मिटे सभी की दूरियाँ, रहे न अब तकरार।
नया साल जोड़े रहे, सभी दिलों के तार।।
बाँट रहे शुभकामना, मंगल हो नववर्ष।
आनंद उत्कर्ष बढ़े, हर चेहरे हो हर्ष।।
माफ करो गलती सभी, रहे न मन पर धूल।
महक उठे सारी दिशा, खिले प्रेम के फूल।।
छोटी सी है जिंदगी, बैर भुलाये मीत।
नई भोर का स्वागतम, प्रेम बढ़ाये प्रीत।।
माहौल हो सुख चैन का, खुश रहे परिवार।
सुभग बधाई मान्यवर, मेरी हो स्वीकार।।
खोल दीजिये राज सब, करिये नव उत्कर्ष।
चेतन अवचेतन खिले, सौरभ इस नववर्ष।।
आते जाते साल है, करना नहीं मलाल।
सौरभ एक दुआ करे, रहे सभी खुशहाल।।
वायु प्रदूषण वातावरण में पदार्थों की उपस्थिति है जो मनुष्यों और अन्य जीवित प्राणियों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, या जलवायु या सामग्री को नुकसान पहुंचाते हैं। उत्तर भारत में सर्दियों की हवा की गुणवत्ता में गिरावट ने एक बार फिर विशेष रूप से समाज में सबसे कमजोर लोगों के बीच स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के नकारात्मक प्रभावों को उजागर किया है। पिछले कुछ सालों में ये एक सालाना रिवाज सा बन गया है कि दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान प्रदूषण सुर्ख़ियों में रहता है, जो आमतौर पर दो-तीन महीने चलता है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में, साल में कम से कम आधे समय हवा ख़राब रहती है.

विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट, 2020 के अनुसार दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में से 22 भारत में हैं। दिसंबर 2020 में लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित इंडिया स्टेट लेवल डिजीज बर्डन इनिशिएटिव ने संकेत दिया कि भारत में 2019 में 1.7 मिलियन मौतें हुई जिसके लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार थीं। किसानों के एक वर्ग ने, विशेष रूप से पंजाब में, गेहूं की कटाई के बाद अवशेषों को जला दिया, भले ही चारे की कीमतें बढ़ गईं। कई किसान बताते हैं कि जल्दी में होने के कारण उन्होंने पराली जलाना शुरू कर दिया- राज्य ने धान बोने के लिए 10 जून की तारीख तय की थी। 2019 में भारत में सभी मौतों के 17.8% और श्वसन, हृदय और अन्य संबंधित बीमारियों के 11.5% के लिए प्रदूषण का अत्यधिक स्तर जिम्मेदार है।
पराली जलाने से निपटने के लिए100% केंद्रीय वित्त पोषित योजना के तहत, ऐसी मशीनें जो किसानों को इन-सीटू प्रबंधन में मदद करती हैं – मिट्टी में वापस ठूंठ डालकर – व्यक्तिगत किसानों को 50% सब्सिडी और कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) पर प्रदान की जानी थी। जबकि हरियाणा ने अब तक 2,879 सीएचसी स्थापित किए हैं और लगभग 16,000 पुआल प्रबंधन मशीनें प्रदान की हैं, इसे 1,500 और स्थापित करना है और लगभग उतनी ही पंचायतों को कवर करना है, जहां यह अब तक पहुंच चुका है।
इसी तरह, पंजाब, जिसने अब तक 50,815 मशीनें प्रदान की हैं, को 5,000 और सीएचसी स्थापित करने की आवश्यकता होगी – जबकि पहले से ही 7,378 स्थापित किए जा चुके हैं – और इसकी 41 फीसदी पंचायतों तक पहुंच होनी चाहिए। केंद्र ने डीजल और पेट्रोल से चलने वाले वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और भारत में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 2015 में फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ (हाइब्रिड) और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (फेम) इंडिया स्कीम शुरू की है। योजना को अधिक से अधिक अपनाने के लिए दो साल के लिए बढ़ा दिया गया है।

