दिव्यांगजन प्राकृतिक रूप से शारीरिक क्षमता में कमी के कारण आम आम नागरिकों की तरह जीवन यापन करने में कठिनाई महसूस करते हैं। दिव्यांग जनों को कई श्रेणी में माना गया है जिनमें दृष्टि हीनता ,बधिरता,मुकता, चलने में असमर्थ, मानसिक कमजोरी , मानसिक रुग्णता, बहु दिव्यांगता आदि होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है की सभी देशों में विकलांगों की समस्याएं अलग-अलग होने के बावजूद उनकी मूल समस्या एक जैसी है, जिसमें आमूलचूल बदलाव लाकर ऐसे व्यक्तियों को सशक्त किया जा सकता है।

शरीर के किसी अंग अथवा मस्तिष्क के बाधित अथवा अपूर्ण विकास को दिव्यांगता के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो मानव समाज की एक संवेदनशील समस्या है। जिसका सामना विश्व के सभी देशों के दिव्यांग जनों को करना पड़ता है। दिव्यांग जनों को मूलतः शिक्षा,रोजगार, स्वास्थ्य, यातायात आदि तक पहुंच बनाने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जिससे वे सामाजिक आर्थिक व शैक्षिक क्षेत्र में पिछड़ जाते हैं।
इस संदर्भ में दृष्टि हिनता तथा बधिरता से ग्रस्त हेलेन केलर ने कहा कि “दृष्टि हिनों की प्रगति मुख्य बाधा दृष्टि हीनता नहीं, बल्कि दृष्टिहीन लोगों के प्रति समाज की नकारात्मक सोच भी है” भारत सरकार ने इस संदर्भ में काफी विचार-विमर्श कर 1995 में विकलांगों के प्रति समाज के दायित्वों के निर्वहन हेतु विकलांग व्यक्ति अधिनियम पारित किया था, जिसे 1996 में लागू किया गया।
अधिनियम के अंतर्गत दिव्यांगों के लिए शिक्षा रोजगार सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही शासकीय नौकरी में विकलांगों का पद आरक्षित भी किया गया। इतना ही नहीं 1999 में एक अलग विकलांग राष्ट्रीय कल्याण तथा राष्ट्रीय न्यास का गठन किया गया, जिससे इनकी समस्याओं को समाधान हेतु सुना जा सके। इसके अतिरिक्त दिव्यांग जनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग बनाया, जिससे इनके लिए अलग से कुछ पैमाने को निर्धारित कर विकास में सहभागी बनाया जा सके ऐसे प्रावधान रखे गए है।

इसके अतिरिक्त 2015 में दिव्यांगों की शिक्षा नीति बनाई गई जिसमें दिव्यांग व्यक्तियों के लिए शिक्षा के सुरक्षित तथा सम्मानजनक समान अवसर उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा गया। इनको शिक्षा से जोड़ने हेतु सुगम में पुस्तकालय नामक ऑनलाइन कोर्स प्रारंभ किया गया ताकि वह बटन क्लिक करने के माध्यम से पुस्तकों को पढ़ सकें, जिसके बाद इनकी नौकरियां व स्वरोजगार क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने हेतु 2016 में विकलांग अधिकारिता विभाग के परामर्श से एक जॉब पोर्टल की भी शुरुआत की गई। जॉब पोर्टल एकल मंच पर निशुल्क नौकरी के अवसर स्वरोजगार ऋण, शिक्षा ऋण व कौशल प्रशिक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
2017 में दिव्यांग जनों की मदद के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने दिव्यांग साथी मोबाइल ऐप की शुरुआत की जिसका मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग से संबंधित विभिन्न उपयोगी जानकारी जैसे विभिन्न नियमों दिशानिर्देशों योजनाओं छात्र वित्तीय एवं रोजगार संबंधी अवसरों के बारे में दिव्यांग जनों को सरल प्रारूप में जानकारियां उपलब्ध कराना इसका उद्देश्य है। इससे दिव्यांगजन सशक्तिकरण के प्रयासों को वास्तविक रूप से अमलीजामा पहनाया जा सके। केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारें लगातार प्रयास कर रही है कि दिव्यांग जनों को समाज की मुख्यधारा में जोड़कर उन्हें खेलकूद, विज्ञान टेक्नोलॉजी, मेडिकल साइंस,इंजीनियरिंग और प्रशासनिक सेवाओं में पूरा पूरा स्थान प्राप्त हो सके, ऐसे प्रयास निरंतर जारी हो रहे हैं।
