बता दें कि अप्रैल और मई महीने में हुए लोकसभा के चुनाव के नतीजे 23 मई को आए, जिसमें सत्ताधारी बीजेपी को बड़ी जीत मिली है।जीत के बाद एक बार फिर नरेंद्र अपनी पार्टी के नेता चुने गए। पीएम मोदी ने 25 मई को राष्ट्रपति से मिलकर अपनी कैबिनेट का इस्तीफा सौंपा और लोकसभा भंग करने की सिफारिश की, जिस राष्ट्रपति ने मंजूर करते हुए उन्हें देश का अगला प्रधानमंत्री नियुक्त किया। बता दें कि 3 जून को 16वीं लोकसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है और उससे पहले पहले सरकार का गठन लाजमी है।
]]>रविवार को सूत्रों ने यह जानकारी दी। जेडीयू के एक नेता ने कहा कि बिहार की इस पार्टी को उम्मीद है कि 30 मई को शपथ लेने जा रही नई कैबिनेट में उसे कम से कम एक कैबिनेट मंत्री जरूर मिलेगा। पार्टी के कोटे में एक राज्यमंत्री का पद भी आ सकता है।
बता दें कि राष्ट्रपति भवन ने रविवार को बताया कि नरेंद्र मोदी गुरुवार को प्रधानमंत्री के तौर पर अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेंगे। शपथग्रहण की तारीख और उसका समय तय होने के बाद भी अभी तक आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया गया है कि नई मंत्रिपरिषद में कौन-कौन संभावित चेहरे दिख सकते हैं। तमाम नेताओं की राय है कि पिछली मंत्रिपरिषद के ज्यादातर प्रमुख सदस्य इस बार भी उसका हिस्सा बन सकते हैं।
इनका मंत्री बनना तय
राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल, नरेंद्र सिंह तोमर और प्रकाश सिंह जावड़ेकर जैसे पिछले कैबिनेट के वरिष्ठ चेहरे नई कैबिनेट का भी हिस्सा हो सकते हैं। ऐसे कयास जोर पकड़ रहे हैं कि गांधीनगर से विशाल अंतर के साथ जीत दर्ज करने वाले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी नई सरकार का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, शाह इस मुद्दे पर बोलने से बचते रहे हैं।
मध्य प्रदेश से ये हो सकते हैं चेहरे
लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद अब मोदी कैबिनेट को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। आखिर वो कौन-कौन से चेहरे होंगे जिन्हें एमपी कोटे से मोदी कैबिनेट में जगह मिलेगी, इस पर संशय के बादल बरकरार हैं। नरेंद्र सिंह तोमर, राकेश सिंह, प्रहलाद पटेल, वीरेंद्र खटीक, फग्गन सिंह कुलस्ते और थावरचंद गहलोत के नाम चर्चा में हैं। इस कवायद में आगे निकलने की होड़ में नए सांसदों की दिल्ली दौड़ भी शुरू हो गई है।

हालांकि कयास लगाए जा रहे हैं कि मंत्री पद के बंटवारे में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी जाएगी। बंगाल के नतीजों को देखते हुए यह भी तय माना जा रहा है कि केंद्र की सियासत में कैलाश विजयवर्गीय का कद बढ़ेगा। हालांकि उन्हें सरकार में या संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी इसको लेकर अटकलें हैं। देखना ये होगा कि शानदार नतीजों वाले एमपी का कद मोदी कैबिनेट में आखिर कितना बढ़ता है।
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| चरण | सीटें | कब हुआ मतदान | मतदान प्रतिशत |
| पहला | 91 | 11 अप्रैल | 69.5% |
