वर्ष 2018-19 के दौरान पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सरकार और आईसीएआर के लिए कुल 584.33 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी। इन तीनों राज्य सरकारों ने व्यक्तिगत स्वामित्व के आधार पर किसानों को 32,570 मशीनों का वितरण किया और 7,960 कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना की।

किसानों और राज्य सराकारों की चिंताओं को दूर करने के लिए इस सम्मेलन का आयोजन आईसीएआर के सहयोग से किया गया था। डा. नागेश सिंह की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट के अनुसार, पराली जलाने की घटनाओं में साल 2018 में वर्ष 2017 एवं 2016 के मुकाबले क्रमशः 15% और 41% की कमी आई है।
इस सम्मेलन के दौरान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के 20 किसानों का चिन्हित कृषि यंत्रों का उपयोग कर फसल अवशेषों के प्रबंधन में बहुमूल्य योगदान देने, साथ ही साथ अपने गांव के अन्य किसानों को फसल अवशेषों का मौके पर ही प्रबंधन कर उन्हें पराली न जलाने को प्रेरित करने के लिए सम्मान किया गया।
इस दौरान कृषि राज्य मंत्री ने किसानों द्वारा 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित सीएचसी की कस्टम हायरिंग सेवाओं का लाभ उठाने के लिए एक बहुभाषी मोबाइल एप ‘सीएचसी फार्म मशीनरी’ की भी शुरुआत की। यह एप किसानों का उनके इलाके की कस्टम हायरिंग सेवाओं से संपर्क कराएगा। इस एप को गूगल प्ले स्टोर से किसी भी एंड्रायड फोन पर डाउनलोड किया जा सकता है।
]]>वे आज नई दिल्ली में किसानों के लिए तकनीकी नवाचार और रणनीतियों पर आयोजित दो दिन के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसानों को अपने खेतों में नई तकनीक और उन्नत तरीकों को अपनाना चाहिए। उन्हें स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों के साथ नियमित रूप से बातचीत करते रहना चाहिए।
]]>इस कानून के बन जाने के बाद यदि कोई किसान पानी चोरी करते हुए पकड़ा गया, तो उसे 2 साल की जेल और 2 लाख तक का जुर्माना या दोनों सजा एक साथ हो सकती हैं। देश में इस तरह का यह पहला कानून है। जिसमें पानी की चोरी करने पर किसानों को 2 साल के लिए जेल भेजा जाएगा।
प्राकृतिक आपदा के कारण यदि पानी नहीं बरसा, और किसान ने फसल को बचाने के लिए पानी की चोरी कर ली। ऐसी स्थिति में उसे 2 साल के लिए जेल जाना पड़ेगा। गुजरात सरकार के इस प्रावधान से किसानों में चिंता व्याप्त हो गई है। फसल में जब पानी बहुत आवश्यक होता है।
किंतु सरकार अब इस मामले में किसानों को जेल भेजने में अमादा हो गई है। अभी तक बिना अनुमति के सिंचाई के लिए पानी लेने पर जुर्माने का प्रावधान था। गुजरात सरकार ने अब सजा का प्रावधान करके किसानों को चिंता में डाल दिया है। सरकार के इस नए संशोधन प्रस्ताव के बाद किसान खेती करेंगे, या डर के मारे खेती करना ही छोड़ देंगे।

गुजरात देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने पानी चोरी करने पर किसानों को जेल भेजने का प्रावधान किया है। गुजरात सरकार की देखा देखी अन्य राज्य में इसी तरह का प्रयास कर सकते हैं। जिसका दीर्घ कालीन असर खेती पर पड़ना तय माना जा रहा है। किसान बहुत जोखिम लेकर खेती करता है। उसके ऊपर खाद बीज और मजदूरी का कर्ज होता है।
यदि समय पर बारिश नहीं होती है तो पूरी फसल बर्बाद हो जाती है। ऐसे समय पर यदि उसे फसल बचाने के लिए पानी लेना आवश्यक हो जाता है। बिना अनुमति के यदि उसमें पानी ले लिया तो उसका जेल जाना तय होगा। ऐसी स्थिति में अब किसान खेती करेंगे या नहीं इसको लेकर गुजरात में किसानों के बीच चर्चाएं होने लगी हैं। गुजरात में लगभग दो दशक से भाजपा का शासन है। इतने लंबे शासनकाल में यदि किसानों को फसल के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है, तो यह गुजरात सरकार की अक्षमता ही मानी जाएगी। जैसे कोई मां अपने बच्चे को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करती है। लगभग वही हालत किसान की होती है।
]]>मुख्यमंत्री ने कहा कि फसलों के विविधीकरण के साथ ही सामानांतर रूप से शहरी क्षेत्रों के चारों ओर कृषि क्षेत्रों को आर्थिक रूप से सुदृढ किए जाने की दिशा में देश में परि अर्बन कृषि को आधार बनाकर नई योजनाएं तैयार करने पर भी विचार विमर्श हुआ।राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हरियाणा प्रदेश का काफी कृषि क्षेत्र स्थित होने के दृष्टिगत पेरि अर्बन कृषि का हरियाणा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है और पेरि अर्बन कृषि के लिए नई योजनाएं तैयार होने से कृषि क्षेत्र आर्थिक रूप से सुदृढ होने साथ ही शहरों में लोगों को ताजा कृषि व अन्य खाद्य उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे।
हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय दोगुणा किए जाने की दिशा में कृषि उत्पादों के विपणन के संदर्भ में किसानों के लिए भंडारण सुविधा उपलब्ध करवाने की दिशा में भी विवरण तैयार किया जाएगा। कृषि फसलों की खरीदारी में केंद्र की भागीदारी बढाए बारे भी विचार विमर्श हुआ। लघु सिंचाई योजनाओं में केंद्रीय अनुदान बढाए जाने की आवश्यकता पर बैठक में विचार-विमर्श हुआ।हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार सिंचाई योजनाओं में 85 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। केंद्रीय अनुदान में वृद्धि किए जाने से लघु सिंचाई योजनाओं को और अधिक विस्तार मिल सकेगा।
उल्लेखनीय है कि ‘भारतीय कृषि में परिवर्तन’ के संदर्भ में नीति आयोग की उच्चाधिकार प्राप्त मुख्यमंत्रियों की समिति की प्रथम बैठक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व समिति के संयोजक देवेन्द्र फडनवीस की अध्यक्षता में हुई। समिति की बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर भी मौजूद रहे। बैठक में मौजूद हैं गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी व अरूणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भाग लिया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।
]]>