और इन्हीं सब का परिणाम है कि आज दिव्यांगों को पहचान कर समाज में उनकी नई पहचान दिलाई जा रही है स्वरोजगार में इनकी संख्या बढ़ रही है शिक्षा के स्तर में वृद्धि हुई है यहां तक कि नौकरियों मेल की भागीदारी काफी बढ़ी है। दिव्यांग व्यक्तियों ने खेल में अपना नाम बहुत ऊंचा किया है 20 18 में भारतीय दिव्यांग क्रिकेटरों ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान की टीम को हराकर ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप अपने नाम किया था और इस तरह देश का नाम ऊंचा किया। माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय विकलांग महिला अरुणिमा सिन्हा का नाम प्रमुख है।
2016 2020-21 पैरा ओलंपिक खेलों में दीपा मलिक ने अनेक पदक जीते उन्हें अर्जुन पुरस्कार भी दिया गया है। इसी प्रकार प्रसिद्ध एथलेटिक खिलाड़ी देवेंद्र झाझरिया का नाम प्रमुख है, जिन्होंने पैरा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था। 2020-21 में पैरालंपिक जापान में भारतीय खिलाड़ियों ने जिस कदर ओलंपिक पदकों की भारत के लिए श्रृंखला जीती वह अभूतपूर्व है। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले भारतीय क्लासिकल डांसर सुधा चंद्रन,संगीतकार रविंद्र जैन, बैडमिंटन प्लेयर गिरीश शर्मा, ब्लाइंड क्रिकेट में 32 शतक लगाने वाले शेखर नायक, प्रसिद्ध डॉक्टर सत्येंद्र सिंह, कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टर सुरेश आडवाणी आदि का नाम अत्यंत गौरवशाली सूची में शामिल है ।
जिन्होंने न सिर्फ अपना बल्कि राष्ट्र का गौरव भी बढ़ाया है। यह सब दिव्यांग जनों के लिए अपनी पहचान बनाने के अलावा प्रेरणा स्रोत के रूप में भी तेजी से उभरे हैं। इनकी उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है कि दिव्यांगों में अपार क्षमताएं होती हैं तथा वे प्रेरणा दाई भी होते हैं। यदि इनके लिए अवसर और सशक्तिकरण के सफल प्रयास किए जाएं ,आधुनिक तकनीकी से इनकी क्षमताओं में वृद्धि की जाए तो इनमें क्षमताओं की वृद्धि की अपार संभावनाएं निहित हैं। भारत देश में जितने दिव्यांग निवास कर रहे हैं, अभी भी बेहतर परिणाम आना शेष है इसीलिए देश के विकास एवं प्रगति में दिव्यांगों की भूमिका तथा उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरे समाज तथा शासन प्रशासन को आगे आकर इनकी हौसला अफजाई कर सामान्य जीवन की सुविधाओं में इजाफा किया जाना चाहिए।
इसके लिए स्वास्थ्य पेशेवरों, शिक्षकों, स्थानीय समुदाय, छोटी-छोटी संस्थाओं,स्वयंसेवी संस्थाओं तथा आम नागरिकों को आगे आना होगा तभी दिव्यांग जनों को समावेशी विकास में शामिल किया जा सकेगा। यह शुभ संकेत भी है कि न सिर्फ भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांगों के प्रति संवेदनशीलता मैं काफी वृद्धि हुई है, और यही कारण है कि विकलांगों को दिव्यांग जैसे सम्मान पूर्वक शब्दों से पुकारा जाता है, यदि समाज की भूमिका मानवीय तथा सामंजस्य पूर्ण होती है, तो दिव्यांग जनों को विकास की ओर अग्रसर होने तथा सामाजिक समरसता की मुख्यधारा में जुड़ने से कोई रोक नहीं सकता है।
]]>नेपाल के राजकीय अतिथि के रूप में राजीव कुमार 18 नवंबर से 22 नवंबर, 2022 तक ईसीआई अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। अपनी यात्रा के दौरान श्री कुमार काठमांडू और आसपास के क्षेत्रों में स्थित मतदान केंद्रों का दौरा करेंगे।
ईसीआई का भी एक अंतर्राष्ट्रीय चुनाव परिदर्शक कार्यक्रम है, जहां अन्य चुनाव प्रबंधन निकायों के सदस्यों को समय-समय पर होने वाले हमारे आम और विधानसभा चुनावों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
भारत निर्वाचन आयोग, अन्य चुनाव प्रबंधन निकायों (ईएमबी) और संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठनों/संघों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय विचार-विमर्श के माध्यम से दुनिया भर में लोकतंत्र के उद्देश्य को बढ़ावा देने में हमेशा सबसे आगे रहा है और लोकतांत्रिक संस्थानों और प्रक्रियाओं को मजबूत करने की दृष्टि से हमेशा संपर्कों को बढ़ावा देने, ज्ञान के आदान-प्रदान करने तथा सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने आदि को सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया है। ईसीआई के भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान (आईआईआईडीईएम) ने क्षमता निर्माण पहल के हिस्से के रूप में अब तक 109 देशों के 2200 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है, जिनमें 70 नेपाल के अधिकारी भी शामिल हैं। आईआईआईडीईएम में 13 से 24 मार्च, 2023 तक नेपाल चुनाव आयोग के 25 अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।
