इस घोटाले में पांच महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर मंत्रियों, राजनेताओं और नौकरशाहों जैसे हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों को फंसाने के लिए गिरफ्तार किया गया है। इंदौर एसएसपी रूचि वर्धन मिश्रा ने शुक्रवार को बताया कि ये महिलाएं यह कह रही हैं कि वे गृहिणी हैं, लेकिन पूछताछ के दौरान विरोधाभासी बयान दे रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने उन्हें अपनी पसंद के उम्मीदवारों को उपयुक्त स्थानान्तरण, पोस्टिंग और अन्य लाभों का आश्वासन दिया। एसएसपी मिश्रा ने कहा, ‘यह चैंकाने वाली बात है कि इन महिलाओं की व्यवस्था पर पकड़ कैसे है और वे कितनी आसानी से संचालित होती हैं’। उन्होंने कहा कि आरोपियों में से एक के पति को ‘व्यवस्था में इस तरह के एक संपर्क’ के माध्यम से लाभ मिला है और पुलिस उस मामले की जांच कर रही है।
पूछताछ के दौरान, आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) के अधिकारियों ने कुछ हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों के नाम सामने लाए – जिनमें चार नौकरशाह और कुछ राजनेता शामिल हैं, जिनके बारे में संदेह है कि उन्हें हनी ट्रैप में लेकर ठगा गया था, लेकिन विस्तृत जानकारी अभी नहीं मिली है।
एसएसपी मिश्रा ने कहा कि फिलहाल और कुछ भी सामने नहीं आ सकता है। “आरोपियों से जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की उनके संपर्क और अन्य चीजों के बारे में विवरण का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। हम विशेषज्ञों से मामले से संबंधित हटाए गए डेटा को पुनः प्राप्त करने के लिए कहेंगे, ”उसने कहा।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किसी गुप्तचर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल गुप्त रूप से वीडियो शूट करने के लिए किया गया था या नहीं। मिश्रा ने कहा, ‘हम यह जानने के लिए उनके बैंक खातों को खंगाल रहे हैं कि क्या कोई मौद्रिक लाभ शामिल तो नहीं है।’ उन्होंने कहा कि पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि और लड़कियां शामिल हैं या वे एस्कॉर्ट सर्विस चला रही हैं।
इंदौर की एक स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को भोपाल से गिरफ्तार हुई तीन संदिग्धों – श्वेता जैन, बरखा सोनी और एक अन्य श्वेता जैन को सात दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राजेश कुमार पाटीदार ने पुलिस रिमांड बढ़ाने की अभियोजन की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत तर्क रिमांड के विस्तार के लिए पर्याप्त नहीं थे। तीनों को कड़ी सुरक्षा के बीच शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया। शिकायतकर्ता, आईएमसी के कार्यकारी अभियंता हरभजन सिंह ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि महिलाओं ने अश्लील वीडियो तैयार किए थे और उनसे फिरौती की कोशिश कर रही थी। उससे 3 करोड़ रुपसे मांगे जा रहे थे। “हम शिकायतकर्ता से भी पूछताछ करेंगे, लेकिन हम आरोपी पर शुरू में ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस हनी ट्रैप के और भी शिकार हो सकते हैं, ”एसएसपी ने कहा।
जांच से जुड़े निजी सूत्रों ने मीडियाकर्मियों को बताया कि महिलाओं से एटीएस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पूरी रात पूछताछ की गई, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
माहिला पुलिस स्टेशन में आधी रात के बाद बिजली कटौती के कारण अधिकारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिससे पूछताछ प्रक्रिया में देरी हुई।
महिलाओं की घोटाले और गिरफ्तारी की सनसनीखेज खोज ने उन लोगों की रातों की नींद हराम कर दी है, जिनके नाम महिलाओं द्वारा किए गए खुलासे में शामिल हैं।
इस बीच, आरोप लगाए गए हैं कि किसी भी बड़े खुलासे को रोकने के लिए गिरफ्तारी को लापरवाही से किया गया है जो उच्च और शक्तिशाली को शर्मिंदा कर सकता है। भोपाल की रहने वाली श्वेता जैन, साथ ही आरती दयाल, बरखा भटनागर सोनी, श्वेता जैन और मोनिका यादव सभी को शीर्ष राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों का बहुत करीबी कहा जाता है।