13 अगस्त, 2021 को लॉन्च की गई व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी, भारतीय सड़कों पर पुराने वाहनों को आधुनिक और नए वाहनों से बदलने के लिए सरकार द्वारा वित्त पोषित कार्यक्रम है। इस नीति से प्रदूषण कम होने, रोजगार के अवसर सृजित होने और नए वाहनों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। अगस्त 2021 में प्रधान मंत्री ने कार्बन उत्सर्जन को कम करने और वायु गुणवत्ता में सुधार करने के लिए 2025 तक पेट्रोल में इथेनॉल सम्मिश्रण के लक्ष्य को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा की। अगस्त 2021 में, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम, 2021 को अधिसूचित किया गया था, जिसका उद्देश्य 2022 तक एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक को समाप्त करना है। प्लास्टिक और ई-कचरा प्रबंधन के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व पेश किया गया है।
ग्रीन इंडिया मिशन का कार्यान्वयन भारत में पांच मिलियन हेक्टेयर की सीमा तक ग्रीन कलर बढ़ाने और अन्य पांच एमएचए पर मौजूद ग्रीन कवर की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए किया गया है। सरकार ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के प्रारूपण के साथ वायु प्रदूषण को एक अखिल भारतीय समस्या के रूप में स्वीकार किया, जिसका उद्देश्य पूरे भारत में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए संस्थागत क्षमता का निर्माण और उसे मजबूत करना था, स्वास्थ्य प्रभावों को समझने के लिए स्वदेशी अध्ययन करना था।
नीति-निर्माण करते समय चाहे वह पराली जलाना हो या थर्मल पावर प्लांट उत्सर्जन, स्वास्थ्य पर उनके संभावित प्रभावों पर विचार किए बिना निर्णय किए जाते हैं। नीति निर्माताओं के बीच स्वास्थ्य की समझ की कमी के परिणामस्वरूप, नीतियों का निर्माण और कार्यान्वयन समाज के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बहुत कम जानकारी के साथ किया जाता है।
नीति के लिए एक जोखिम-केंद्रित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देना जो जोखिम को कम करने में सबसे अधिक योगदान देती हैं और इस प्रकार स्वास्थ्य लाभ उत्पन्न करेगी। राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों में न केवल स्थानीय परिस्थितियों बल्कि कमजोर समूहों पर जोखिम के प्रभाव को भी शामिल करे। सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल ने वायु प्रदूषण नीतियों के विकास में स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के आह्वान को प्रेरित किया है। फ्रंट-लाइन वायु प्रदूषण नियामकों को समाज की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए।
मुख्य रूप से स्वास्थ्य लाभों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए नीति निर्माताओं को महामारी विज्ञान, पर्यावरण, ऊर्जा, परिवहन, सार्वजनिक नीति और अर्थशास्त्र के विशेषज्ञों को शामिल करना चाहिए। यह दृष्टिकोण जलवायु और वायु गुणवत्ता उपायों को गति देगा। हमें समझना होगा कि अधिकतम वायु प्रदूषण दहन स्रोतों से पैदा होता है। इसलिए स्वच्छ हवा हासिल करने का सबसे अच्छा तरीका ये होगा, कि फॉसिल ईंधन की खपत और उसे जुड़े उत्सर्जनों को कम किया जाए, जिसके लिए हमें बेहतर विकल्पों या कुशल प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों की ओर जाना होगा।