‘लोकतंत्र के लिए शिखर सम्मेलन’ के पूर्व कार्यक्रम के रूप में ईसीआई द्वारा हाल ही में ‘ईएमबी की भूमिका, रूपरेखा और क्षमता’ विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में नेपाल चुनाव आयोग के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया था। “लोकतंत्र के लिए शिखर सम्मेलन – कार्रवाई का वर्ष” के सहायक आयोजनों के तहत ईसीआई, “समावेशी और सुलभ चुनाव” तथा “चुनावों में तकनीक” विषयों पर दो और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों की मेजबानी करेगा।
ईसीआई सितंबर 2019 से अक्टूबर 2022 तक विश्व चुनाव निकाय संघ (एसोसिएशन ऑफ वर्ल्ड इलेक्शन बॉडीज- ए-वेब) की अध्यक्षता कर रहा था, जो चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय संगठन है। ए-वेब में वर्तमान में 109 देशों के 119 चुनाव प्रबंधन निकाय (ईएमबी) शामिल हैं। ईसीआई को अब सर्वसम्मति से 2022 से 2024 की अवधि के लिए एशियाई चुनाव प्राधिकरण संघ (एसोसिएशन ऑफ एशियन इलेक्शन अथॉरिटीज –एएईए) का नया अध्यक्ष चुना गया है और इस प्रकार विश्व स्तर पर ईसीआई की उपस्थिति और इसके द्वारा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनावों के कुशल संचालन को स्वीकार किया गया है।
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]]>स्रोत पर कचरे गीले और सूखे कचरे को अलग करने के इस व्यापक जागरूकता अभियान में पूरे भारत से लगभग 45,000 स्कूलों के 75 लाख से अधिक छात्रों ने भाग लिया। कचरा मुक्त शहरों का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए यह अभियान आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा चलाया गया। इतना ही नहीं, हजारों की संख्या में नागरिकों, समुदायों और संगठनों ने अपने शहर के शहरी स्थानीय निकायों, नगर निगमों के नेतृत्व में उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

‘स्वच्छता के दो रंग’ नामक इस अभियान में “हरा गीला, सूखा नीला” का संदेश हर घर तक पहुंचाने का आह्वान किया गया, जिसके तहत हरे डस्टबिन में गीले और नीले डस्टबिन में सूखे कचरे को स्रोत पर ही अलग-अलग करने पर जोर दिया गया। अभियान में 2,000 से ज्यादा शहरी स्थानी निकायों ने 31 राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों में स्कूलों, समुदायों के साथ घर-घर जाकर जमीनी स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए, जिसमें बताया गया कि जहां कचरा निकलता है, वहीं पर गीले और सूखे को अलग कर दिया जाए, तो उसे आसानी से खत्म या रीसाइकल किया जा सकता है। हर उम्र के छात्रों ने पूरे उत्साह से अभियान में शामिल होकर कई तरह की गतिविधियों में भाग लिया, जिसमें पेटिंग, हस्तशिल्प कला के जरिए गीले कचरे के लिए हरे और सूखे कचरे के लिए नीले रंग के लेबल और स्टिकर बनाए। बच्चों ने सूखे कचरे के इस्तेमाल से डस्टबिन, खिलौने आदि बनाए, नुक्कड़ नाटक किए और अपने घरों तक ’स्वच्छता का उपहार’ स्वरूप लेकर गए।
‘स्वच्छता के दो रंग’ अभियान को शुरू करने के लिए असम के खोवाई में छात्रों ने बापू के स्वच्छ भारत के दृष्टिकोण पर नृत्य नाटिका का प्रदर्शन किया। पटना नगर निगम के स्कूली छात्रों ने ‘वेस्ट टू वंडर’ थीम पर कचरे से कई तरह के मॉडल बनाकर गीले और सूखे कचरे के महत्व को समझाया और छोटा भीम जैसे बच्चों के पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर का इस्तेमाल कर जागरूक किया। दिल्ली के एमसीडी स्कूलों ने पज्जल बनाकर उसे सुलझाने के बहाने खेल-खेल में गीले-सूखे कचरे के बारे में जागरूक किया।

