भाषा की समृद्धि का वरदान सबसे ज्यादा भारत को प्राप्त है। देश में लगभग 122 भाषाएं और 19500 से अधिक बोलियां शामिल हैं जिनका समृद्ध इतिहास है। भारत की भाषा सबसे समृद्ध है और हमें गुलामी के कालखंड के भाव को छोड़ना होगा। बच्चों से अपनी भाषा में बात करनी होगी। उनका कहना था कि भाषा तभी जीवित रहती है जब समाज उसका उपयोग करता है इसलिए हमें नई पीढ़ी को अपनी भाषा के साथ जोड़ कर गौरवान्वित महसूस कराना होगा।
उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश अपनी भाषा छोड़ चुके हैं और वह देश अपना अस्तित्व भी खो चुके हैं। भाषा ही व्यक्ति को अपने देश, संस्कृति और मूल के साथ जोड़ती है। श्री शाह का कहना था कि आज आत्म चिंतन और आत्मावलोकन की जरूरत है।

अमित शाह ने कहा कि अनेक भाषा और बोलियां हमारी ताकत है किंतु देश में एक ऐसी भाषा होनी चाहिए जो सब लोग समझते हों। देश में हिंदी भाषा को प्रचारित, प्रसारित तथा लगातार संशोधित करना और उसके साहित्य को लगातार समृद्ध करना हमारा राष्ट्रीय दायित्व है। यह कार्यक्रम सभागारों का नहीं बल्कि जनता का कार्यक्रम होना चाहिए ।
उन्होंने हिंदी टि्वटर अकाउंट खोलने में और साथ ही साथ संयुक्त राष्ट्र में हिंदी समाचार बुलेटिन शुरू करने में सुषमा स्वराज महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में भी उल्लेख किया। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डकें की चोट पर वैश्विक मंच पर भी हिंदी में भाषण देते हैं और दाहोश में अंग्रेजी के अलावा अपने देश की भाषा में बोलने वाले पहले राष्ट्राध्यक्ष हैं। नरेंद्र मोदी ने विश्व को समझाया कि भारत में अर्थव्यवस्था के साथ संस्कृति का चिंतन मूल है।
इससे पहले, गृहमंत्री ने हिन्दी दिवस के अवसर पर राजभाषा पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने विभिन्न विभागों, मंत्रालयों और कार्यालयों के प्रमुखों को हिन्दी भाषा को प्रोत्साहन देने में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्रदान किए। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय और जी. किशन रेड्डी भी इस मौके पर मौजूद थे।
प्रधानमंत्री ने भी इस अवसर पर ट्वीट के जरिये देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दी ने अभिव्यक्ति में सहजता, सरलता और शालीनता की भावना को बहुत सुंदर ढंग से आत्मसात किया है।

विदेशी अधिनियम १९४६ और विदेशी (न्याययाधिकरण) आदेश १९६४ के तहत केवल विदेशी न्यानयाधिकरणों को किसी व्य्क्ति को विदेशी घोषित करने का अधिकार है। इसलिए एनआरसी में जिन व्यशक्तियों का नाम शामिल नहीं हुआ है, उसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें विदेशी घोषित कर दिया गया है।
राज्य सरकार ने सुविधाजनक स्थाानों पर पर्याप्तो संख्या में नयायाधिकरणों के गठन के लिए सहमति व्यतक्तश की। यह भी तय किया गया कि राज्य सरकार एनआरसी में शामिल होनेसे छूट जाने वाले जरूरतमंदों को कानूनी सहायता देने का पूरा इंतजाम करेगी।
चूंकि अंतिम एनआरसी में शामिल होने से छूट जाने वाले व्यरक्तियों के लिए निर्धारित समयसीमा के अंदर अपील करना संभव नहीं है, इसलिए गृह मंत्रालय अपील दायर करने की वर्तमान समय सीमा को ६० दिन से बढ़ाकर १२०दिन करने के लिए नियमों में संशोधन करेगा। नागरिकता (नागरिकों का पंजीरकणऔर राष्ट्रीरय पहचान पत्र निर्गमन) नियम, २००३ को भी संशोधित किया जा रहा है।
कानून व्यिवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकार के आकलन के अनुसार केन्द्रीाय सशस्त्र अर्द्ध सैनिक बलों की तैनाती उपलब्ध कराई जा रही है।