1.वर्तमान छात्रों के लिए शुल्क में कोई वृद्धि नहीं की गई है।
2.नए नामांकनों के लिए, वृद्धि तीन साल या उससे अधिक की अवधि के लिए क्रमिक होगी, जैसा कि आईआईटी के संबंधित बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा निर्णय किया जाएगा।
3.जरूरतमंद छात्रों को आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
4.अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग और अन्य के लिए सभी रियायतें और छात्रवृत्ति बिना परिवर्तन जारी रहेंगी।
5.शुल्क में वृद्धि गैर-गंभीर छात्रों को निरूत्साहित करेगी, जो आईआईटी में कुछ महीनों के प्रवास के बाद, पाठ्यक्रमों को बीच में ही नौकरी करने या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए छोड़ देते हैं।
6. पाठ्यक्रमों को इस तरीके से बीच में छोड़ने से एक तरफ इच्छित सीटों का नुकसान होता है और दूसरी तरफ यह गंभीर और मेधावी छात्रों को अवसर से वंचित कर देता है।
7. आईआईटी केवल उन्हीं पाठ्यक्रमों की पेशकश करेगा जिनकी बाजार में मांग है। यह पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद तत्काल नियुक्ति सुनिश्चित करेगा।
8.अच्छे और योग्य छात्रों को शिक्षण सहायता / छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।
9. आईआईटी में एम.टेक पाठ्यक्रमों के लिए शुल्क को लंबे समय से संशोधित नहीं किया गया है, जबकि प्रति छात्र लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मंत्रालय ने आईआईटी में अध्ययन करने के लिए आने वाले भविष्य के सभी छात्रों को आश्वासन दिया है कि किसी भी छात्र को कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण शिक्षा के अवसर से वंचित नहीं किया जाएगा।
]]>नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने जेईई-मेन,2019 से शीर्ष रैंक वाले 2.45 लाख परीक्षार्थियों को जेईई-एडवांस्ड परीक्षा देने के लिए क्वालिफाई घोषित किया। लेकिन इनमें से 1.73 लाख ने ही पंजीयन करवाया। उसके बाद 27 मई को मात्र 1,61,319 परीक्षार्थी ही जेईई-एडवांस्ड के पेपर देने पहुंचे।
आईआईटी रुड़की द्वारा आयोजित जेईई-एडवांस्ड, 2019 के रिजल्ट में इस वर्ष 38,705 विद्यार्थियों को काउंसलिंग के लिए पात्र घोषित किया गया है। जिसमें 33,349 छात्र तथा 5356 छात्राएं शामिल हैं जबकि गत वर्ष 1.52 लाख परीक्षार्थियों में से 31,988 को क्वालिफाई घोषित किया गया था।

ये विद्यार्थी 23 आईआईटी संस्थानों की 12,069 से अधिक सीटों के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेंगे। ये सीटें गत वर्ष की हैं, जिसमें लड़किओं की कैटेगरी के लिए आरक्षित 80 सीटें भी शामिल थी। इस वर्ष गल्र्स कैटेगरी एवं ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में 10 प्रतिशत रिजर्वेशन की अतिरिक्त सीटें और बढ़ जाएंगी।
क्यों घट रही है रुचि?
सूत्रों ने बताया कि 23 आईआईटी में फैकल्टी की निरंतर कमी, नये आईआईटी में आधारभूत सुविधाओं व संसाधनों की कमी के चलते अच्छे प्लेसमेंट नहीं होने से विद्यार्थी नई आईआईटी से बीटेक करने को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं। इसकी तुलना में वे पुराने एनआईटी से मनपसंद ब्रांच में बीटेक करना चाहते हैं।
वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष 83,681 (34.15 प्रतिशत) विद्यार्थियों का आईआईटी जैसे संस्थानों से मोहभंग हो जाना विंचारणीय है। इससे आईआईटी की वर्ल्ड क्लास रैंकिंग भी प्रभावित हो सकती है। केवल कटऑफ में गिरावट करने तथा क्वालिफाई विद्यार्थियों की संख्या बढाये जाने से रिक्त सीटें नहीं भर सकती है। इसके लिये आईआईटी संस्थानों की गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा।
तीन वर्षों में घटता रूझान
वर्ष क्वालिफाई अनुपस्थित (प्रतिशत में)
2017 2,21834 62,294 28.08
2018 2,31,024 66,822 28.92
2019 2,45,000 83,681 34.15