गृह मंत्री ने दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में Run for Unity को फ्लैग ऑफ किया। इस अवसर पर विदेश मंत्री एस जयंशकर, विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी और केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री निशिथ प्रमाणिक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अमित शाह ने उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई।
अमित शाह ने कल गुजरात के मोरबी में पुल हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज का ये कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है क्योंकि आज हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज हम एक ऐसे व्यक्ति की जयंती पर राष्ट्रीय एकता के महत्व को आगे ले जा रहे हैं, जिसने आजादी के बाद आधुनिक भारत के निर्माण की नींव रखी और इसकी कल्पना को साकार करने में अपना पूरा जीवन लगा दिया। श्री शाह ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम लेते ही आज के भारत का मानचित्र हमारे सामने आ जाता है और अगर सरदार साहब ना होते तो आज जिस विराट, संकल्पवान, सामर्थ्यवान भारत का अस्तित्व दुनिया के सामने है, वह शायद न होता।
अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद सबसे बड़ी समस्या देश के सामने थी कि 500 से भी अधिक रियासतों और राजाओं-रजवाड़ो को एकजुट कर भारतीय संघ बनाना और इस के निर्माण में देश के प्रथम गृह मंत्री एवं उप-प्रधानमंत्री सरदार साहब का बहुत बड़ा योगदान रहा। उन्होंने कहा कि ये सरदार साहब ही थे जिनकी कुशल और विलक्षण राजनीतिक क्षमता ने पूरे देश को एक किया। श्री शाह ने कहा कि देश को विभाजित करने में उस वक्त भी देशविरोधी ताकतों ने कोई कमी नहीं छोडी थी लेकिन ये सरदार साहब का प्रयास ही था जिसके परिणामस्वरूप आज भारत का यह मानचित्र हमारे सामने है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आज भारत आजादी का 75वां वर्ष मना रहा है और प्रधानमंत्री मोदी ने इस वर्ष में 130 करोड़ भारतीयों के सामनेवर्ष 2047 तक भारत कहाँ खड़ा होगा, एकजुट होकर इसका संकल्प लेने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि देश के 130 करोड़ लोगों और राज्यों का संकल्प मिलकर 2047 में सरदार साहब की कल्पना का भारत बनाने में अवश्य सफल होगा। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 8 वर्षों में देश कई महत्त्वपूर्ण उपलब्धियां हासिलकर गुलामी की सभी निशानियों से मुक्ति पाकर एक स्वाभिमानी, समृद्ध, सशक्त और सुरक्षित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया के नक्शे पर लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की देश को एकता के सूत्र में पिरोने की कल्पना को साकारकर गौरवपूर्ण स्थान पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक सरदार पटेल को भुलाने के प्रयासों के बावजूद वे अपने गुणों के चलते सदा अमर बने रहे और आज सरदार पटेल देश की समग्र युवा पीढ़ी के प्रेरणास्रोत बने हैं। उन्होने कहा कि आज देशभर में सरदार वल्लभभाई के रास्ते पर चलने का संकल्प लेने के लिए एकता दौड़ आयोजित की जा रही हैं।
