



ह्यूमेनिटीज, कला और सामाजिक विज्ञान में अनुसंधान के लिए विजिटर्स अवार्ड पंद्दुचेरी विश्वविद्यालय के एप्लाइड साइकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर सिबनाथ देब को प्रदान किया जायेगा। उन्हें यह अवार्ड बाल संरक्षण विशेष रूप से बाल शोषण और उपेक्षा, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और एचआईवी/एड्स के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए दिया जा रहा है।
भौतिक विज्ञान में अनुसंधान के लिए यह अवार्ड जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान स्कूल के प्रोफेसर संजय पुरी को प्रदान किया जायेगा।
जीव विज्ञान में अनुसंधान के लिए यह अवार्ड अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अंतरविषयी जैव-प्रौद्योगिकी इकाई के प्रोफेसर असद उल्ला खान को भारत में एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) और एएमआर के फैलने और नियंत्रण की कार्यप्रणाली के लिए तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के नैनोसाइंस के विशेष केन्द्र में कार्यरत डॉ. प्रतिमा को संयुक्त रूप से प्रदान किया जायेगा।
डॉ. प्रतिमा ने नैनोबायोसेंसर और नैनोबायोइन्ट्रेक्शन में उल्लेखनीय अनुसंधान किया है।
प्रौद्योगिकी विकास के लिए विजिटर्स अवार्ड त्रिपुरा विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कार्यरत डॉ. शॉन रे चौधुरी को प्रदान किया जायेगा।
डॉ. चौधुरी को यह अवार्ड बायोफर्टिलाइजर में डेयर अपशिष्ट जल के रूपांतरण के लिए माइक्रोबियल बॉयोफिल्म रिएक्टर विकसित करने के लिए दिया जा रहा है।
राष्ट्रपति जल्द ही घोषित की जाने वाली तारीख को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में ये अवार्ड प्रदान करेंगे। प्रत्येक श्रेणी के लिए सभी केन्द्रीय विश्वविद्यालयों से अवार्ड प्राप्तकर्ताओं के चयन के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किये गये थे। राष्ट्रपति के सचिव श्री संजय कोठारी अवार्ड चयन समिति के अध्यक्ष हैं। केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में स्वस्थ प्रतियोगिताओं और उन्हें पूरे विश्व की श्रेष्ठ प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए ये अवार्ड 2014 में स्थापित किये गये थे। तब से विभिन्न श्रेणियों में ये अवार्ड हर वर्ष प्रदान किये जाते हैं।
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राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल सरकारी अभियान ही नहीं बल्कि हर भारतीय का अभियान बन गया है। सभी ने स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी के रूप में लिया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्य 2030 तक अर्जित करने हैं लेकिन भारत 11 साल पहले ही इन स्वच्छता लक्ष्यों को अर्जित करने के लिए तैयार है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि देश का हर नागरिक इस उपलब्धि के लिए प्रशंसा का पात्र है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता का दायरा बढ़ाने का प्रयास तेज़ करने के लिये दो अक्तूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन का शुभारंभ किया था। इस वर्ष महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि के लिये स्वच्छ और खुले में शौच से मुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त किया जाना है।

उन्होंने ये भी कहा कि हमें स्वच्छता के व्यापक अर्थ को अपनाते हुए आगे बढ़ना है। उदाहरण के लिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना भी स्वच्छता के दायरे में आता है। स्वच्छता भारत सरकार द्वारा इस साल शुरू किए गए जन जीवन मिशन की सफलता की आवयश्यक शर्त है।
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इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि स्कूलों में ही चरित्र निर्माण का आधार बनता है। उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए शिक्षक अभिभावक के समान होते हैं। राष्ट्रपति ने शिक्षकों से उनकी बुनियादी जिम्मेदारियां समझने को भी कहा।
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि राधाकृष्णन न केवल एक महान दार्शनिक, राजनीतिज्ञ और लेखक थे, बल्कि एक विलक्षण शिक्षक भी थे
]]>इस अवसर पर राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द ने 23 अगस्त को नई दिल्ली में दयालुता पर पहले विश्व युवा सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं में सहानुभूति, सद्भावना और जागरूकता की भावना जागृत करना है ताकि वे अपने आप में परिवर्तन कर सके और अपने समुदायों में स्थायी शांति का माहौल बना सकें।

राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी एक महान और दूरदर्शीजननायक थे। गांधीजी हमारी वर्तमान चिंताओं जैसे शांति और सद्भावना की आवश्यकता, आतंकवाद तथा जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में भी प्रासंगिक है। उन्होंने कुछ सार्वभौमिक आदर्शों और मूल्यों का मानवीकरण किया। गांधीजी को किसी भी युग में रखते है तो हम पाते हैं कि वे सभी युगों के लिए प्रासंगिक हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि पूरे विश्व में जो हिंसा और विद्रोह की घटनाएं हो रही है उनमें अधिकांश पूर्वाग्रह पर आधारित है। ये हमें दुनिया को ‘हम लोग बनाम वे लोग’ के आधार पर दुनिया को देखने के लिए बाध्य करती है। गांधीजी के आदर्शों का पालन करते हुए हमें और हमारे बच्चों को ‘उन लोगों’ के साथ बातचीत करने और घुलने-मिलने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने शिक्षा को साक्षरता से आगे ले जाने की जरूरत के बारे में बतलाया । शिक्षा से छात्रों को अपने अंदर झांकने की प्रेरणा मिलनी चाहिए। उनकी आंतरिक शक्ति मजबूत होनी चाहिए, ताकि वे दूसरों के कष्टों को समझ सकें। शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जो छात्रों में वर्ग और वर्ण के विभेद को समाप्त कर सके।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस सम्मेलन में विश्व के युवा नेता भाग ले रहे हैं। विश्व को दयालु, संवेदनशील और शांतिपूर्ण बनाने में पूरी दुनिया के युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि इस सम्मेलन में भाग ले रहे युवा अपने पूरे जीवन में दयालुता के दूत के रूप में कार्य करते रहेंगे।
]]>इस अवसर पर राष्ट्रपति ने छात्रों से मुलाकात की और उनसे अपील करते हुए कहा कि वे नागरिकों को ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करें तथा धरती को हरी-भरी और लंबे समय तक रहने लायक ग्रह बने रहने की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करें।

वन महोत्सव समारोह के तहत राष्ट्रपति सचिवालय अगले कुछ सप्ताह में राष्ट्रपति एस्टेट में 3,252 पेड़ और 2,962 छोटे पौधे लगाएगा। इसमें पीपल, नीम, मौलसरी, चंपा, गुलमोहर, आम, चीकू, अंजीर और अमरूद जैसे सजावटी तथा फलदार पेड़ शामिल होंगे।

समृद्ध जैव विविधता वाला राष्ट्रपति एस्टेट 330 एकड़ के क्षेत्र में फैला है। इस प्रख्यात एस्टेट में सीता अशोक, बिस्टेंडू, शीशम, गब, लौकी की बेल, जंगली बादाम, नींबू सुगंधित गोंद, दून सिरिस समेत कई अन्य पेड़-पौधे लगे हैं।
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आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भारत की पड़ोसी प्रथम नीति के महत्व को रेखांकित करते हुए मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के बाद पड़ोसी देश को अपनी प्राथमिकता में शामिल करेंगे। वहीं राजनयिक सूत्रों का कहना है कि औपचारिक निमंत्रण प्राप्त होने की स्थिति में सार्क देश शपथग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं। गौरतलब है कि मोदी ने 2014 में अपने शपथग्रहण समारोह में सार्क नेताओं को आमंत्रित किया था।

एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, ‘मीडिया में शपथ ग्रहण समारोह के लिए विदेशी गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित करने के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं। हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। निर्णय हो जाने पर हम इसके बारे में जानकारी साझा करेंगे।’ ऐसी अटकले हैं कि दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सबसे पहले भूटान यात्रा पर जाएंगे।
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