



देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान में गेस्ट हाउस और महिला छात्रावास के भी नए भवनों का उद्घाटन किया। जावड़ेकर ने संस्थान की वार्षिक आम बैठक को भी संबोधित किया। मंत्री महोदय ने वार्षिक रिपोर्ट और संस्थान की वार्षिक आम बैठक की प्रस्तुति की भी अध्यक्षता की।
इस अवसर पर मंत्री ने भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राचीन प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हमें सतत विकास के लिए एक मार्ग तैयार करना होगा जो हमारी प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ विकास जरूरतों को संतुलित भी कर सके। इस संबंध में उन्होंने वन्यजीवों के जीनोमिक्स का अध्ययन करने के लिए अद्वितीय प्रयोगशाला स्थापित करने में भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने लुप्तप्राय पक्षी, द ग्रेट इंडियनबस्टर्ड के संरक्षण के प्रयासों के लिए भीवैज्ञानिकों को बधाई दी।
]]>एएआई के प्रयासों की सराहना करते हुए पुरी ने कहा कि भारतीय हवाई अड्डों पर बढ़ते यात्री और माल यातायात से भारतीय अर्थव्यवस्था के तेज विकास का परिचय मिलता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में नागरिक विमानन क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था का संवाहक होगा।
कार्यक्रम में नागरिक विमानन मंत्रालय के सचिव ने कहा कि मशीनों के पीछे काम करने वाले लोग हर संचालन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने कहा कि आकाश में हवाई जहाजों को सुरक्षित बनाने के लिए हमारे एयर ट्रैफिक कंट्रोलर गुमनाम महानायक हैं और हम उनके प्रति कृतज्ञ हैं।
डीएटीएस-परिसर के विशेष पक्ष इस प्रकार हैं –
इस अवसर पर राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द ने 23 अगस्त को नई दिल्ली में दयालुता पर पहले विश्व युवा सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं में सहानुभूति, सद्भावना और जागरूकता की भावना जागृत करना है ताकि वे अपने आप में परिवर्तन कर सके और अपने समुदायों में स्थायी शांति का माहौल बना सकें।

राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी एक महान और दूरदर्शीजननायक थे। गांधीजी हमारी वर्तमान चिंताओं जैसे शांति और सद्भावना की आवश्यकता, आतंकवाद तथा जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में भी प्रासंगिक है। उन्होंने कुछ सार्वभौमिक आदर्शों और मूल्यों का मानवीकरण किया। गांधीजी को किसी भी युग में रखते है तो हम पाते हैं कि वे सभी युगों के लिए प्रासंगिक हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि पूरे विश्व में जो हिंसा और विद्रोह की घटनाएं हो रही है उनमें अधिकांश पूर्वाग्रह पर आधारित है। ये हमें दुनिया को ‘हम लोग बनाम वे लोग’ के आधार पर दुनिया को देखने के लिए बाध्य करती है। गांधीजी के आदर्शों का पालन करते हुए हमें और हमारे बच्चों को ‘उन लोगों’ के साथ बातचीत करने और घुलने-मिलने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने शिक्षा को साक्षरता से आगे ले जाने की जरूरत के बारे में बतलाया । शिक्षा से छात्रों को अपने अंदर झांकने की प्रेरणा मिलनी चाहिए। उनकी आंतरिक शक्ति मजबूत होनी चाहिए, ताकि वे दूसरों के कष्टों को समझ सकें। शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जो छात्रों में वर्ग और वर्ण के विभेद को समाप्त कर सके।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस सम्मेलन में विश्व के युवा नेता भाग ले रहे हैं। विश्व को दयालु, संवेदनशील और शांतिपूर्ण बनाने में पूरी दुनिया के युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि इस सम्मेलन में भाग ले रहे युवा अपने पूरे जीवन में दयालुता के दूत के रूप में कार्य करते रहेंगे।
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