भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन – इसरो लैंडर विक्रम को चांद की कक्षा से निकालकर चांद की सतह पर सहजता से उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है। ये महत्वयपूर्ण और सबसे जटिल प्रक्रिया आज देर रात एक से दो बजे के बीच की जाएगी। इसरो के अध्यहक्ष डॉ के सिवन के अनुसार प्रक्रिया शुरू होने पर लैंडर विक्रम को चांद के दक्षिण ध्रुव पर उतरने में केवल १५ मिनट का समय लगने की उम्मीसद है।
इसरोकी वैज्ञानिकों ने बताया कि लैंडर को चांद की सतह पर उतारने में उसकी गति धीमी करने और उसे संतुलित करने के लिए पांच थ्रस्टकर लगाए गए हैं। उतरने के लगभग चार घंटे बाद लैंडर विक्रम से रोवर प्रज्ञान अलग होगा। रोवर चांद के बारे में महत्वसपूर्ण जानकारी भेजेगा।
लैंडर को चांद की कक्षा तक ले जाने वाला आर्बिटर एक वर्ष तक चांद की परिक्रमा करेगा। आर्बिटर और लैंडर के बीच आपस में संपर्क रहेगा तथा ये बेंगलुरू के पास ब्या लालू में इंडियन डीप स्पेास नेटवर्क के एंटीना से भी संपर्क साध सकेंगे। रोवर चांद की सतह से जानकारी इकट्ठा कर लैंडर तक पहुंचाएगा। फिर लैंडर अपनी तथा रोवर से मिली जानकारी धरती पर पहुंचाएगा।
आर्बिटर के मिशन का जीवनकाल एक वर्ष का है और लैंडर तथा रोवर एक चंद्रमा दिवस तक कार्य करेंगे जो धरती के १४ दिनों के बराबर है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्रथ मोदी आज रात बेंगलूरू पहुंचेंगे और इन गौरवशाली पलों के साक्षी बनेंगे। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, १० अगस्त से २५ अगस्त, २०१९ तक MyGov.in के समन्वय में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा एक ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इस क्विज प्रतियोगिता में ५.८ लाख से अधिक छात्रों ने भाग ली थी। नीचे दी गई विजेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेंगलुरु में इसरो की कंट्रोल रूम पर बैठके चंद्रमा पर चंद्रयान -२ को उतरते हुए देखेंगे।
राष्ट्रींय क्विज प्रतियोगिता से चुने गए देशभर के 70 विद्यार्थी


इसरो बेंगलूरू में टेलीमेट्री, ट्रेकिंग और कमांड नेटवर्क के उपग्रह नियंत्रण केंद्र में वैज्ञानिक चंद्रयान- २ चांद की सतह पर उतरने की प्रक्रिया पर सक्रियता से काम कर रहे हैं। लैंडर विक्रम अभी चांद की अपेक्षित कक्षा में है। वे पूरी तरह आश्वेस्त हैं और चंद्रयान-२ को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
नासा ने आज से 50 साल पहले 20 जुलाई 1969 को अपोलो 11 मिशन को पूरा किया था। इस मिशन के तहत पहली बार अमेरिका ने किसी इंसान को चांद पर भेजने में सफलता पाई थी। वह क्षण मिशन में लगे लोगों के लिए गौरवान्वित करने वाला था। इतने सालों बाद भी इसकी स्मृतियां ताजा हैं। इस मौके पर गूगल ने डूडल बनाया है। इस डूडल में गूगल ने एक एस्ट्रोनॉट को चांद पर उतरता हुआ दिखाया है।
इस मिशन के साथ ही नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बने थे। आर्मस्ट्रांग के कुछ मिनट बाद एडविन ‘बज’ एल्ड्रिन ने चंद्रमा की धरती पर कदम रखा था। तीसरे अंतरिक्ष यात्री माइकल कॉलिंस ने ऑरबिट पायलट की जिम्मेदारी संभाली थी।
गौरतलब है कि 16 जुलाई को अमेरिका के फ्लोरिडा प्रांत में स्थित जॉन एफ कैनेडी अंतरिक्ष केन्द्र से उड़ा नासा का अंतरिक्ष यान अपोलो 11 चार दिन का सफर पूरा करके 20 जुलाई 1969 को इंसान को धरती के प्राकृतिक उपग्रह चांद पर लेकर पहुंचा था। यह यान 21 घंटे 31 मिनट तक चंद्रमा की सतह पर रहा।
इससे पहले शीतयुद्ध के दौरान नासा चंद्रमा के अध्ययन के लिए रेंजर अभियान शुरू कर चुका था। लेकिन इसके छह अभियान असफल होने और सोवियत संघ के अभियान लगातार सफल होने से अमेरिका में हताशा का माहौल बन गया था। ऐसे में अमेरिका के लिए पूरी अंतरिक्ष दौड़ का सबसे ऐतिहासिक दिन 20 जुलाई का रहा। जब नील आर्मस्ट्रॉन्ग और एडविन एल्ड्रिन चंद्रमा पर उतरे तो दोनों देशों के बीच यह प्रतियोगिता खत्म हो चुकी थी। चंद्रमा पर अपना झंडा फहराने के साथ ही अमेरिका विश्व का सिरमौर बन गया।
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