एनआरसी सूची से बाहर लोगों को पुष्टि पर्ची देने के साथ ही उनके अपील करने की 120 दिन की अवधि शुरू हो जाएगी। ये लोग एनआरसी सूची में अपना नाम नहीं होने को विदेशी ट्राइब्यूनल में चुनौती दे सकते हैं।
एनआरसी सूची से बाहर लोग नाम न होने की पुष्टि पर्ची के साथ वर्तमान में मौजूद विदेशी ट्राइब्यूनल में तत्काल अपील कर सकते हैं। ये आशा की जाती है कि सभी जिलों में दो सौ और नये विदेशी ट्राइब्यूनल खुलने के बाद अपील की प्रक्रिया और सरल हो जाएगी। एनआरसी की अंतिम सूची में 19 लाख लोगों के नाम नहीं हैं।
]]>इसके अलावा डिप्टी कमिश्नर और सर्किल ऑफिसर के कार्यालयों में भी लोग कार्यालय समय के दौरान सूची में अपने नाम तलाश कर सकते हैं। सूची में दर्ज नामों और सूची से बाहर नामों की स्थिति के बारे में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की वेबसाइट www.nrcassam.nic.in. से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जो लोग प्रकाशित सूची की प्रविष्टियों से संतुष्ट नहीं होंगे, वे अपने दावे और आपत्तियां विदेशियों के लिए बनाए गये ट्राइब्यूनलों में दर्ज करा सकते हैं।
असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि एनआरसी की अंतिम सूची से बाहर लोग फॉरनर्स ट्राइब्यूनल में अपील कर सकते हैं। असम में प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष विजय गुप्ता ने कहा है कि ये देखने की जरूरत है कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में शामिल नहीं किए गए 19 लाख लोग कौन हैं। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि वास्तविक नागरिकों के नाम न छूटें।
]]>असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के बाढ़ संबंधी बुलेटिन के अनुसार मोरीगांव जिले में तीन लोगों, बारपेटा में तीन, दक्षिण सलमारा में दो और नलबाड़ी एवं धुबरी जिलों में एक-एक व्यक्ति की मौत होने से राज्य में अब तक हुई मौतों का आंकड़ा बढ़कर 62 हो गया है।
राज्य के प्रभावित जिलों के 3,024 गांवों में 44,08,142 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाढ़ की वजह से 13 जुलाई से अब तक 129 पशु मारे गए हैं, इनमें 10 गैंडे, आठ सांभर, आठ जंगली सुअर, पांच बारहसिंगा, एक हाथी और एक जंगली भैंस शामिल हैं। बाढ़ प्रभावितों ने राज्य के वित्त मंत्री हिमंत बिस्व शर्मा से शिकायत की है कि उन्हें राहत केंद्रों में न तो पर्याप्त राहत सामग्री दी जा रही है और न ही रहने की सुविधा है।
असम की तरह ही बिहार में भी बाढ़ की बुरी स्थिति है। अब तक बाढ़ की वजह से पांच और लोगों की मौत हो चुकी है। अब यह आंकड़ा बढ़कर 97 हो गया है। राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग ने यह जानकारी दी है।
मधुबनी जिले से चार लोगों और दरभंगा से एक व्यक्ति के मरने की सूचना है, जिससे मधुबनी में हताहतों की संख्या अब 18 और दरभंगा में 10 हो गई है। आपदा प्रबंधन विभाग ने एक रिपोर्ट में कहा कि सीतामढ़ी में 27 लोगों के मरने की सूचना है और यह बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिला बना हुआ है।
उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राहत एवं पुनर्वास का जायजा लेने के लिए शनिवार को सीतामढ़ी जिले का दौरा किया। बिहार में कुल 12 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं, बारिश की वजह से दक्षिण के राज्य भी खासे प्रभावित हुए हैं। बारिश जनित घटनाओं में तमिलनाडु में भी दो लोगों की मौत हुई है और तीन मछुआरों समेत चार लोग लापता हैं। केरल में भी लगातार भारी बारिश जारी है। राज्य के कासरगोड जिले में कुडुले में शनिवार तक 30 सेंटीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। पर्वतीय इडुक्की जिले के कोन्नाथाडी गांव में शनिवारद की सुबह भूस्खलन हुआ, जिससे फसलें बर्बाद हो गईं।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी में भी भारी बारिश होने से लोगों को उमस भरे मौसम से राहत मिली। न्यूनतम तापमान 28.8 डिग्री सेल्सियस और सुबह साढ़े आठ बजे तक हवा में नमी का स्तर 74 प्रतिशत दर्ज किया गया।
