अंतरिक्ष प्रोग्राम पर जागरूकता के लिए इस क्विज का आयोजन इसरो कर रहा है। इसलिए सबसे पहले mygov.in पर जाकर एक अकाउंट बनाना होगा। एक एकाउंट होल्डर को एक बार ही क्विज में भागीदारी का मौका मिलेगा।
गौरतलब है कि यह क्विज प्रतियोगिता में दस मिनट यानी 600 सेकेंड में 20 सवालों का जवाब देना होगा। जैसे ही स्टार्ट बटन दबाएंगे समय शुरू हो जाएगा। एक बार क्विज शुरू होने के बाद उसे पाज नहीं किया जा सकता है। अगर आपको किसी सवाल का जवाब नहीं आता तो उसे छोड़कर आगे बढ़ सकते हैं। बाद में छोड़े गए सवाल पर दोबारा भी लौटा जा सकता है। सबसे कम समय में सबसे ज्यादा सही जवाब देने वाले ही क्विज के विजेता होंगे।
यदि इस प्रतियोगिता में बराबर समय और अंक वाले छात्रों की संख्या ज्यादा हुई तो उनका चुनाव कंप्यूटर की मदद से लकी ड्रा की तरह किया जाएगा। सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाले हर प्रदेश के दो-दो छात्रों (कक्षा 8 से 10 तक) को इसरो के बंगलोर स्थित सेंटर पर बुलाया जाएगा। जहां वह पीएम मोदी के साथ बैठकर चंद्रयान-2 को चंद्रमा पर उतरते देख सकेंगे।
क्विज का समय खत्म होने पर रिजल्ट की घोषणा से पहले शार्ट लिस्ट किये गए छात्रों को अपने माता-पिता का नाम लिखा एड्रेस प्रूफ और हलफ नामा के साथ स्कूल से जारी प्रमाण पत्र जमा करना होगा। हलफ नामा का फार्मेट भी शार्ट लिस्ट किए गए छात्रों से शेयर किया जाएगा।
इसरो ने क्विज में भाग लेने वाले बच्चों के माता-पिता से उम्मीद की है कि वह सवालों का जवाब देने के लिए अपने बच्चों की मदद नहीं करेंगे। वह केवल सवाल नहीं समझ आने या उसके अनुवाद में मदद करें। क्विज में भाग लेने वाले सभी प्रतियोगियों को सर्टिफि केट भी दिया जाएगा। यह सर्टिफि केट वेबसाइट के डाउनलोड सेक्शन से डाउनलोड किया जा सकता है।
क्विज के बारे में अधिक जानकारी लेने और पार्टिसिपेट करने के लिए यहां क्लिक करें.
गुरूवार 8 अगस्त को रात आठ बजे राष्ट्र के नाम दिए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को हटाने की वजह बताते हुए कहा, ‘अनुच्छेद 370 से जो नुकसान हो रहा था। उसकी कोई चर्चा नहीं हो रही थी। कोई यह भी नहीं बता पाता था कि इससे जम्मू कश्मीर के लोगों को क्या लाभ हुआ। अनुच्छेद-370 और 35ए ने जम्मू-कश्मीर को परिवारवाद, अलगाववाद और भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं दिया।’
पीएम ने कहा कि अब देश का एक नया युग शुरू होगा। अनुच्छेद 370 के चलते कश्मीर और लद्दाख के लोगों को काफी नुकसान हो रहा था। इसके फायदों के बारे में कोई भी नहीं बता पाता था। 370 और 35 ए ने कश्मीर को अलगाववाद, आतंकवाद, परिवारवाद और व्यवस्थाओं में बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं दिया। इन दोनों अनुच्छेदों का कुछ लोगों की भावनाएं भड़काने के लिए पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल हो रहा था। इसके चलते पिछले 30 सालों में लगभग 42000 निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
पीएम ने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का विकास अभी तक उस गति से नहीं हो पाया, जिसके वहां के लोग हकदार थे। लेकिन अब अनुच्छेद 370 हटने से दोनों राज्यों के लोगों का वर्तमान सुधरेगा और भविष्य सुरक्षित रहेगा।
पीएम मोदी ने कहा कि अभी तक संसद में कानून बनते थे लेकिन अनुच्छेद 370 के चलते जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं हो पाते थे। देश की पूरी आबादी के फायदे के लिए बनने वाले कानूनों के लाभ से कश्मीर के 1।5 करोड़ से ज्यादा लोग वंचित रह जाते थे। जैसे देश के अन्य राज्यों में बेटियों को जो हक मिलते हैं, वे सारे हक जम्मू-कश्मीर की बेटियों को नहीं मिलते। अन्य राज्यों में सफाई कर्मचारियों के लिए सफाई कर्मचारी एक्ट लागू है लेकिन जम्मू-कश्मीर नहीं है। अन्य राज्यों में दलितों पर अत्याचार रोकने लिए सख्त कानून हैं लेकिन जम्मू-कश्मीर में नहीं हैं। अन्य राज्यों में मजदूरों के हितों के रक्षा के लिए मिनिमम वेजेस एक्ट है लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोगों को यह सिर्फ कागज पर ही मिलता है। अन्य राज्यों में चुनावों लड़ते समय एससी, एसटी के लोगों को आरक्षण मिलता है लेकिन जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं है।
