आंत के बैक्टीरिया के चलते विभिन्न आबादियों में दवा और आहार के मेटाबॉलिज्म कैसे अंतर होता है।
गटबग विभिन्न मोलेक्यूल के खंडित होने और उनके वाहक बैक्टरिया स्ट्रेन में भी शामिल एंजाइमों का पता लगाने में सक्षम पाया गया। इस टूल का परीक्षण 27 विभिन्न मोलेक्यूल के साथ किया गया जिनमें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, फ्लेवोनोइड्स और दवाइयां भी शामिल थीं और परिणाम भी बहुत सटीक मिले। सफलता की दर 0.78 से 0.97 तक दर्ज की गई।
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