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सोशल मीडिया पर लोगों की मनमानी को लेकर बहुत सारी आलोचनाओं का निदान करने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। यानी अब तक सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट करने की मनमानी पर नकेल कसने को सरकार ने मसौदा तैयार कर लिया है। सोशल मीडिया पर जो भी पोस्ट हो रहे हैं, उनमें कौन से पोस्ट देश या समाज हित में नहीं हैं, यह तय करने के लिए केंद्र सरकार समिति बनाने की तैयारी में है। सोशल मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर सरकार यह तय करेगी कि किस तरह के कंटेंट को उठाना है या कौन से कंटेंट को डाउन करना है। खासकर ऐसे कंटेंट जो देश, समाज हित या सामाजिक सौहार्द्र के लिए सही नहीं हैं, उन पर नकेल कसी जाएगी।सोशल मीडिया कंपनियों पर नकेल कसने के लिए पैनल गठन की अधिसूचना के मुताबिक, टेक कंपनियों को अपनी वेबसाइट, मोबाइल एप या दोनों पर सेवा नियमों और निजता नीति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। प्रस्तावित बदलावों में इंटरमीडियरी कंपनियों के लिए भारतीय संविधान द्वारा नागरिक अधिकारों का सम्मान करना भी जरूरी होगा। शिकायतों के निस्तारण के लिए 72 घंटे की व्यवस्था होगी।
प्रियंका सौरभ
सोशल मीडिया कंपनियां अब कंटेंट सामग्री के नियमन के नाम पर मनमानी नहीं कर पाएंगी। भारत सरकार ने इसके लिए नई व्यवस्था का खाका तैयार कर दिया है। इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी संशोध 2022 से जुड़े कानूनों को अधिसूचित कर दिया है। नए आईटी नियमों के तहत ट्विटर फेसबुक इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए भारत के आईटी नियमों को मानना अनिवार्य हो जाएगा। इन सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय की गई है। आज के दौर में सोशल मीडिया दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है इसलिए इसके इस्तेमाल में सावधानी जरूरी है। जाहिर है सोशल मीडिया बडा मुददा है इसलिए नए आईटी नियमों का सोशल मीडिया पर क्या असर होगा। सोशल मीडिया पर जो भी पोस्ट हो रहे हैं, उनमें कौन से पोस्ट देश या समाज हित में नहीं हैं, यह तय करने के लिए केंद्र सरकार समिति बनाने की तैयारी में है। सोशल मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर सरकार यह तय करेगी कि किस तरह के कंटेंट को उठाना है या कौन से कंटेंट को डाउन करना है। खासकर ऐसे कंटेंट जो देश, समाज हित या सामाजिक सौहार्द्र के लिए सही नहीं हैं, उन पर नकेल कसी जाएगी।
सोशल मीडिया कंपनियों पर नकेल कसने के लिए पैनल गठन की अधिसूचना के मुताबिक, टेक कंपनियों को अपनी वेबसाइट, मोबाइल एप या दोनों पर सेवा नियमों और निजता नीति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। प्रस्तावित बदलावों में इंटरमीडियरी कंपनियों के लिए भारतीय संविधान द्वारा नागरिक अधिकारों का सम्मान करना भी जरूरी होगा। शिकायतों के निस्तारण के लिए 72 घंटे की व्यवस्था होगी। किसी अन्य शिकायत पर 15 दिनों के अंदर एक्शन लेना होगा, जिससे आपत्तिजनक कंटेंट वायरल नहीं हो सके। यह भी सुनिश्चित करना पड़ेगा कि उसके कंप्यूटर रिसोर्स का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति किसी भी ऐसी सामग्री को होस्ट न करे, वितरित न करे, प्रदर्शित न करे, अपलोड न करे, प्रकाशित न करे और शेयर न करे जो किसी दूसरे व्यक्ति की हो, जिस पर यूजर का अधिकार न हो, अपमानजनक, अश्लील, बाल यौन शोषण, दूसरे की प्राइवेसी भंग करने वाली, जाति, वर्ण या जन्म के आधार पर उत्पीड़न करने वाली, हवाला के लिए प्रेरित करने वाली या अथवा देश के किसी भी कानून का उल्लंघन करने वाली, भारत की एकता, अखंडता, रक्षा, सुरक्षा, संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने वाली, विदेश नीति या संबंधों को प्रभावित करने वाली पोस्ट, वायरस/स्पैम फैलाने वाली सामग्री, गलत प्रचार जिसे आर्थिक लाभ के लिए तैयार किया गया हो और जिसमें किसी व्यक्ति या संस्था को ठगने, नुकसान पहुंचाने की संभावना लगती हो।