सूत्रों का कहना है कि इन महिलाओं से एक आईएएस अधिकारी, दो आईपीएस अधिकारियों और कुछ राजनेताओं के वीडियो क्लिप बरामद किए गए हैं।
सूत्रों ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) का वीडियो खुले में आने के बाद इन महिलाओं से संबंध रखने वाले अधिकारी सतर्क हो गए। आरोपियों में से एक, आरती ने कथित तौर पर अपने वीडियो क्लिपिंग को वायरल करके तीन एसीएस को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। कहा जाता है कि श्वेता ने अधिकारी से पैसे निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद, जो अधिकारी, इन महिलाओं के संपर्क में थे, इन महिलाओं से बचने लगे। इन महिलाओं को खुले में लाने की योजना कुछ शीर्ष अधिकारियों द्वारा बनाई गई थी जब उन्हें पता चला कि वे इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह को ब्लैकमेल कर रही हैं। उन्होंने हरभजन से इन महिलाओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई और उन्हें गिरफ्तार करने की योजना बनाई।
इन महिलाओं की गिरफ्तारी के पीछे सबसे बड़ा मकसद वीडियो क्लिपिंग और उनके मोबाइल फोन को पकड़ना था क्योंकि उनके पास कई शीर्ष नौकरशाहों और राजनेताओं के वीडियो क्लिपिंग मौजूद थे जो शायद उनके करियर को बर्बाद कर सकते थे।
]]>सभी 89 अनुसूचित क्षेत्रों में यह कर्ज 15 अगस्त तक माफ होना शुरू हो जाएंगे। उन्होंने वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाए जाने की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आदिवासी वर्ग की मांग पर अनुसूचित जनजाति विभाग का नाम बदलकर आदिवासी विकास विभाग किया जाएगा।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ये भी कहा कि भविष्य में कोई साहूकार अनुसूचित क्षेत्र में साहूकारी करेगा तो उसे लायसेंस लेकर नियमानुसार धंधा करना होगा। मुख्यमंत्री ने चेताते हुए कहा कि अगर बगैर लायसेंस के किसी ने अनुसूचित क्षेत्रों में साहूकारी का धंधा किया तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और इसे गैरकानूनी माना जाएगा। यह कर्ज आदिवासी नहीं चुकाएंगे।
आदिवासियों को रुपे डेबिट कार्ड देगी सरकार
कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश के 89 अनुसूचित विकासखंडों के आदिवासियों को साहूकारों से मुक्त कराने के लिए सरकार उन्हें रुपे डेबिट कार्ड देगी। इसके जरिए वे जरूरत पड़ने पर 10 हजार रुपए तक एटीएम से निकाल सकेंगे। उन्होंने बताया कि हर हाट बाजार में एटीएम खोले जाएंगे।
आदिवासियों को देंगे वनाधिकार पट्टा
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के जिन भी आदिवासियों के वनाधिकार के प्रकरण खारिज हुए हैं उनका पुनरीक्षण किया जाएगा और पात्र होने पर उन्हें वनाधिकार पट्टा दिया जाएगा। कमलनाथ ने कहा कि जहां भी वनाधिकार प्रकरण संबंधी आवेदन लंबित है, उनका अभियान चलाकर निराकरण किया जाएगा।
ये भी घोषणाएं आदिवासी समाज में जन्म और मृत्यु के समय होने वाले रीति-रिवाजों का सम्मान करते हुए कमलनाथ ने मुख्यमंत्री मदद योजना भी शुरु की है। उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवार में बच्चे के जन्म पर परिवार को 50 किलो चावल या गेहूं दिया जाएगा। इसी तरह किसी आदिवासी परिवार में मृत्यु होने पर परिवार को एक ङ्क्षक्वटल चावल अथवा गेहूं दिया जाएगा। खाना बनाने के लिए उन्हें बड़े बर्तन भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। आदिवासी समाज के देवस्थलों को सुरक्षित रखने और उन्हें संरक्षण देने के लिए सरकार ने आष्ठान योजना शुरु की है।
कमलनाथ ने कहा कि आदिवासी समाज की गौरवशाली संस्कृति सभ्यता और इतिहास को सुरक्षित रखना जरूरी है। उन्होंने आदिवासी समाज के युवकों से आव्हान किया कि वे अपनी संस्कृति सभ्यता और इतिहास को जीवित रखने का संकल्प लें।