इंदौर, जो स्वच्छता सर्वेक्षण अवॉर्ड्स में छह बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीत चुका है और 7-स्टार कचरामुक्त शहर है, उसने एक बार फिर दिवाली के बाद स्वच्छता अभियान में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। कुछ अनूठी पहल भी देखने को मिलीं, जहां एनडीएमसी ने स्वच्छता शुभंकर तैयार किया और उसके जरिए लोधी गार्डन में सुबह के समय टहलने निकले लोगों को गीले-सूखे कचरे को अलग रखने का संदेश दिया। असम के तेजपुर म्यूनिसिपल बोर्ड ने ऐसी जगहों पर बैनर और कियोस्क लगाए, जहां काफी संख्या में लोगों का आवागमन होता है। फोरेस्ट घाट पर सेल्फ सस्टेनेबल लोकलिटी के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूह और स्थानीय निवासियों के लिए वर्मी कंपोस्टिंग और पिट कंपोस्टिंग का डेमो देते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया। केरल की मलप्पुरम नगरपालिका में अंतरराज्यीय मजदूरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया, जिसमें कचरे को अलग करने के अभियान के बारे में जागरूक किया गया। त्रिची नगरपालिका ने सिनेमा हॉल में ऐसे कियोस्क लगाए, जहां कचरे को अलग करने पर क्विज और इंटरेक्टिव जागरूकता अभियान चलाया। भारतीय डाक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने देशभर में स्वच्छता से जुड़ी गतिविधियों में खुद को शामिल कर सक्रिय भागीदारी निभाई। कश्मीर के ओपीएस सेक्टर में सीआरपीएफ के जवानों ने सीआरपीएफ कैंप की सड़कों, बगीचों और परिसरों की सफाई के लिए झाड़ू उठाई।
स्रोत पर अपशिष्ट पृथक्करण के इस राष्ट्रव्यापी अभियान ने स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और पुराने डंपसाइटों में जाने वाले कचरे को कम करने की दिशा में जमीनी कार्रवाई के माध्यम से केंद्रित भागीदारी शुरू की। बड़े पैमाने पर चलाए गए इस जन आंदोलन में सभी क्षेत्रों के नागरिकों ने विशेष तरीके से कचरे को स्रोत पर अलग करने के बारे में जागरूकता फैलाई और अभियान को एक बड़ी सफलता दिलाई। इसका असर जमीनी स्तर पर पहले ही दिखाई दे रहा है क्योंकि राज्यों ने अपनी पूरी ताकत शहरों को कचरा मुक्त बनाने की दिशा में लगानी शुरू कर दी है।
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]]>सोशल मीडिया पर लोगों की मनमानी को लेकर बहुत सारी आलोचनाओं का निदान करने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। यानी अब तक सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट करने की मनमानी पर नकेल कसने को सरकार ने मसौदा तैयार कर लिया है। सोशल मीडिया पर जो भी पोस्ट हो रहे हैं, उनमें कौन से पोस्ट देश या समाज हित में नहीं हैं, यह तय करने के लिए केंद्र सरकार समिति बनाने की तैयारी में है। सोशल मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर सरकार यह तय करेगी कि किस तरह के कंटेंट को उठाना है या कौन से कंटेंट को डाउन करना है। खासकर ऐसे कंटेंट जो देश, समाज हित या सामाजिक सौहार्द्र के लिए सही नहीं हैं, उन पर नकेल कसी जाएगी।सोशल मीडिया कंपनियों पर नकेल कसने के लिए पैनल गठन की अधिसूचना के मुताबिक, टेक कंपनियों को अपनी वेबसाइट, मोबाइल एप या दोनों पर सेवा नियमों और निजता नीति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। प्रस्तावित बदलावों में इंटरमीडियरी कंपनियों के लिए भारतीय संविधान द्वारा नागरिक अधिकारों का सम्मान करना भी जरूरी होगा। शिकायतों के निस्तारण के लिए 72 घंटे की व्यवस्था होगी।
प्रियंका सौरभ