अगर कोई आपत्तिजनक सामग्री साझा की जाती है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खुद को ज़िम्मेदारी नहीं मानते हैं। हालाँकि वे अक्सर अपने प्लेटफॉर्म पर सामग्री को संपादित, प्रचारित और ब्लॉक करते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखना चाहिये कि कुछ प्लेटफॉर्मों में लगभग 50 करोड़ भारतीय उपयोगकर्त्ता शामिल हैं और यहाँ तक कि दूरदराज़ के इलाकों में भी उनकी पहुंँच है। एक सकारात्मक पहलू से देखने पर ये दिशा-निर्देश किसी भी अपराध की रोकथाम सुनिश्चित करने हेतु इन प्लेटफॉर्मों को जवाबदेह बनाने में मददगार साबित होंगे। नागरिकों की निजता के अधिकार को सुरक्षित करने और आईटी नियमों को उनके अंतिम उद्देश्य की पूर्ति करने हेतु व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2019 को पारित करने में तेज़ी लाने की आवश्यकता है। चूंकि, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म, उपयोगकर्ताओं द्वारा उनकी साइट पर पोस्ट की जाने वाली सामग्री को पहली बार में नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, इसलिए इनको- जब तक ये कंपनियां सरकार या विभिन्न अदालतों द्वारा निर्देशित किए जाने पर अपने प्लेटफ़ॉर्म पर होस्ट की गयी किसी भी सामग्री को हटाने के लिए सहमत रहती हैं- किसी भी आपत्तिजनक सामग्री के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं ठहराया जाना चाहिए। हालांकि, तकनीकी प्लेटफॉर्म हमें परस्पर जुड़े रहने में मदद कर सकते हैं, विचारों का एक जीवंत बाजार बना सकते हैं, और उत्पादों और सेवाओं को बाजार में लाने के लिए नए अवसर खोल सकते हैं, किंतु ये हमें विभाजित भी कर सकते हैं और वास्तविक दुनिया को गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
प्रभावशाली इंटरनेट प्लेटफॉर्म की एक छोटी संख्या “बाजार में प्रवेश करने वालों को बाहर करने, किराए की मांग करने, और अपने फ़ायदे के लिए अंतरंग व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा करने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग करती है।” इन प्लेटफ़ॉर्म को वर्तमान में उत्तरदायी ठहराए जाने से सुरक्षा प्राप्त है, और ये बाल यौन शोषण, साइबर स्टॉकिंग, और वयस्कों की अंतरंग छवियों का गैर-सहमति से वितरण जैसे मुद्दों को उचित रूप से संबोधित करने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं करते हैं। इन नियमों के बारे में चल रही आलोचना का समाधान इन्हें फिर से नए सिरे से प्रकाशित करना है। दिशा-निर्देश, अंततः सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अंतिम उपयोगकर्ताओं के बारे में हैं, बाद में इन नियमों की वृद्धि पूर्व में किये गए इनके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। अंतिम उपयोगकर्त्ताओं के हितों को सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिये तथा ऐसे किसी भी तरह के नियम और विनियम नहीं बनने चाहिये जो उनके मूल अधिकारों का उल्लंघन करते हों। इसके अलावा गलत और झूठी सूचनाओं पर अंकुश लगाने हेतु कानून और व्यवस्था का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता है, लेकिन इस बात को भी सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि नागरिकों की गोपनीयता से किसी भी प्रकार का कोई समझौता न हो।