इसे बोलचाल की भाषा में वन अधिकार कानून कहा जाता है। अधिनियम की प्रस्तावना में कहा गया है कि ‘आदिवासियों एवं जंगलवासियों के साथ हुए ‘‘ऐतिहासिक अन्याय’’ से उन्हें मुक्ति दिलाने और जंगल पर उनके अधिकारों को मान्यता देने के लिए यह कानून है ‘। कानून के अनुसार 13 दिसंबर 2005 से पहले वन भूमि पर काबिज आदिवासियों को और तीन पीढ़ियों से रह रहे अन्य वन निवासियों को उस भूमि पर अधिकार का पट्टा देने की बात की गई है।
आदिवासियों के साथ ऐतिहासिक अन्याय का मसला सिर्फ भारत में ही नहीं है, बल्कि दुनिया भर में है। अलग-अलग देशों में रह रहे वहां के स्थानीय मूल निवासियों को अपने अधिकारों और सम्मान एवं अधिकार के लिए आज भीसंघर्ष करना पड़रहा हैं।
भारत सहित अधिकांश देशों में आदिवासियों का जीवन प्राकृतिक संसाधनों पर टिका हुआ है। उनका आर्थिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक जीवन प्रकृति के बिना अधूरा है। दूसरी ओर पिछले कुछ दशकों में विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का तेजी से दोहन शुरू हो गया, जिसकी सबसे ज्यादा मार आदिवासी समुदायों पर ही पड़ी है। ऐसे में यह जरूरी था कि दुनिया के इन आदिम समुदायों को संरक्षण दिया जाए और उनके सम्मान के लिए अन्य लोगों को जागरूक किया जाए।
इसी परिप्रेक्ष्य में इन समुदायों की जरूरतों एवं संस्कृति के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 9 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस मनाने का निर्णय 1982 में जिनेवा में आयोजित स्वदेशी आबादी पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह की पहली बैठक में लिया गया था, तब से हर साल दुनिया में 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया में लगभग 37 करोड़ की आबादी स्वदेशी लोगों यानी आदिवासियों की है, जो 90 देशों में रहते हैं। वे दुनिया की कुल आबादी के 5 फीसदी हैं, लेकिन पूरी दुनिया की गरीबी में उनकी जनसंख्या 15 फीसदी है। वे दुनिया की लगभग 7,000 भाषाओं को बोलते हैं और 5,000 विभिन्न संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। आदिवासी अपनी पहचान, अपने जीवन के तरीके और पारंपरिक भूमि, क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार के लिए वर्षों से मान्यता मांग रहे हैं, फिर भी पूरे इतिहास में उनके अधिकारों का हमेशा उल्लंघन हुआ है। आज आदिवासी लोग दुनिया के सबसे वंचित और कमजोर लोगों में हैं।
भारत दुनिया के उन देशों में है, जहां विभिन्न आदिवासी समुदायों के हितों की रक्षा के लिए संवैधानिक प्रावधान भी किए गए हैं। भारत में मध्यप्रदेश वह राज्य है, जहां आदिवासियों की जनसंख्या अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा है।
जनगणना 2011 के अनुसार भारत में 8.6 फीसदी आबादी (लगभग 11 करोड़ लोग) आदिवासियों की है। देश के कुल आदिवासियों में 153.16 लाख यानी 14.7 फीसदी आदिवासी मध्यप्रदेश में रहते हैं, जो मध्यप्रदेश की कुल जनसंख्या में 21.10 फीसदी हैं। जनगणना एवं अन्य रिपोर्ट्स को देखा जाए, तो इन आदिवासी परिवारों एवं जंगलों पर आश्रित परिवारों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति बहुत ही कमजोर है और विभिन्न विकास परियोजनाओं के नाम पर इन्हें लगातार विस्थापित किया जाता रहा है।
पूरी दुनिया में आदिवासी समुदाय विस्थापन, बेहतर पुनर्वास, स्थानीय संसाधनों, खासतौर पर वनों एवं नदी पर अधिकार जैसे मुद्दों से जूझ रहा है। मध्यप्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। बड़े बांधों के कारण विस्थापन हो या फिर संरक्षित वन क्षेत्रों से विस्थापन, इसका सबसे ज्यादा खामियाजा इन समुदायों ने ही भुगता है। ऐसे में यह जरूरी है कि विश्व आदिवासी दिवस के बहाने इन समुदायों की समस्याओं का समाधान किया जाए।