पीएम ने कहा कि अब अनुच्छेद 370 और 35ए बीते इतिहास की बात हो जाने के बाद उनके नकारात्मक प्रभावों से भी जम्मू-कश्मीर जल्द बाहर निकलेगा। नई व्यवस्था में प्राथमिकता रहेगी कि पुलिस सहित राज्य के कर्मचारियों को दूसरे केन्द्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों के समान सुविधाएं मिलें। अभी अनके ऐस वित्तीय सुविधाएं जैसे एलपीसी, हाउस रेंट अलाउंस, बच्चों की शिक्षा के लिए अलाउंस जम्मू-कश्मीर के पुलिसकर्मियों के बच्चों को नहीं मिलतीं। लेकिन अब वहां के कर्मचारियों, पुलिस उनके परिवार वालों को ये सभी सुविधाएं मिलेंगी।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि जल्द ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में केन्द्रीय और राज्य स्तर पर रिक्त पदों को भरा जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा सेना व अर्धसैनिक बलों में में भी स्थानीय युवाओं के लिए भर्तियों के मौके बनेंगे।
पीएम ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर को सीधे केन्द्र सरकार के तहत लाने का फैसला सोच-समझकर किया गया है। इसकी वजह है कि वहां गवर्नर रूल में प्रशासन सीधे केन्द्र के संपर्क में है। इससे बीते महीनों में वहां गुड गवर्नेंस और डेवलपमेंट देखने को मिला है। केवल कागजों पर रह जाने वाली योजनाएं हकीकत में अमल में आने लगी हैं। प्रशासन में पारदर्शिता लाने का भरसक प्रयास किया गया है। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर व अन्य विकास के कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया गया है।
पीएम ने कश्मीर को लोगों को भरोसा दिलाया कि नई व्यवस्था के बाद आपका जनप्रतिनिधि आपके द्वारा ही चुना जाएगा और आपके बीच से ही आएगा। जैसे पहले एमएलए, सीएम होते थे, कैबिनेट होती थी, वैसे ही आगे भी होंगे। पूरी ईमानदारी के साथ पूरे पारदर्शी वातावरण में वहां के लोगों को अपना प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा।
वहां की पंचायतें अब अनुच्छेद 370 हटने के बाद और भी अच्छे से काम कर पाएंगी। मुझे पूरा विश्वास है कि इस नई व्यवस्था से हम सब आतंकवाद, अगलाववाद से कश्मीर को मुक्त करांएगे। हम चाहते हैं नए युवा सरकार में शामिल हों, एमएलए व मुख्यमंत्री बनें। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के युवा वहां के विकास का नेतृत्व करेंगे और नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।
पीएम ने हालात सुधरने पर जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर भी आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि जब कश्मीर नई ऊंचाइयों को छूने की ओर बढ़ेगा, ईज ऑफ लिविंग बढ़ेगी, लोगों को उनका हक बेरोकटोक मिलेगा और शासन-प्रशासन जनहित के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे, तो राज्य को केन्द्र शासित प्रदेश के तौर पर चलाने की जरूरत नहीं रह जाएगी। हालांकि लद्दाख केन्द्र शासित प्रदेश ही रहेगा। जम्मू-कश्मीर के नागरिक, बाकी भारत के नागरिकों से अलग नहीं हैं।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में दुनिया का सबसे बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनने की क्षमता है। एक जमाना था जब बॉलीवुड की फिल्मों की शूटिंग के लिए कश्मीर जाया जाता था। अब जब स्थितियां सामान्य होंगी तो देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर के लोग वहां शूटिंग करने आएंगे और रोजगार के अनेक अवसर निकलेंगे।
पीएम ने आगे कहा कि लद्दाख के लोगों का विकास भारत सरकार की जिम्मेदारी है। वहां अब और तेजी से विकास होगा। लददाख में स्प्रिचुअल टूरिज्म, एडवेंजचर टूरिज्म और इको टूरिज्म में अग्रणी बनने की क्षमता है। वहां अच्छे शिक्षण संस्थान, अच्छे हॉस्पिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर आदि उपलब्ध कराया जाएगा।