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एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा;
“सूर्यदेव और प्रकृति की उपासना को समर्पित महापर्व छठ की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान भास्कर की आभा और छठी मइया के आशीर्वाद से हर किसी का जीवन सदैव आलोकित रहे, यही कामना है।”
सूर्यदेव और प्रकृति की उपासना को समर्पित महापर्व छठ की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान भास्कर की आभा और छठी मइया के आशीर्वाद से हर किसी का जीवन सदैव आलोकित रहे, यही कामना है।
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भारत सहित दुनिया भर के कई देशों के युवा डॉक्टरों ने 1980 में पोल पॉट शासन के पतन के बाद जब समाज में अव्यवस्था थी, तो कम्पुचिया (अब कंबोडिया) में संघर्ष की स्थिति में चिकित्सा राहत कार्य में भाग लिया। खालसा एड ऐसी परिस्थितियों में बहुत अच्छा काम कर रहा है। अक्टूबर 2018 में इंडोनेशिया में रोहिंग्या प्रवासियों, भूकंप और सुनामी राहत में सहायता देने के उनके विशेष योगदान, जनवरी 2018 में कांगोलेज (डीआरसी) शरणार्थी सहायता, मार्च 2017 में विकलांगों के साथ सीरिया के शरणार्थियों की सहायता ने इतिहास बना दिया है। इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट ने पंजाब, उत्तराखंड, कश्मीर, तमिलनाडु और नेपाल में बाढ़, सुनामी और पृथ्वी पर भूकंप के दौरान आपदा राहत कार्य का आयोजन किया, जिसमें भूस्खलन के शिकार सदस्यों को कठिन परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवा दी। आईएमए की ओर से पंजाब और कश्मीर में आई बाढ़ के बाद पंजाब के कुछ डॉक्टरों ने नेपाल में राहत कार्य का काम संभाला।
कश्मीर घाटी एक महीने से अधिक समय से पाबंदी में है। सरकारी दावों के बावजूद स्थिति सामान्य से बहुत दूर है। उनके सामान्य स्थिति के बयान पर विश्वास करना मुश्किल है जिन्होंने राज्य को ऐसी स्थिति में डाल दिया है। अपने परिवारों के साथ संचार की कमी के कारण छात्रों और अन्य जो कश्मीर घाटी से देश के अन्य हिस्सों में रह रहे हैं, अत्यधिक तनाव में हैं। इतनी लंबी अवधि के लिए संचार नेटवर्क से वंचित करना उन लोगों को गंभीर रूप से आहत कर रहा है जो पहले से ही क्षेत्र में लंबे समय से हिंसा के कारण लगातार तनाव में रह रहे हैं। यह अलगाव धीरे-धीरे विश्वास की कमी के कारण विकसित होता है और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर के कारण नफरत पैदा करता है, जो आने वाले समय में गंभीर परिणाम ला सकता है।

वैश्विक अनुभव से पता चला है कि ऐसी स्थितियों में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों ही बिगड़ते हैं। प्रतिबंध के कारण विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। उनके लिए भोजन, दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की तीव्र कमी होती है। दवाओं की आपूर्ति की कमी से कई स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। डॉ उमर का प्रकरण उदाहरण है।
एक यूरोलॉजिस्ट जिसे हिरासत में लिया गया था, सिर्फ स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए अधिकारियों को छूट देने का अनुरोध करने के लिए, ऐसी स्थितियों में एक आदर्श बन जाता है।