मध्य प्रदेश में आदिवासी परिवारों की संख्या ज्यादा होने की वजह से स्वाभाविक था कि यहां वन अधिकार कानून के तहत अधिकतम आदिवासियों को पट्टे मिल जाते, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पूरे देश के कुल आवेदनों में सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में ही खारिज हुए हैं। फरवरी में जब सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में 21 राज्यों को आदेश दिया कि वे अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वनवासियों को जंगल से बेदखल कर वन भूमि को खाली करवाएं, तो पूरे देश में हड़कंप मच गया था। बाद में अपने फैसले का रिव्यू करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।
आदिवासी मामलों के मंत्रालय के अनुसार 45 फीसदी से भी कम व्यक्तिगत दावे और 50 फीसदी से भी कम सामुदायिक दावे मान्य किए गए हैं। मंत्रालय ने यह इंगित किया है कि वन अमले के बेतुके आपत्ति के कारण दावे निरस्त हुए हैं।
सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में 3,54,787 दावे खारिज होने का हलफनामा मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया था। इनमें से आदिवासियों के 2,04,123 दावे और अन्य के 1,50,664 दावे खारिज कर दिए गए हैं। इस कानून को लागू करने की जिम्मेदारी आदिम जाति कल्याण विभाग को दी गई है और जिस भूमि पर अधिकार लेना है वह वन विभाग का है। इस पूरी प्रक्रिया में अधिकारियों की उदासीनता एवं वन विभाग के नकारात्मक रवैये के कारण सभी आदिवासी न तो सही तरीके से दावे कर पाए और न ही समुचित कागजात लगा पाए।
हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टों के लिए प्राप्त आवेदनों में से अमान्य आवेदनों पर पुनर्विचार किए जाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय आदिवासियों के हित में है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि सरकारी अमले का रवैया सकारात्मक हो, हर भूमिहीन, बेघर एवं वनों पर आश्रित आदिवासियों को पट्टा दिया जाए। मध्य प्रदेश सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए आदिवासियों के देवस्थान एवं आस्था स्थलों के संरक्षण, विकास एवं विस्तार के लिए नई ‘स्थान’ योजना की स्वीकृति दी है।
यह बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसे अलग से भी देखा जा सकता है और वन अधिकार कानून में वर्णित सामुदायिक अधिकार एवं हैबिटेट अधिकार के साथ जोड़कर देखा जा सकता है। यदि किसी आदिवासी परिवार को रहने के लिए वन में पट्टा मिल जाए और उसे वहां आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए अधिकार न हों, तो न्याय अधूरा रह जाएगा।
वैश्विक स्तर पर पूरे विश्व में आदिवासी दिवस के लिए यह साल आदिवासी समुदायों की भाषा को समर्पित है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण मसला है। आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया में उनकी भाषाओं पर ध्यान नहीं दिया गया और कई भाषाएं अपने अस्तित्व से जूझ रही हैं।
यूनेस्को की रिपोर्ट को देखें, तो पता चलता है कि अधिकांश भाषाएं जो विलुप्त हो गई हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं, वे सभी किसी न किसी आदिवासी समुदाय की थीं। इन भाषाओं का संरक्षण एक सभ्यता के संरक्षण की तरह है। अभी हाल ही में मध्यप्रदेश में गोंडी भाषा को प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। यह एक सराहनीय पहल है, लेकिन इसे विस्तार देते हुए अन्य आदिवासी भाषाओं तक ले जाना चाहिए। शिक्षाविदों का भी मानना है कि स्थानीय भाषा एवं बोली में प्राथमिक शिक्षा ज्यादा असरकारी होता है।
मध्य प्रदेश ने निर्णय लिया है कि अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस मनाने के लिए 9 अगस्त को प्रदेश में शासकीय अवकाश रहेगा।अब यह जरूरी है कि आदिवासियों की उनकी समस्याओं का निराकरण करते हुए विकास की ऐसी नीति बनें, जिसमें उन्हें विस्थापित होने से बचाया जा सके। जंगलों से उन्हें बाहर कर प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के नजरिए में बदलाव लाना होगा। प्रकृति के साथ उनके सह अस्तित्व से ही पर्यावरण बचेगा, क्योंकि आदिवासी समुदाय प्रकृति से उतना ही लेता है, जितना उसे जीवन के लिए जरूरी होता है।
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