सोशल मीडिया कंपनियां अब कंटेंट सामग्री के नियमन के नाम पर मनमानी नहीं कर पाएंगी। भारत सरकार ने इसके लिए नई व्यवस्था का खाका तैयार कर दिया है। इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी संशोध 2022 से जुड़े कानूनों को अधिसूचित कर दिया है। नए आईटी नियमों के तहत ट्विटर फेसबुक इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए भारत के आईटी नियमों को मानना अनिवार्य हो जाएगा। इन सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय की गई है। आज के दौर में सोशल मीडिया दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है इसलिए इसके इस्तेमाल में सावधानी जरूरी है। जाहिर है सोशल मीडिया बडा मुददा है इसलिए नए आईटी नियमों का सोशल मीडिया पर क्या असर होगा। सोशल मीडिया पर जो भी पोस्ट हो रहे हैं, उनमें कौन से पोस्ट देश या समाज हित में नहीं हैं, यह तय करने के लिए केंद्र सरकार समिति बनाने की तैयारी में है। सोशल मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर सरकार यह तय करेगी कि किस तरह के कंटेंट को उठाना है या कौन से कंटेंट को डाउन करना है। खासकर ऐसे कंटेंट जो देश, समाज हित या सामाजिक सौहार्द्र के लिए सही नहीं हैं, उन पर नकेल कसी जाएगी।
सोशल मीडिया कंपनियों पर नकेल कसने के लिए पैनल गठन की अधिसूचना के मुताबिक, टेक कंपनियों को अपनी वेबसाइट, मोबाइल एप या दोनों पर सेवा नियमों और निजता नीति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। प्रस्तावित बदलावों में इंटरमीडियरी कंपनियों के लिए भारतीय संविधान द्वारा नागरिक अधिकारों का सम्मान करना भी जरूरी होगा। शिकायतों के निस्तारण के लिए 72 घंटे की व्यवस्था होगी। किसी अन्य शिकायत पर 15 दिनों के अंदर एक्शन लेना होगा, जिससे आपत्तिजनक कंटेंट वायरल नहीं हो सके। यह भी सुनिश्चित करना पड़ेगा कि उसके कंप्यूटर रिसोर्स का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति किसी भी ऐसी सामग्री को होस्ट न करे, वितरित न करे, प्रदर्शित न करे, अपलोड न करे, प्रकाशित न करे और शेयर न करे जो किसी दूसरे व्यक्ति की हो, जिस पर यूजर का अधिकार न हो, अपमानजनक, अश्लील, बाल यौन शोषण, दूसरे की प्राइवेसी भंग करने वाली, जाति, वर्ण या जन्म के आधार पर उत्पीड़न करने वाली, हवाला के लिए प्रेरित करने वाली या अथवा देश के किसी भी कानून का उल्लंघन करने वाली, भारत की एकता, अखंडता, रक्षा, सुरक्षा, संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने वाली, विदेश नीति या संबंधों को प्रभावित करने वाली पोस्ट, वायरस/स्पैम फैलाने वाली सामग्री, गलत प्रचार जिसे आर्थिक लाभ के लिए तैयार किया गया हो और जिसमें किसी व्यक्ति या संस्था को ठगने, नुकसान पहुंचाने की संभावना लगती हो।
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प्रभावशाली इंटरनेट प्लेटफॉर्म की एक छोटी संख्या “बाजार में प्रवेश करने वालों को बाहर करने, किराए की मांग करने, और अपने फ़ायदे के लिए अंतरंग व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा करने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग करती है।” इन प्लेटफ़ॉर्म को वर्तमान में उत्तरदायी ठहराए जाने से सुरक्षा प्राप्त है, और ये बाल यौन शोषण, साइबर स्टॉकिंग, और वयस्कों की अंतरंग छवियों का गैर-सहमति से वितरण जैसे मुद्दों को उचित रूप से संबोधित करने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं करते हैं। इन नियमों के बारे में चल रही आलोचना का समाधान इन्हें फिर से नए सिरे से प्रकाशित करना है। दिशा-निर्देश, अंततः सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अंतिम उपयोगकर्ताओं के बारे में हैं, बाद में इन नियमों की वृद्धि पूर्व में किये गए इनके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। अंतिम उपयोगकर्त्ताओं के हितों को सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिये तथा ऐसे किसी भी तरह के नियम और विनियम नहीं बनने चाहिये जो उनके मूल अधिकारों का उल्लंघन करते हों। इसके अलावा गलत और झूठी सूचनाओं पर अंकुश लगाने हेतु कानून और व्यवस्था का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता है, लेकिन इस बात को भी सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि नागरिकों की गोपनीयता से किसी भी प्रकार का कोई समझौता न हो।
Promotional | KRC Foundation