गर्भावस्था के दौरान एक महिला के मरने की रिपोर्ट क्योंकि जूनियर डॉक्टर प्रतिबंध के कारण वरिष्ठों को फोन नहीं कर पा रहे थे और दूरसंचार नेटवर्क की अनुपस्थिति ऐसी कुछ घटनाओं में से एक होनी चाहिए। हेल्थकेयर को ड्रग्स और अन्य उपकरणों और उनकी मरम्मत सहित विभिन्न आवश्यकताओं के आकलन के लिए दिन-प्रतिदिन की आवश्यकता होती है। कर्फ्यू और प्रतिबंध की स्थिति के तहत यह संभव नहीं है।
काम के अभाव में और कोई आय नहीं होने से उचित पोषण की कमी होती है जिससे स्वास्थ्य खराब होता है। ऐसी स्थिति किसी भी संघर्ष या किसी दीर्घकालिक आंतरिक प्रतिबंध की स्थिति में उत्पन्न होने के लिए अभिशप्त है। मेडैक्ट, यूके के डॉक्टरों के एक संगठन ने अमेरिका और सहयोगियों द्वारा आक्रामण के बाद इराक में एक अध्ययन किया था और बच्चों के बीच संपार्शि्वक क्षति और अधिक मौतों की सूचना दी थी।
इस प्रकार सभी स्वास्थ्य पेशेवरों का यह कर्तव्य है कि वे ऐसे अनुकूल उपायों की तलाश करें जहां लोगों को बीमरियों का शिकार न होना पड़े। अब चिकित्सा पेशेवरों के बीच यह एहसास बढ़ रहा है कि शैक्षणिक गतिविधियों को सार्वजनिक जरूरतों के साथ जोड़ा जाना है। चिकित्सा पत्रिकाएं अब सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर शिक्षाविदों की सीमाओं से बाहर हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ने परमाणु युद्ध के मानवीय प्रभाव का अध्ययन करने के लिए पहले ही पदभार संभाल लिया है।
उन्होंने मई 2019 में दुबई में इस मुद्दे पर एक दक्षिण एशिया परामर्श का आयोजन किया। नवीनतम लैंसेट प्रकाशन दिनांक 17 अगस्त 2019 इसका एक उदाहरण है। लैंसेट ने 17 अगस्त 2019 को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से प्रकाशित अपने लेख में स्थिति की वास्तविकता को इंगित किया था।
कश्मीर में एक विशिष्ट स्थिति है जहाँ स्थानीय लोगों की नहीं चल रही। स्वास्थ्य सेवा के उनके अधिकार पर हम पर्दा नहीं डाल सकते। देश के अन्य हिस्सों के लोगों का यह कर्तव्य बनता है कि वे सरकार से मांग करें कि उन्हें स्वास्थ्य सेवा मुफ्त में उपलब्ध कराई जाए। कश्मीर के लोग हमारे अपने लोग हैं और स्वास्थ्य सेवा के हर अधिकार के हकदार हैं।
चिकित्सा पेशेवर हमेशा सभी प्रकार की हिंसा के खिलाफ खड़े हुए हैं। स्वास्थ्य सेवा से वंचित करना भी आबादी के खिलाफ हिंसा है।
]]>सीएसएमसी में कुल दस राज्यों ने भागीदारी की। इनमें 27,746 मकान पश्चिम बंगाल के लिए, तमिलनाडु के लिए 26,709, गुजरात के लिए 20,903, पंजाब के लिए 10,332, छत्तीसगढ़ के लिए 10,079, झारखंड के लिए 8,674, मध्य प्रदेश के लिए 8,314, कर्नाटक के लिए 5,021, राजस्थान के लिए 2,822, उत्तराखंड के लिए 2,501 मकान हैं।
अभी तक 5.54 लाख करोड़ रुपये के समग्र निवेश को मंजूरी दी गई है, जिसमें केन्द्र और राज्य सरकारों का निवेश हिस्सा 3.01 लाख करोड़ रुपये और 2.53 लाख करोड़ रुपये निजी निवेश है।
केन्द्र सरकार ने 1.43 लाख करोड़ रुपये देने का वचन दिया है, जिसमें से 57,758 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। लगभग 53.5 लाख मकान बनाए जाने हैं, जिनमें से 27 लाख मकान पूरे कर लिए गए हैं। आवास और शहरी कार्य सचिव श्री दुर्गाशंकर मिश्र ने 2022 तक सभी के लिए घर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए परियोजनाएं पूरी करने की दिशा में प्रयास करने पर बल दिया है।
]]>