]]>बाढ़ से प्रभावित उत्तरी बिहार के दर्जन भर जिलों का लगभग यही हाल है। जन-जीवन अस्त-व्यस्त है। लोग अपने आप को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वे अपना गाँव छोड़कर पशुओं और परिवार समेत पानी से दूर ऊंचे जगहों पर विस्थापित होने का प्रयास कर रहे हैं।
नेपाल में हो रही बारिश ने बिहार में बाढ़ का कहर बढ़ाया है। पूर्वी चंपारन में बाढ़ का बहाव देख रहे पांच बच्चे जयसिंहपुर नहर व पानी से भरे गड्ढे में डूब गए। इन्हें एनडीआरएफ ने अभी बाढ़ मृतकों में नहीं गिना है। वहीं अररिया में 9 और मोतिहारी में 10 लोगों की जान गई है।
दरभंगा में बचाव कार्यों के साथ खाने के पैकेट बंटवाए जा रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों में डॉक्टर भेजे गए हैं। सीएम नितीश कुमार ने पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज जिलों का हवाई सर्वेक्षण कर हालात का जायजा लिया है।
इन जगहों पर हालात हैं बहुत खराब
लगातार सात दिन की बारिश से मेघालय में सवा लाख नागरिक बाढ़ की चपेट में हैं। ब्रह्मपुत्र व जिंजिराम नदियों ने कई इलाकों को डुबो दिया है। पश्चिम गारो पर्वतीय जिले के मैदानी इलाके बाढ़ की चपेट में हैं। डेमडेमा ब्लॉक के 50 गांवों के और सेलसेल्ला ब्लॉक के 104 गांवों के नागरिक बाढ़ की चपेट में हैं। राजधानी शिलांग के निचले इलाकों में पानी भरा है। यहां खावथलांगतुईपुई नदी में बाढ़ से लुंगेई जिले में 32 गांवों के 700 घर बाढ़ में डूबे हैं। यहां से आठ सौ परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। बारिश से मिजोरम में सोमवार तक पांच नागरिकों की मौत हुई है। दो सौ परिवारों को केंद्रीय मिजोरम के सेरचिप जिले से निकाल सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है।
त्रिपुरा में 15 हजार लोग बेघर, घटा नदियों का स्तर
राजधानी अगरतला में बाढ़ से बेघर हुए 10 हजार लोग भटक रहे थे। उन्हें राहत शिविरों में शरण दी गई है। प्रदेश में कुल 15 हजार नागरिकों को सरकारी इमारतों में आश्रय दिलाया गया है। तेज बारिश ने पश्चिम त्रिपुरा और खोवाई जिलों में तबाही मचाई है। हालांकि सोमवार शाम तक खोवाई और हाओरा नदिया का जलस्तर घटने से हालात में सुधार आने लगा। क्षेत्रीय मौसम विभाग निदेशक दिलीप साहा के अनुसार सोमवार को बारिश रुकी है। महाराष्ट्र: भारी बारिश के बाद यहां पालघर और ठाणे जिलों को हाईअलर्ट पर रखा गया है। क्षेत्र में बने दो बड़े बांध पूरी तरह भर चुके हैं।
]]>राज्य सरकार ने डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द करने के साथ ही बीमारी से निपटने की कोशिशें तेज कर दी हैं। दीमा हसाओ जिले में कुंजलता हकमकासा (60) जापानी बुखार का पहला शिकार हुई थीं। उन्हें हैफलॉन्ग सिविल अस्पताल में पिछले सप्ताह भर्ती कराया गया था। शनिवार को इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। शनिवार को राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने 30 सितंबर तक के लिए डॉक्टरों, नर्सों और हेल्थ सेक्टर के दूसरे कर्मचारियों की सभी छुट्टियां रद्द करने का नोटिफिकेशन जारी किया है।
स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्व शर्मा का कहना है इमर्जेंसी केस में केवल डेप्युटी कमिश्नर को छुट्टी की इजाजत मिलेगी। हमने यह भी निर्देश दिया है कि कोई भी डॉक्टर, नर्स या दूसरे स्वास्थ्य कर्मी अपनी पोस्टिंग वाली जगह से बाहर नहीं जाएंगे। इस दौरान कोई भी गैरहाजिर पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अनाधिकारिक अनुपस्थिति को आपराधिक लापरवाही मानते हुए संबंधित शख्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। सभी डेप्युटी कमिश्नरों को अलर्ट जारी किया गया है। उन्हें पंचायत और शहरी निकायों के साथ जेई के मामलों में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