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जवाब में, दक्षिण अफ्रीकी टीम एक गेंद शेष रहते 119 रन पर अल आउट हो गए। अफ्रीका के मिगनोन डु प्रीज ने चार चौकों और तीन छक्कों की मदद से 59 रन की पारी खेली। भीड़ भी मैच जीतनर में असमर्थ रही। मिग्नॉन डु प्रीज 59 रन की अटैकिंग पारी के साथ शीर्ष स्कोरर थे। स्पिनर दीप्ति शर्मा ने अपने चार ओवर के कोटे में तीन विकेट लेने के अलावा तीन मैदानी ओवर डाले। दीप्ति के अलावा बाएं हाथ की स्पिनर राधा यादव, लेग ब्रेक गेंदबाज पूनम यादव और तेज गेंदबाज शिखा पांडे ने दो-दो विकेट लिए। दक्षिण अफ्रीका की ओर से तेज गेंदबाज शबनिम स्माइल सबसे सफल गेंदबाज रही।
फिल्म जोया अख्तर द्वारा निर्देशित है और इसमें रणवीर सिंह और आलिया भट्ट मुख्य भूमिका में हैं।फिल्म गली बॉय रणवीर द्वारा चित्रित रैपर मुराद के जीवन के आसपास केंद्रित एक आने वाली उम्र का ड्रामा है।फिल्म मुंबईकर डिवाइन और नाएज़ी की वास्तविक जीवन की कहानियों से प्रेरित थी।
फिल्म को 14 फरवरी को बड़े पैमाने पर आलोचनात्मक रूप से रिलीज़ किया गया था। इस साल करीब 27 फिल्मों में से सर्वसम्मति लेके ‘गली बॉय’ को चुना गया। इस अबसर पर रणवीर ने कहा क यह फिल्म की पूरी टीम के लिये बहत ही ख़ुशी का पल है। जानी मानी अभिनेत्री एवं फिल्मकार अपर्णा सेन इस साल की चयन समिति की अध्यक्ष थीं। निर्णायक मंडल द्वारा अंतिम रूप से ‘गली बॉय’ को चुने जाने पर अपर्णा ने कहा, ‘‘फिल्म की ऊर्जा लाजवाब है। यह दर्शकों से संवाद करेगी।’’
]]>जबकि रक्षा मंत्री ने कहा ‘‘यदि पाकिस्तान के साथ कोई बात होगी तो वह केवल पाक-अधिकृत कश्मीर के बारे में होगी अन्य किसी बारे में नहीं।’’ और अंततः गृह मंत्री ने संसद में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पेश करते हुए पाक-अधिकृत कश्मीर के बारे में नीतिगत बयान दिया। एक सांसद के प्रश्न के उत्तर में शाह ने जोर देकर कहा जब हम कश्मीर की बात करते हैं तो उसमें पाक-अधिकृत कश्मीर और अक्सई चिन भी शामिल हैं।

ये बयान केवल दिखावा नहीं। पाकिस्तान सन 1947 से भारतीय कश्मीर पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है और अब भारत द्वारा पाक-अधिकृत कश्मीर को वापस लेने के प्रयासों के व्यापक अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव होंगे। यह किस प्रकार हमारी विदेश नीति और सामरिक संबंधों को प्रभावित करेगा और इस कदम के क्या परिणाम होंगे? अंतर्राष्ट्रीय निकायों और राष्ट्रों के काूननों के बावजूद प्रबुद्ध राजनीतिक दार्शनिक इसया वलिंग की गैलिक प्रिंस की सूक्ति अभी भी लागू होती है और वह सूक्ति है कि ताकतवर का विशेषाधिकार है कि वह कमजोर से अपनी आज्ञा का पालन करवाता है और इसी के अनुसरण में इजराइल ने अपनी राजधानी तेल अवीब से जेरूुशलम स्थानांतरित करी जबकि जेरूशलम पर मुसलमान और यहूदी दोनों अपना दावा करते हैं और यह दोनों धर्मों का धार्मिक केन्द्र है। इसी के आधार पर चीन हांगकांग में लोकतंत्र की मांग कर रहे नागरिकों का दमन कर रहा है अैर 1979 में सोवियत संघ द्वारा अफगानिस्तान पर हमले के समय से यह महाशक्तियों की प्रतिद्वंदिता का मंच बन गया है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहां पर सैन्य शक्ति या मजबूत राजनीतिक गठबंधन के माध्यम से कोई देश अपने लक्ष्य प्राप्त करता है।
पक-अधिकृत कश्मीर के मामले में भारत सामरिक गठबंधन या सैन्य कार्यवाही अथवा दोनों मार्ग अपना सकता है। गृह मंत्री, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री के बयानों से लगता है कि दोनों मार्ग खुले हुए हैं और सैन्य कार्यवाही के साथ साथ कूटनीति भी चलती है। भारत देर सवेर पाक-अधिकत कश्मीर को वापस लेने के लिए कदम उठाएगा और भारत के कदम के पक्षों में क्या कारक होंगे? इसमें सबसे महत्वूपर्ण कारक अमरीका द्वारा पाक-अधिकृत कश्मीर के बारे में भारत का समर्थन करना है।