प्रधानमंत्री द्वारा एक पुरस्कार समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें सदस्य के रूप में केंद्रीय मंत्रिमंडल सचिव, प्रधान मंत्री के प्रधान सचिव, राष्ट्रपति के सचिव, गृह सचिव और प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए तीन-चार प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल होंगे। पुरस्कार में एक पदक और एक प्रशस्ति पत्र होगा। इस पुरस्कार के साथ कोई भी मौद्रिक अनुदान या नकद पुरस्कार संबद्ध नहीं होगा। एक वर्ष में तीन से अधिक पुरस्कार नहीं दिए जाएंगे। यह अति असाधारण और अत्यधिक सुयोग्य मामलों को छोड़कर मरणोपरांत प्रदान नहीं किया जाएगा।
नामांकन प्रति वर्ष आमंत्रित किए जाएंगे। आवेदनों को गृह मंत्रालय द्वारा विशेष रूप से डिज़ाइन की गई वेबसाइट पर ऑनलाइन फाइल करना आवश्यक होगा। धर्म, प्रजाति, जाति, लिंग, जन्म स्थान, आयु या व्यवसाय के भेदभाव के बिना भारत का कोई भी नागरिक और कोई भी संस्था/संगठन, इस पुरस्कार के लिए पात्र होगा।
भारत में स्थित कोई भी भारतीय नागरिक या संस्था या संगठन इस पुरस्कार के लिए विचारार्थ किसी व्यक्ति को नामांकित कर सकता है। व्यक्ति स्वयं को भी नामांकित कर सकते हैं। राज्य सरकारें, संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन और भारत सरकार के मंत्रालय भी नामांकन भेज सकते हैं।
यह पुरस्कार राष्ट्रपति के द्वारा उनके हस्ताक्षर और मुहर के तहत एक सनद के तौर पर प्रदान किया जाएगा और राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह के साथ एक पुरस्कार समारोह में उनके द्वारा दिया जाएगा।
]]>इससे पहले भारत ने 2013 में विश्व चैंपियनशिप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए एक रजत और दो कांस्य पदक जीते थे। पुरुष 86 किलो वर्ग में दीपक पूनिया ने रजत, पुरुष 65 किलो वर्ग में बजरंग पूनिया ने कांस्य, महिला 53 किलो वर्ग में विनेश फोगाट ने कांस्य, पुरूष 61 किलो वर्ग में राहुल अवारे ने कांस्य और पुरूष 57 किलो वर्ग में रवि दहिया ने भी कांस्य पदक अपने नाम किया था। दीपक, बजरंग, विनेश और रवि ने इस दौरान ओलंपिक कोटा भी हासिल किया।
यह पहला मौका है जब भारत ने विश्व चैंपियनशिप से चार ओलंपिक कोटा हासिल किए हैं। चार साल पहले भारत को सिर्फ एक ओलंपिक कोटा मिला था। तोक्यो ओलंपिक में कुश्ती की 18 स्पर्धाएं होंगी और भारतीय पहलवानों को क्वालीफाई करने के दो और मौके मिलेंगे। पहला मौका मार्च 2020 में एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप, जबकि दूसरा अप्रैल में विश्व क्वालीफिकेशन टूर्नामेंट में मिलेगा।
]]>लद्दाख में 11 वीं शताब्दी के विश्व प्रसिद्ध हेमिस मठ के पास चल रहे बौद्ध कार्निवल के आखरी दिन अर्थात कल शाम को लोक नृत्य का एक रूप इतिहास रचने के साथ मेले समाप्त हुआ। इस साल की 408 शोंडोल कलाकारों ने 2018 के त्योहार में भाग ले ने वाले 299 शोंडोल कलाकारों के नृत्य के पीछे छोड़के गिनीज बुक रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।
शांडोल प्रसिद्ध नृत्य है, जो विशेष अवसर पर लद्दाख के राजा के लिए कलाकारों द्वारा किया जाता था। इसका आयोजन लाइव टू लव इंडिया, द्रुक्पा चैरिटेबल ट्रस्ट और यंग द्रुक्पा एसोसिएशन द्वारा किया गया था। त्योहार के दौरान, यह न केवल प्लास्टिक के जीरो उपयोग पर केंद्रित था, बल्कि प्लास्टिक कचरा प्रबंधन और रीसाइक्लिंग पर धार्मिक और सामुदायिक नेताओं को भी जागरूक करता है।
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