पीएम मोदी ने कहा कि अभी एहतियात के तौर पर कुछ कदम उठाने की जरूरत है। इनसे परेशानी हो रही है और जम्मू-कश्मीर के लोग इन परेशानियों का अच्छे से मुकाबला कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि धीरे-धीरे हालात सामान्य हो जाएंगे और घाटी के लोगों की परेशानी भी कम हो जाएगी। पीएम ने ईद के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में ईद मनाने में कोई परेशानी न हो, इसका ध्यान भी सरकार रख रही है।
गौरतलब है कि अपने दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया है। जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने और इस राज्य को दो हिस्सों में बांटकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने के फैसले पर संसद में सोमवार और मंगलवार को बहस हुई थी।
]]>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक बार फिर से अतंरिक्ष में इतिहास रचकर चंद्रयान-2 की सफलतापूर्व लॉचिंग कर दी है। चंद्रयान- 2 को देश के सबसे शक्तिशाली रॉकेट जीएसएलवी-मार्क 3 -एम1 जिसे ‘बाहुबली नाम दिया गया है, से छोड़ा गया है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग पर इसरो के सभी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी। कोविंद के बाद चंद्रयान-2 की सफल लांच पर वैज्ञानिकों और इसरो की टीम को बधाई देते हुए पीएम मोदी ने कहा इससे देश के युवाओं की रूचि विज्ञान की तरफ बढ़ेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग पर पल-पल नजर बनाए हुए थे। पीएम ने कहा कि सोमवार का दिन 130 करोड़ देशवासियों के लिए गर्व का दिन है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को भी इसके लिए सराहा। चंद्रयान-2 की सफलतापूर्वक लांचिंग के लिए राज्यसभा में भी इसरो की टीम को बधाई दी गई। चंद्रयान-2 की सफल लांच के लिए पूर्व विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने इसरो की पूरी टीम को बधाई दी।
इससे पहले 22 जुलाई सोमवार को चंद्रयान का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से दोपहर 2:43 पर लांच किया गया। चंद्रयान-2 को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने के लिए 48 दिन की यात्रा करनी पड़ेगी। करीब 16.23 मिनट में चंद्रयान-2 पृथ्वी से 182 किमी की ऊंचाई पर जीएसएलवी-एमके3 रॉकेट से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाना शुरू करेगा। चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान 22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा, इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा करेगा। 19 अगस्त को ही यह चांद की कक्षा में पहुंचेगा।
13 दिन यानी 31 अगस्त तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा और फिर 1 सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा। 5 दिन की यात्रा के बाद 6 सितंबर को विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। लैंडिंग के करीब 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान लैंडर से निकलकर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा। यह मिशन इस मायने में खास है कि चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा और सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अब तक दुनिया का कोई मिशन नहीं उतरा है।
इसरो के अनुसार ‘चंद्रयान-2′ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा, जहां वह इसके अनछुए पहलुओं को जानने का प्रयास करेगा। इससे 11 साल पहले इसरो ने पहले सफल चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-1′ का प्रक्षेपण किया था जिसने चंद्रमा के 3,400 से अधिक चक्कर लगाए और 29 अगस्त, 2009 तक 312 दिनों तक काम करता रहा।

इससे पहले चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण 15 जुलाई को किया जाना था लेकिन तकनीकी खराबी आने के कारण टाल दिया गया था। इसरो ने 18 जुलाई को घोषणा की थी कि विशेषज्ञ समिति ने तकनीकी खराबी के कारण का पता लगा लिया है और उसे ठीक भी कर लिया गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का एक पैसिव पेलोड भी इस मिशन का हिस्सा है जिसका उद्देश्य पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी सटीक दूरी पता लगाना है।
