अमरीकी मीडिया की खबरों में बताया गया है कि अंतरिक्ष यात्री ऐन मैकलेन पर अलग रह रहे अपने पति के निजी वित्तीय खातों पर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में रहते हुए अनुचित तरीके से पहुंच बनाने का आरोप है।
]]>नासा ने आज से 50 साल पहले 20 जुलाई 1969 को अपोलो 11 मिशन को पूरा किया था। इस मिशन के तहत पहली बार अमेरिका ने किसी इंसान को चांद पर भेजने में सफलता पाई थी। वह क्षण मिशन में लगे लोगों के लिए गौरवान्वित करने वाला था। इतने सालों बाद भी इसकी स्मृतियां ताजा हैं। इस मौके पर गूगल ने डूडल बनाया है। इस डूडल में गूगल ने एक एस्ट्रोनॉट को चांद पर उतरता हुआ दिखाया है।
इस मिशन के साथ ही नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बने थे। आर्मस्ट्रांग के कुछ मिनट बाद एडविन ‘बज’ एल्ड्रिन ने चंद्रमा की धरती पर कदम रखा था। तीसरे अंतरिक्ष यात्री माइकल कॉलिंस ने ऑरबिट पायलट की जिम्मेदारी संभाली थी।
गौरतलब है कि 16 जुलाई को अमेरिका के फ्लोरिडा प्रांत में स्थित जॉन एफ कैनेडी अंतरिक्ष केन्द्र से उड़ा नासा का अंतरिक्ष यान अपोलो 11 चार दिन का सफर पूरा करके 20 जुलाई 1969 को इंसान को धरती के प्राकृतिक उपग्रह चांद पर लेकर पहुंचा था। यह यान 21 घंटे 31 मिनट तक चंद्रमा की सतह पर रहा।
इससे पहले शीतयुद्ध के दौरान नासा चंद्रमा के अध्ययन के लिए रेंजर अभियान शुरू कर चुका था। लेकिन इसके छह अभियान असफल होने और सोवियत संघ के अभियान लगातार सफल होने से अमेरिका में हताशा का माहौल बन गया था। ऐसे में अमेरिका के लिए पूरी अंतरिक्ष दौड़ का सबसे ऐतिहासिक दिन 20 जुलाई का रहा। जब नील आर्मस्ट्रॉन्ग और एडविन एल्ड्रिन चंद्रमा पर उतरे तो दोनों देशों के बीच यह प्रतियोगिता खत्म हो चुकी थी। चंद्रमा पर अपना झंडा फहराने के साथ ही अमेरिका विश्व का सिरमौर बन गया।
]]>इस रोवर पर ऐसी मशीन नहीं लगी है जो पक्के तौर पर यह बता सके कि मीथेन का स्रोत क्या है। यह रोवर अपने इस मिशन में पहले भी मीथेन गैस की मौजूदगी का पता लगा चुका है। गौरतलब है कि इससे पहले नासा की हबल अंतरिक्ष दूरबीन ने अब तक का सबसे सुदूरवर्ती तारा खोजा था। ब्रह्मांड के बीच में स्थित नीले रंग के इस विशाल तारे का नाम इकारस था। यह तारा इतना दूर है कि इसकी रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने में नौ अरब साल लग गए। दुनिया की सबसे बड़ी दूरबीन से भी यह तारा बहुत धुंधला दिखाई देगा। हालांकि ग्रेवीटेशनल लेन्सिंग नाम की प्रक्रिया होती है, जो तारों की धुंधली चमक को तेज कर देती है, जिससे खगोल विज्ञानी दूर के तारे को भी देख सकते हैं।
बर्केले में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया मेंइस शोध का नेतृत्व करने वाले पैट्रिक केली ने कहा यह पहली बार है जब हमने एक विशाल और अपनी तरह का अकेला तारा देखा है।
केली ने कहा था कि आप वहां पर कई आकाशगंगाओं को देख सकते हैं, लेकिन यह तारा उस तारे से कम से कम 100 गुना दूर स्थित है, जिसका हम अध्ययन कर सकते हैं।
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