इस बात की संभावना है कि अमरीका भारत के पक्ष में होगा। अमरीका अफगानिस्तान से अपनी सेना वापस बुला रहा है और वहां पर उसे काफी नुकसान हो रहा है। उसके लिए यह एक और वियतनाम बन गया है और इसलिए वह चिंतित है। डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी वायदा किया था कि वह अफगानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की संख्या कम करेगा और 2020 में दूसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लडने से पूर्व वे इस वायदे को पूरा करना चाहते हैं किंतु तभी ऐसा कदम उठा सकते हैं जब वहां तालिबान पर अंकुश लगाने के लिए कोई विकल्प हो। इसके लिए अमरीका पाकिस्तान पर निर्भर है किंतु अमरीका पाकिस्तान के पाखंड और दोगलेपन को समझ गया है इसलिए अमरीका ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता देना लगभग बंद कर दिया है। साथ ही पाकिस्तान को चीन का संरक्षण प्राप्त है।
उक्त भू-राजनीतिक परिदृश्य ने पाकिस्तान के बारे में अमरीका की सरदर्दी बढा दी है। डोनाल्ड ट्रंप और अमरीकी सामरिक नेतृत्व के पास भारत के पक्ष में आने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है ताकि तालिबान को निष्क्रिय करने में मदद मिले और इस क्षेत्र में चीन की वर्चस्ववादी महत्वाकांक्षा पर अंकुश लगे। इस बात की पूरी संभावना है कि पाक-अधिकृत कश्मीर को वापस लेने में अमरीका भारत का समर्थन करेगा क्योंकि इससे भारत की अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच हो जाएगी और ऐसा ही मत सुब्रमणियम स्वामी ने व्यक्त किया है जो अमरीकी दृष्टिकोण से अवगत हैं। अमरीका चाहता है कि भारत अफगानिस्तान में सैन्य हस्तक्षेप करे किंतु भारत ने अभी तक इस मामले में अपनी अनिच्छा व्यक्त की है।
बदले भूसामरिक परिदृश्य में हो सकता है भारत अमरीका की इस राय को माने और उसके बदले पाक- अधिकृत कश्मीर के संबंध में अमरीका का समर्थन मांगे। कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के बाद भारत पाक- अधिकृत कश्मीर को वापस लेने का लक्ष्य रखेगा क्योंकि इससे चीन और पाकिस्तान की तुलना में भारत को सैन्य लाभ मिलेगा। इस पर चीन की प्रतिक्रिया का अंदाजा लगाना कठिन है। चीनी अवसरवादी होते हैं और बहुत कम लोग चीन की सोच को समझ पाए हैं। इसलिए यूरोपीय और अमरीकी देश चीनी अर्थव्यवस्था का निर्माण कराने पर खेद व्यक्त करते हैं क्योंकि यह विश्व शांति और सुरक्षा के लिए संभावित राजनीतिक खतरा बन गया है। अन्य देशों के भूभाग पर सर्वाधिक दावा चीन का है।
इसलिए भारत को चीन को अलग थलग करने के लिए मेहनत करनी होगी। मेरी राय है कि भारत कई बार चीन भारत संबंधों के बारे में लपरवाह बन जाता है। चीन के साथ इसी तरह की कूटनीति जारी रहेगी किंतु हमें यह समझना होगा कि चीन भारत के लिए संभावित खतरा है। इस क्षेत्र में एक अन्य हितधारक रूस है। भारत ने रूस के साथ पुरानी मैत्री विकसित करने का प्रयास किया है। कश्मीर मुद्दे पर भी रूस ने भारत का समर्थन किया है और हम यह मान सकते हैं कि पाक-अधिकृत कश्मीर में भारत की कार्यवाही को वह अपना पूर्ण समर्थन देगा।
कूटनीतिक दृष्टि से भारत को पाक अधिकृत कश्मीर की वापसी के लिए सैनिक और कूटनयिक मार्ग अपनाना होगा। उसे विश्व को समझाना होगा कि पूरा कश्मीर कानूनी रूप से भारत का है और इसका उल्लेख कश्मीर के भारत में विलय पत्र में है जिस पर तत्कालीन महाराजा ने हस्ताक्षर किए थे और कश्मीर विधान सभा ने उसका समर्थन किया था और इसी तरह अन्य रजवाडे भी भारत में शािमल हुए थे। पाकिस्तान का कश्मीर पर कोई दावा नहीं है।
हमारी उदारता और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के प्रति आदर को देखते हुए कुछ लोग कहेंगे कि नेहरू ने इस मुद्दे पर विवाद की गुंजाइश पैदा की। अब भारत इस अपूर्ण ऐतिहासिक कार्य को पूरा करना चाहता है। दूसरी ओर कश्मीर के राज्यपाल की तरह आप यह भी कह सकते हैं कि पाक-अधिकृत कश्मीर के लोग भारत के साथ मिलना चाहते हैं। इसलिए भारत को भारत में तथा पाक-अधिकृत कश्मीर में कश्मीरी भाई बहनों पर ध्यान रखना होगा। कश्मीरी लोगों को यह अहसास होना चाहिए कि उनका भविष्य भारत के साथ है इसलिए कश्मीर में शीघ्रातिशीघ्र सामान्य स्थिति बहाल की जानी चहिए और भारत इस दिशा में निरंतर कदम उठा रहा है।
