राज्य में लगभग सभी प्रमुख नदियों में बाढ़ आई हुई है और वे खतरे के निशान से ऊपर या उसके निकट बह रही हैं। गंगा, यमुना, बेतवा, चंबल, घाघरा और शारदा जैसी नदियों में बाढ़ के कारण हमीरपुर, बांदा, बलिया, औरेया, प्रयागराज, फैजाबाद, बाराबंकी, गोंडा, वाराणसी और आगरा सहित विभिन्न जिलों के निचले क्षेत्रों में नुकसान भी होने कीआशंका है । वाराणसी में सभी प्रमुख घाट बाढ़ की चपेट में हैं और प्रसिद्ध गंगा आरती का स्थान बदला गया है।
कोटा बैराज से चंबल में छह लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद आगरा में नदी के निकटवर्ती क्षेत्रों में प्रशासन ने स्टीमर सेवाएं शुरू की हैं, जहां अनेक गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। राज्य में पिछले चौबीस घंटे के दौरान बिजली गिरने और वर्षा संबंधी अन्य घटनाओं में 17 लोगों की जानें गई हैं। मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटों में राज्य के मध्यवर्ती और पूर्वी हिस्सों में तेज वर्षा का अनुमान व्यक्त किया है।
]]>माना कि प्राकृतिक आपदाओं को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता, किंतु उच्च स्तर की तकनीक और बेहतर प्रयासों से उसके प्रभावों को न्यूनतम अवश्य किया जा सकता है। इस साल कई महीने पहले ही सामान्य मानसून के साथ ही बाढ़ की आशंका भी व्यक्त की गई थी, लेकिन बाढ़ की आशंका वाले राज्यों में वहां की सरकारों ने इस आपदा से निपटने के लिए ऐसी तैयारियां नहीं की, जिनसे लोगों को उफनती नदियों के प्रकोप से काफी हद तक बचाया जा सकता था।अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग बेघर हैं।
चिंता की बात है कि विश्वभर में बाढ़ के कारण होने वाली मौतों का पांचवां हिस्सा भारत में ही होता है और बाढ़ की वजह से हर साल देश को हजारों करोड़ का नुकसान होता है। बाढ़ जैसी आपदाओं के चलते जान-माल के नुकसान के साथ-साथ लाखों हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों के बर्बाद होने से देश की अर्थव्यवस्था पर इतना बुरा प्रभाव पड़ता है कि उस राज्य का विकास सालों पीछे चला जाता है।
पंजाब में पिछले दिनों घग्गर नदी पर बना बांध टूट जाने से करीब दो हजार एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई। बिहार के दरभंगा और मधुबनी में भी कमला बलान बांध कई जगहों से टूट गया व बड़े हिस्से को अपनी जद में ले लिया।
सरकारी तंत्र द्वारा हर साल बाढ़ जैसे हालात पैदा होने के बाद बांधों या तटबंधों की काम चलाऊ मरम्मत कर उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है और अगले साल फिर बाढ़ का तांडव सामने आने पर प्राकृतिक आपदा की संज्ञा देने की कोशिशें हो जाती हैं। दरअसल हम अभी तक वर्षा जल संचयन के लिए कोई कारगर योजना नहीं बना सके हैं।
हम समझना ही नहीं चाहते कि सूखा और बाढ़ जैसी आपदाएं पूरी तरह एक-दूसरे से ही जुड़ी हैं और इनका स्थायी समाधान जल प्रबंधन की कारगर योजनाएं बना कर और उन पर ईमानदारीपूर्वक काम करके ही संभव है।
महाराष्ट्र हो या असम अथवा देश के अन्य राज्य, हर साल जब भी किसी राज्य में बाढ़ जैसी कोई आपदा एक साथ करोड़ों लोगों के जनजीवन को प्रभावित करती है तो केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्री, मुख्यमंत्री बाढग़्रस्त क्षेत्रों के हवाई दौरे करते हैं और सरकारों द्वरा बाढ़ पीडि़तों के लिए राहत राशि देने की घोषणाएं की जाती हैं।
लेकिन जैसे ही बाढ़ का पानी उतरता है, सरकारी तंत्र बाढ़ के कहर को बड़ी आसानी से भुला देता है। पिछले 50 सालों में बाढ़ पर ही सरकारों ने 170 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा धनराशि खर्च कर डाली।
लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी अगर हालात सुधरने के बजाय साल दर साल बदतर होते जा रहे हैं तो समझा जा सकता है कि कमी आखिर कहां है! सीधा-सा अर्थ है कि बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रम को संचालित करने वाले लोग अपना काम जिम्मेदारी, ईमानदारी और मुस्तैदी के साथ नहीं कर रहे थे।
बहरहाल, यदि हम चाहते हैं कि देश में हर साल ऐसी आपदाएं भारी तबाही न मचाएं तो हमें कुपित प्रकृति को शांत करने के सकारात्मक उपाय करने होंगे और इसके लिए प्रकृति के विभिन्न रूपों जंगल, पहाड़, वृक्ष, नदी और झीलों इत्यादि की महत्ता समझनी होगी।
वरना हमारी लापरवाही की भेंट चढ़कर प्रकृति नष्ट हो जाएगी। बाढ़ की विभीषिका हमारी लापरवाही की देन है। अंधाधुंध विकास के नाम पर हम प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ कर रहे हैं, वही बदले में पा भी रहे हैं, मगर चेत एक बार भी नहीं रहे।