इस मिशन के मुख्य उद्देश्यों में चंद्रमा पर पानी की मात्रा का अनुमान लगाना, उसके जमीन, उसमें मौजूद खनिजों एवं रसायनों तथा उनके वितरण का अध्ययन करना और चंद्रमा के बाहरी वातावरण की ताप-भौतिकी गुणों का विश्लेषण है। चंद्रयान के तीन हिस्से हैं। ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में चक्कर लगाएगा। लैंडर विक्रम ऑर्बिटर से अलग हो चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। यह दो मिनट प्रति सेकेंड की गति से चंद्रमा की जमीन पर उतरेगा। प्रज्ञान नाम का रोवर लैंडर से अलग होकर 50 मीटर की दूरी तक चंद्रमा की सतह पर घूमकर तस्वीरें लेगा। इस मिशन में चंद्रयान के साथ कुल 13 स्वदेशी पे-लोड यान वैज्ञानिक उपकरण भेजे जा रहे हैं। इनमें तरह-तरह के कैमरा, स्पेक्ट्रोमीटर, रडार, प्रोब और सिस्मोमीटर शामिल हैं।
चंद्रयान-2 का सफलतापूर्वक लांच कर हमने अपने तिरंगे को सम्मान दिया है। अभी टास्क खत्म नहीं हुआ है। हमें अपने अगले मिशन पर लगना है। हम हर बार की तरह अपने मैनेजमेंट की तरफ से दिए गए काम को पूरा कर रहे है। यह तीन सैटलाइट मिशन है। लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान चांद की सतह पर उतरेगा।
गौरतलब है कि चांद की तरफ भारत की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत हुई। चंद्रयान-2 चांद के साउथ पोल पर 7 सिंतबर को विक्रम लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा। इसके बाद रोवर प्रज्ञान चांद की सतह की जानकारी देगा।
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ब्रिक्स नेताओं के साथ अनौपचारिक बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि आज हमारे सामने तीन प्रमुख चुनौतियां हैं –
इससे पहले जी-20 शिखर सम्मेलन के मार्जिन पर ब्रिक्स नेताओं की बैठक के दौरान अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर एकतरफा फैसले और प्रतिद्वंद्विता को प्रमुख चुनौती करार दिया।
इसके साथ ही उन्होंने विश्व जगत को आगाह करते हुए कहा कि आतंकवाद मानवता के लिये सबसे बड़ा खतरा है जो न सिर्फ बेगुनाहों की हत्या करता है बल्कि आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। हमें आतंकवाद और नस्लवाद के समर्थन के सभी माध्यमों को रोकना होगा।
बैठक में मोदी ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को मजबूत करने, संरक्षणवाद से लड़ने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आतंकवाद से लड़ने के लिए हमें एक साथ काम करने की जरूरत है। उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता, गिरावट और संसाधनों की कमी को लेकर चर्चा की। साथ ही मोदी ने विकसित देशों को ध्यान दिलाते हुए यह भी कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में संसाधनों की घोर कमी है। ढ़ांचागत निवेश में ही करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर (करीब 90 लाख करोड़ रुपए) की कमी आई है।

इसके साथ ही उन्होंने विकास को स्थाई और सर्वसमावेशी बनाने पर जोर दिया। मोदी ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक जैसे डिजिटलाइजेशन और जलवायु परिवर्तन मौजूदा और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक चुनौती है। विकास तभी सार्थक है जब यह असमानता को कम करे और सशक्तिकरण में योगदान करे।
गौरतलब है कि डॉनाल्ड ट्रंप की ओर से अमेरिकी उत्पादों पर उत्पाद शुल्क घटाने की चेतावनी के बीच यह बैठक बेहद अहम थी। डॉनाल्ड ट्रंप ने जापान पहुंचने से पहले ही भारत को लेकर कड़ा ट्वीट कर अपना अजेंडा स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा था, ‘मैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत की ओर से बीते कई सालों से काफी अधिक टैरिफ लगाए जाने और हाल ही में इसे और बढ़ाने को लेकर बात करूंगा। यह अस्वीकार्य है और बढ़ा टैरिफ वापस लिया जाना चाहिए।’
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