आर्थिक मामलों की स्थाई समिति की अध्यक्ष और सीनेट सुश्री सोफी प्राइमास के नेतृत्व में फ्रांस के सांसदों के शिष्टमंडल के साथ आज दिल्ली में बातचीत करते हुए नायडू ने विश्व में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए भारत और फ्रांस में नजदीकी सहयोग का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसियों सहित सभी देशों के साथ सदैव शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास करता है। हम नहीं चाहते हैं कि कोई हमारे देश के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करे न ही हम स्वयं अन्य देशों के मामले में दखल देना चाहते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद निरोध, अंतरिक्ष सहयोग, आर्थिक भागीदारी और अन्य क्षेत्रों में फ्रांस के साथ अपनी भागीदारी को बहुत महत्व देता है। यह देखते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच नजदीकी संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारत-फ्रांस संसदीय मैत्री समूह की स्थापना का सुझाव दिया। उन्होंने स्मार्टसिटी पहल के तहत भारत के साथ भागीदारी करने के फ्रांस के निर्णय के बारे में प्रसन्नता जाहिर की और कहा कि भारत के विकास के लिए शहरी नवीकरण और स्वच्छ ऊर्जा में भारी निवेश की जरूरत है।
दोनों देशों के बीच अधिक से अधिक व्यापार, प्रौद्योगिकी और पूंजी प्रवाह का आह्वान करते हुए श्री नायडू ने कहा कि 2022 तक माल के व्यापार के निर्धारित लक्ष्य को 15 बिलियन यूरो तक पहुंचाने के लिए द्वीपक्षीय व्यापार की गति को कई गुना बढ़ाये जाने की जरूरत है। यह कहते हुए कि जलवायु परिवर्तन, भारत सरकार के लिए एक विश्वास का विषय है, उन्होंने पेरिस समझौते के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि भारत इस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने के मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने इस बारे में विशेष रूप से ‘वन प्लैनिट समिट’ आयाजित करने के लिए फ्रांस की सराहना की।
नायडू ने नवम्बर 2018 में आयोजित प्रथम विश्व युद्ध की युद्ध विराम संधि के शताब्दी वर्ष समारोह के दौरान फ्रांस की अपनी यात्रा का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में अपना बलिदान देने वाले 9,000 से भी अधिक भारतीय वीरों की याद में विलर्स गुइस्लैन में पहले भारतीय युद्ध स्मारक का उन्होंने उद्घाटन किया था। इसरो और सीएनईएस के माध्यम से भारत और फ्रांस के बीच दीर्घकालीन और बहुमुखी अंतरिक्ष सहयोग का उल्लेख करते हुए श्री नायडू ने कहा हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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अफ्रीका महात्मा गांधी की पहली कर्मभूमि थी जहां समानता, सम्मान और न्याय के लिए उनके आरंभिक संघर्ष ने, भारत और अफ्रीका के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को और प्रगाढ़ कर दिया। उपराष्ट्रपति ने संतोष व्यक्त किया कि राष्ट्रपिता की 150वीं जन्म जयंती के अवसर पर इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस संगोष्ठी में भारत-अफ्रीका संबंध, प्रशासन और भू-राजनीति, विकास और आर्थिक सहयोग, प्रवासी मुद्दे, सुरक्षा के साझा मुद्दे, मीडिया, संस्कृति तथा शिक्षा के क्षेत्र में आदान-प्रदान तथा भारत में अफ्रीकी अध्ययन को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि यदि भारत शीघ्र ही 5 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनने के प्रयास कर रहा है तो अफ्रीका का ऐजेंडा 2063 इसका पूरक बन सकता है। इस संदर्भ में नायडु ने प्रधानमंत्री द्वारा प्रतिपादित देश की दस – सूत्रीय अफ्रीका नीति की चर्चा करते हुए कहा कि हमारी नीति का लक्ष्य है कि अफ्रीका के साथ अपने संबंधों को निरंतर प्रगाढ़तर किया जाय।
हाल के वर्षों में भारत और अफ्रीका के बीच उच्चस्तरीय शासकीय दौरों में तेजी आयी है। 2015 के बाद से दोनों पक्षों के बीच लगभग 70 उच्चस्तरीय शासकीय दौरे हुए हैं। भारत ने हाल के वर्षों में अफ्रीका में 6 नये मिशन स्थापित किये हैं।
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