खराब मौसम और भारी बारिश की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य केरल है जहां बाढ़ के साथ ही भूस्खलन भी हो रहे हैं। राज्य के पुथुमाला और वायनाड में गुरुवार को हुए भूस्खलन की वजह से हालात बिगड़ गए। हालांकि, इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और भूस्खलन के बाद रेस्कूय ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। वहीं कोचीन एयरपोर्ट पर 11 अगस्त तक सारे ऑपरेशन रद्द कर दिए गए हैं। राज्य डिजास्टर मैनेजमेंट की टीम ने कुल 22,165 लोगों को सुरक्षित निकाल कर 315 राहत कैंपों में पहुंचाया है।
मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक विकट स्थिति बने रहने का अनुमान जताया है। एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन लगातार बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने में जुटे हुए हैं। 1 लाख 40 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया।

भारी बारिश के चलते महाराष्ट्र के अनेक क्षेत्रों में बाढ़ के चलते त्राहि-त्राहि मची है। राज्य में बाढ़ के कारण अब तक 16 लोगों के मारे जाने की सूचना है, जबकि इस प्राकृतिक प्रकोप के चलते कई लोग घायल है। राज्य के कई जिले भीषण बाढ़ की चपेट में है। अकेले पुणे संभाग में ही अभी तक 1 लाख 40 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं बाढ़ के चलते पुणे में 4, सतारा 7, सांगली और कोल्हापुर में दो-दो और सोलापुर एक मौत की खबर है।
वहीं महाराष्ट्र के पुणे और बंगलोर हाइवे पर तकरीबन 5 हजार ट्रकों की कतार है, हाइवे पर तकरीबन 4 से 5 फुट तक पानी होने की वजह से यातायात अवरूद्ध है। राधानगरी बांध के 5 दरवाजे खोले गए। बांध में तकरीबन 10 से 12 फीट अधिक पानी होने की वजह से इन दरवाजों को खोला गया है। पानी बढ़ने और लगातार बरसात होने से कोयना और कृष्णा नदी में बाढ की स्थिती गंभीर होती जा रही है। उधर सांगली के कई गांव मुख्य संपर्क मार्ग से कट गए हैं। कई इलाकों में पानी प्रवेश करने की वजह से लोग घर के सामान और जानवरों को लेकर मुख्य सडक पर ही अपना बसेरा बना रखा है।
पिछले चार दिनों से बरसात और इलाके में बाढ की स्थिति से अपने जान माल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इलाके में एनडीआरएफ सेना, नौसेना और अन्य सुरक्षा दल की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की की कोशिश लगातार जारी है।

पुणे के डिविजनल कमिश्नर दीपक महेस्कर के मुताबिक, ‘डिविजन के पांच जिलों (सोलापुर, सांगली, सतारा, कोल्हापुर और पुणे) से अभी तक 1 लाख 40 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।’ राहत और बचाव कार्य में 16 बटालियन और 12 इंजीनियर टास्क फोर्स के 1 हजार जवान समेत टेरिटोरियल आर्मी की 4 टीमें, एनडीआरफ की 10 टीमें सतारा, कोल्हापुर और सांगली में लगी हैं। टेरिटोरियल आर्मी की 4 टीमों के अलावा 89 नाव, नौसेना और भारतीय तटरक्षक की टीम भी बचाव कार्य में जुटी हैं।
कोल्हापुर जिले के सभी स्कूल कॉलेजों को बंद रखा गया है। मौसम विभाग द्वारा पुणे जिले की तीन तहसीलों और सांगली की पांच तहसीलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के सांगली जिले में कुल 213 प्रतिशत बारिश हुई है जबकि सतारा में 173 और पुणे में 166 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। कोल्हापुर में यह स्तर 116 प्रतिशत और सोलापुर में 78 प्रतिशत रहा है।

पुणे, सतारा, सांगली और कोल्हापुर के सभी बांध पूरी तरह से भर चुके हैं। पुणे जिले में नदी के किनारे के सभी गांवों को अलर्ट कर दिया गया है। बाढ की स्थिति के चलते महाराष्ट्र के दूध भंडार माने जाने वाले ये तीन जिले खासकर कोल्हापुर से मुंबई, पुणे आने वाले दूध की आपूर्ती पर भी बडा असर पड़ा है। गोकुल दूध संघ ने दूध लेना बंद रखा है और वारणा और अन्य स्थानीय दूध संघ भी दूध की आपूर्ति मुंबई तक नहीं कर पा रहे हैं।
पुणे-बैंगलौर हाईवे पर लगभग छह फीट पानी जमा है। उधर कोल्हापुर जिले के राधानगरी डैम के 6 दरवाजे भी बुधवार को खोल दिए गए। इसके कारण जिले के अंदरूनी इलाके में भी बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। भारी बारिश और पानी भरने और भूस्खलन के चलते सेंट्रल रेलवे के मुंबई पुणे डिविजन और साउथ वेस्टर्न रेलवे के मिराज और लोंडा सेक्शन पर कई ट्रेनों को रोका गया है, डाईवर्ट किया गया है। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एमएआरडी) ने बाढ़ के चलते अपने आंदोलन को अस्थाई रूप से रोक दिया है।
