मौजूदा जिला/रेफरल अस्पतालों से संलग्न नए चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना से सरकारी क्षेत्र में योग्य स्वास्थ्य व्यावसायिकों, उन्नत सेवाओं की उपलब्धता बढेगी, जिला अस्पतालों की मौजूदा अवसंरचना का इस्तेमाल होगा और देश में किफायती चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
बिना चिकित्सा महाविद्यालय वाले स्वास्थ्य सुविधा से वंचित क्षेत्रों में कम- से-कम 200 बिस्तर वाले जिला अस्पतालों में नए चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना की जाएगी। आकांक्षापूर्ण जिलों और 300 बिस्तरों वाले जिला अस्पतालों को प्रमुखता दी जाएगी। नए चिकित्सा महाविद्यालयों (58+24+75) की स्थापना की योजना से देश में एमबीबीएस की कम-से-कम15,700 सीटें बढेंगी।
सरकार ने इससे पूर्व प्रथम चरण में मौजूदा जिला/रेफरल अस्पतालों से संलग्न 58 नए चिकित्सा महाविद्यालयों और दूसरे चरण में 24 नए चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी थी। इनमें से प्रथम चरण के तहत 39 चिकित्सा महाविद्यालय ने अपना काम शुरू कर दिया है, जबकि 2020-21 तक शेष 19 चिकित्सा महाविद्यालय क्रियाशील हो जाएंगे। दूसरे चरण में 18 नए चिकित्सा महाविद्यालयों की मंजूरी दी गई है।
‘सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:‘सरकार का मार्गदर्शक सिद्धांत है। सरकार ने ‘आयुष्मान भारत’के एक हिस्से के रूप में दो ऐतिहासिक पहलों की घोषणा की है, जिससे प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक सेवा प्रणाली पर जोर देते हुए स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के पूर्णत: समाधान और रोकथाम होने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा मिलेगा।
]]>फिलहाल अनेक एजेंसियों के माध्यम से सेना प्रमुख के लिए सतर्कता संबंधी क्रियाकलाप किया जाता है और इसमें किसी एक एजेंसी का हस्तक्षेप नहीं है। सेना प्रमुख के अधीन एक स्वतंत्र सतर्कता प्रकोष्ठ को चालू किया जाएगा। इसके अनुसार, इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सेना प्रमुख के अधीन सीधे-सीधे अपर महानिदेशक (सतर्कता) को पदस्थापित किया जाएगा। इसमें कर्नल स्तर के तीन अधिकारी (भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना में से एक-एक अधिकारी) शामिल होंगे। यह सेना मुख्यालय के मौजूदा पदों के तहत किया जाएगा।
मानवाधिकार से जुड़े करारों और मूल्यों के पालन को उच्च प्राथमिकता देने के लिए, सीधे-सीधे उप-सेना प्रमुख के अधीन अपर महानिदेशक (मेजर जनरल रैंक के अधिकारी) के नेतृत्व में एक विशेष मानवाधिकार अनुभाग स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यह मानव संसाधन संबंधी किसी प्रकार के उल्लंघन की रिपोर्ट की जांच करने के लिए शीर्ष बिंदु होगा। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए और सर्वश्रेष्ठ जांच विशेषज्ञता सुनिश्चित करने के लिए, अनुभाग में एसएसपी/एसपी रैंक के एक पुलिस अधिकारी को प्रतिनियुक्त किया जाएगा।
फील्ड आर्मी के फॉर्मेशनों/यूनिटों में सेना मुख्यालय के २०६ सेना अधिकारियों को पदस्थापित किया जाएगा। सेना मुख्यालय से अधिकारियों को कार्य के अनुकूल बनाकर इन्हें फील्ड आर्मी के फॉर्मेशनों/यूनिटों के लिए अतिरिक्त रूप से उपलब्ध कराया जाएगा।
इन अधिकारियों में मेजर-जनरल के रैंक के तीन अधिकारी, ब्रिगेडियर के रैंक के आठ, कर्नल के रैंक के नौ, और चार लेफ्टिनेंट कर्नल या प्रमुख-रैंक के १८६ अधिकारी को प्रतिनियुक्त किया जाएगा।