शर्मा ने कहा कि जेई के लिए असम इस समय संक्रमण काल से गुजर रहा है। 5 जुलाई तक जेई के 190 मामले सामने आए, जिनमें 49 मरीजों की मौत हो गई। उन्होंने कहा वर्तमान मौसम में बीमारी के फैलने के अनुकूल स्थिति है, क्योंकि इस समय यहां भारी बारिश होती है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि धान की बड़े पैमाने पर खेती के साथ ही पूरे राज्य में सुअर पालन की वजह से वायरस को बढ़ने में मदद मिलती है। मंत्री ने कहा रूटीन टीकाकरण के तहत जेई पर लगाम के लिए 2016-17 में 20 जिलों में अभियान चलाया गया था। बिस्व शर्मा ने बताया कि 12.8 लाख ब्लड स्लाइड के जरिए सैंपल इकट्ठा किए जा चुके हैं। जेई से प्रभावित 1094 गांवों में फॉगिंग की जा रही है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों में इलाज का खर्चा राज्य सरकार की तरफ से उठाया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग ने इसके साथ ही कई आपातकालीन कदम भी उठाए हैं। इसके तहत जेई या एईएस (अक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम) से पीड़ित मरीजों को 1000 रुपए स्पेशल ट्रांसपॉर्ट अलाउंस (भत्ता) दिया जाएगा। इसके अलावा दवा, जांच, हॉस्पिटल खर्च के साथ ही आईसीयू केयर का वहन भी स्वास्थ्य विभाग करेगा। जेई या एईएस से पीड़ित कोई मरीज अगर सरकारी अस्पताल में बेड की अनुपलब्धता की वजह से किसी निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती होता है, तो अलाउंस के रूप में एक लाख रुपए तक का भुगतान सीधे अस्पताल को किया जाएगा।
]]>हालांकि, उन्होंने जानकारी दी है कि अभी भी जुलाई और अगस्त के महीने महत्वपूर्ण होने वाले हैं। इन महीनों में बीमारी का असर लोगों पर होता है। डिब्रूगढ़ के असम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में पिछले महीने में एक बच्चे सहित 35 लोगों की मौत हो गई है।
अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट इंद्र चुटिया ने बताया कि 1 जनवरी से 30 जून तक 133 मरीजों को भर्ती किया गया। जिनमें से 82 को अक्यूट इंसेफलाटिस सिंड्रोम और 51 को जापानी इंसेफलाइटिस हुआ था। ये मरीज डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, लखीमपुर, धीमाजी, शिवसागर और चराईदेव के थे। उन्होंने बताया कि 35 में से 25 मौतें एईएस और 10 जेई के कारण हुई थीं। अभी 98 मरीजों का इलाज चल रहा है जिनमें से 57 को एईएस और 41 को जेई है।
राज्य में बीमारी की रोकथाम के लिए जेई के टीके लगाए जा रहे हैं। लार्वा को मारने के लिए कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है। बारिश के कारण ऐसी बीमारियां फैलने के हालात बन जाते हैं। इस कारण एहतियात के तौर पर संभावित इलाकों से ब्लड सैंपल टेस्ट के लिए भेज रहे हैं।
वहीं अधिकारियों का कहना है कि इंसेफलाइटिस के मरीजों के लिए चार इंटेन्सिव केयर यूनिट तैयार रखे गए हैं। सभी जरूरी दवाओं का इंतजाम कर लिया गया है। चुटिया ने बताया कि अस्पताल में एक जेई ब्लॉक तैयार किया जा रहा है जिसमें 60 बेड का इंतजाम होगा। यह सितंबर तक तैयार हो जाएगा।
गौरतलब है कि जून से अगस्त के बीच इस बीमारी के सबसे ज्यादा मामले होते हैं। पालतू सूअर और जंगली पक्षी इसके संक्रमण का कारण होते हैं। उधर, जोरहाट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 5 बच्चों की पिछले एक हफ्ते में मौत हो गई। प्रशासन ने बताया है कि 7 बच्चों सहित 10 लोगों का इलाज चल रहा है। अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट सौरभ बोर्कोटोकी ने बताया कि 5 बच्चों सहित 6 की अस्पताल में मौत हो गई। बताया जा रहा है जोरहाट में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने नाकाचरी, बोरहोला, तीताबोर, मरियाना और दूसरे इलाकों में दौरा किया है।
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