मुंबई के छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (एमआईएएल) के जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार भारी बारिश के कारण विमान औसतन 30 मिनट देरी से उड़ान भर रहे हैं। बारिश के कारण सात उड़ानें रद्द की गई हैं और 17 विमानों को डायवर्ट किया जा चुका है।
पानी में फंसी महालक्ष्मी एक्सप्रेस
भारी बारिश के कारण बदलापुर के पास महालक्ष्मी एक्सप्रेस फंस गई है। इस ट्रेन में लगभग 2000 लोग सवार हैं जिन्हें निकालने का काम जारी है। राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम को मौके पर भेजा गया है। रेलवे की तरफ से यात्रियों को बिस्किट और पीने का पानी बांटा जा रहा है
असम-बिहार में बाढ़ का कहर जारी
बिहार और असम में बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। दोनों ही राज्यों में मरने वालों की संख्या अबतक 198 हो गई है। वहीं 1.17 करोड़ लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बता दें कि भूटान की कुरीचू नदी में कुरीचू हाइड्रोपावर जलाशयों से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के कारण, पश्चिमी असम के बारपेटा, नलबाड़ी, बक्सा, चिरांग, कोकराझार, धुबरी और दक्षिण सालारा में बाढ़ के जल स्तर में वृद्धि हो रही है।

असम राज्य आपदा प्रबंधन के अनुसार, 18 जिलों के 2,753 गांवों में 34,92,734 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं अधिकारियों के मुताबिक पश्चिम चंपारण में बाढ़ का पानी गुरुवार 13 तारीख को ही पहुंच गया था। हालांकि वहां मौत का ताजा कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में पश्चिमी चंपारण में मूसलाधार बारिश हुई है। बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक 13 जिलों के 106 ब्लॉकों की 1,241 पंचायतों में 82.12 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
राहत और पुनर्वास का काम जोरों पर चल रहा है। सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की गई है, जबकि आपदा से बचने वाले प्रत्येक परिवार को 6,000 रुपये दिए गए हैं।
]]>असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के बाढ़ संबंधी बुलेटिन के अनुसार मोरीगांव जिले में तीन लोगों, बारपेटा में तीन, दक्षिण सलमारा में दो और नलबाड़ी एवं धुबरी जिलों में एक-एक व्यक्ति की मौत होने से राज्य में अब तक हुई मौतों का आंकड़ा बढ़कर 62 हो गया है।
राज्य के प्रभावित जिलों के 3,024 गांवों में 44,08,142 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाढ़ की वजह से 13 जुलाई से अब तक 129 पशु मारे गए हैं, इनमें 10 गैंडे, आठ सांभर, आठ जंगली सुअर, पांच बारहसिंगा, एक हाथी और एक जंगली भैंस शामिल हैं। बाढ़ प्रभावितों ने राज्य के वित्त मंत्री हिमंत बिस्व शर्मा से शिकायत की है कि उन्हें राहत केंद्रों में न तो पर्याप्त राहत सामग्री दी जा रही है और न ही रहने की सुविधा है।
असम की तरह ही बिहार में भी बाढ़ की बुरी स्थिति है। अब तक बाढ़ की वजह से पांच और लोगों की मौत हो चुकी है। अब यह आंकड़ा बढ़कर 97 हो गया है। राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग ने यह जानकारी दी है।
मधुबनी जिले से चार लोगों और दरभंगा से एक व्यक्ति के मरने की सूचना है, जिससे मधुबनी में हताहतों की संख्या अब 18 और दरभंगा में 10 हो गई है। आपदा प्रबंधन विभाग ने एक रिपोर्ट में कहा कि सीतामढ़ी में 27 लोगों के मरने की सूचना है और यह बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिला बना हुआ है।
उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राहत एवं पुनर्वास का जायजा लेने के लिए शनिवार को सीतामढ़ी जिले का दौरा किया। बिहार में कुल 12 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं, बारिश की वजह से दक्षिण के राज्य भी खासे प्रभावित हुए हैं। बारिश जनित घटनाओं में तमिलनाडु में भी दो लोगों की मौत हुई है और तीन मछुआरों समेत चार लोग लापता हैं। केरल में भी लगातार भारी बारिश जारी है। राज्य के कासरगोड जिले में कुडुले में शनिवार तक 30 सेंटीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। पर्वतीय इडुक्की जिले के कोन्नाथाडी गांव में शनिवारद की सुबह भूस्खलन हुआ, जिससे फसलें बर्बाद हो गईं।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी में भी भारी बारिश होने से लोगों को उमस भरे मौसम से राहत मिली। न्यूनतम तापमान 28.8 डिग्री सेल्सियस और सुबह साढ़े आठ बजे तक हवा में नमी का स्तर 74 प्रतिशत दर्ज किया गया।
]]>