
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल सरकारी अभियान ही नहीं बल्कि हर भारतीय का अभियान बन गया है। सभी ने स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी के रूप में लिया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्य 2030 तक अर्जित करने हैं लेकिन भारत 11 साल पहले ही इन स्वच्छता लक्ष्यों को अर्जित करने के लिए तैयार है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि देश का हर नागरिक इस उपलब्धि के लिए प्रशंसा का पात्र है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता का दायरा बढ़ाने का प्रयास तेज़ करने के लिये दो अक्तूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन का शुभारंभ किया था। इस वर्ष महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि के लिये स्वच्छ और खुले में शौच से मुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त किया जाना है।

उन्होंने ये भी कहा कि हमें स्वच्छता के व्यापक अर्थ को अपनाते हुए आगे बढ़ना है। उदाहरण के लिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना भी स्वच्छता के दायरे में आता है। स्वच्छता भारत सरकार द्वारा इस साल शुरू किए गए जन जीवन मिशन की सफलता की आवयश्यक शर्त है।
]]>इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि स्कूलों में ही चरित्र निर्माण का आधार बनता है। उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए शिक्षक अभिभावक के समान होते हैं। राष्ट्रपति ने शिक्षकों से उनकी बुनियादी जिम्मेदारियां समझने को भी कहा।
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि राधाकृष्णन न केवल एक महान दार्शनिक, राजनीतिज्ञ और लेखक थे, बल्कि एक विलक्षण शिक्षक भी थे
]]>पवन ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश बढ़ाना और सस्ती दरों पर पवन ऊर्जा प्रदान करने में मदद मिलने की उम्मीद के साथ जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने लिया एक नए फैसला। एक समीक्षा बैठक में मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए प्रति मेगावाट ३०,००० रुपये की दर से पट्टा किराया लेने की स्थिति में छूट देने का फैसला किया। पर्यावरण मंत्री ने ये भी कहा, ‘सरकार नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों का दोहन करके ऊर्जा की अधिकतम जरूरत को पूरा करना चाहती है ताकि एक निश्चित समय पर स्व्च्छ ऊर्जा के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि विभिन्न नीतियों और नियमों में लगातार सुधार किया जा रहा है।’
इस समय वन भूमि पर पवन ऊर्जा परियोजना स्थापित करने के लिए, वर्तमान प्रक्रिया के अनुसार प्रतिपूरक वनीकरण और निर्धारित वर्तमान मूल्य (एनपीवी) के लिए अनिवार्य शुल्क अदा करना आवश्यक है। अनिवार्य शुल्क के अलावा, पवन ऊर्जा कंपंनियों को ३०,००० रुपये प्रति मेगावाट की दर से पट्टाकिराया की अतिरिक्त कीमत अदा करनी पड़ती थी। यह अतिरिक्त कीमत अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं जैसे सौर ऊर्जा और पनबिजली परियोजना के लिए अनिवार्य नहीं है। पवन ऊर्जा के जरिये स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए अतिरिक्त कीमत से उपभोक्ता के स्तर पर बिजली की प्रति इकाई कीमत बढ़ जाती है।
इस तरह की परियोजनाओं को बढ़ावा देने से अंतराष्ट्रीय समझौतों की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता मजबूत होती है। वर्ष २०१५ में पेरिस में की गई राष्ट्रीय प्रतिबद्धता में २०३० तक नवीकरणीय संसाधनों से ४० प्रतिशत बिजली बनाने की बात कही गई थी। इस समय भारत लक्ष्य से आगे निकल चुका है और यह सुनिश्चित करने के लिए सही रास्ते पर चल रहा है कि २०३० तक हमारी स्थापित क्षमता का ५० प्रतिशत से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त हो।
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