| दूसरा | 95 | 18 अप्रैल | 69.44% |
| तीसरा | 117 | 23 अप्रैल | 68.4% |
| चौथा | 71 | 29 अप्रैल | 65.51% |
| पांचवां | 51 | 06 मई | 64.16% |
| छठवां | 59 | 12 मई | 64.40% |
| सातवां | 59 | 19 मई | 65.15% |
543 में से 542 सीटों पर मतदान कराया गया। आयोग ने तमिलनाडु की वेल्लोर सीट पर अत्यधिक धन मिलने के चलते चुनाव रद्द कर दिए थे। हालांकि, अभी यहां तारीखों का ऐलान नहीं हुआ।
वर्ष 2009 में 56.9% हुआ था मतदान
2014 में 83.40 करोड़ मतदाताओं में से 66.40% ने वोटिंग की थी। वहीं, 2009 में 56.9% मतदान हुआ था।
लोकसभा चुनाव में मतदान
| साल | मतदाता | वोटिंग |
| 1951 | 17.3 करोड़ | 61.61% |
| 1957 | 19.3 करोड़ | 62.73% |
| 1962 | 21.6 करोड़ | 55.43% |
| 1967 | 25.02 करोड़ | 61.33% |
| 1971 | 27.4 करोड़ | 55.29% |
| 1977 | 32.1 करोड़ | 60.49% |
| 1980 | 35.6 करोड़ | 56.92% |
| 1984-85 | 40.0 करोड़ | 64.01% |
| 1989 | 49.8 करोड़ | 61.95% |
| 1991-92 | 51.1 करोड़ | 55.88% |
| 1996 | 59.2 करोड़ | 57.94% |
| 1998 | 60.5 करोड़ | 61.97% |
| 1999 | 61.9 करोड़ | 59.99% |
| 2004 | 67.1 करोड़ | 57.98% |
| 2009 | 71.7 करोड़ | 58.16% |
| 2014 | 83.40 करोड़ | 66.40% |
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के ट्विटर अकाउंट से जारी सूचना के मुताबिक राष्ट्रपति नरेंद्र मोदी को 30 मई की शाम 7 पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।ये कार्यक्रम राष्ट्रपति भवन में होगा। नरेंद्र मोदी के साथ उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी भी शपथ लेने वाले है। शनिवार को नरेद्र मोदी ने राष्ट्रपति से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। इससे पहले नरेंद्र मोदी बीजेपी संसदीय दल के नेता चुने गए थे, इसके बाद उन्हें एनडीए संसदीय का नेता चुना गया।
]]>भाजपा के 301 सांसदों में से 265 करोड़पति हैं। वहीं एनडीए में भाजपा के सहयोगी दल शिवसेना के सभी 18 सांसदों की संपत्ति एक करोड़ से ज्यादा है। कांग्रेस के जिन 51 सांसदों के हलफनामों का विश्लेषण किया गया, उनमें से 43 (96 फीसदी) सांसद करोड़पति पाए गए। इसी तरह द्रमुक के 23 में से 22, तृणमूल कांग्रेस के 22 में से 20 और वाइएसआर कांग्रेस के 22 में से 19 सांसद करोड़पति हैं।
एडीआर के मुताबिक शीर्ष तीन करोड़पति सांसद कांग्रेस के हैं। इनमें मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से चुनाव जीते नकुलनाथ पहले पायदान पर हैं जिन्होंने अपनी संपत्ति 660 करोड़ रुपये घोषित की है। इसके बाद तमिलनाडु के कन्याकुमारी से सांसद वसंतकुमार एच (417 करोड़ रुपए) और कर्नाटक के बेंगलुरू ग्रामीण से चुनाव जीते डी के सुरेश (338 करोड़ रुपए) का नंबर आता है। लोकसभा चुनाव में जीते सांसदों की औसत संपत्ति 20।93 करोड़ है। नई लोकसभा के 266 सदस्य ऐसे हैं जिनकी संपत्ति पांच करोड़ या उससे ऊपर है। 2014 में करोड़पति सांसदों की संख्या 443 थी जबकि 2009 में यह आंकड़ा 315 था।
भाजपा के 265 तो शिवसेना के सभी सांसद करोड़पति
एडीआर ने इस साल चुने गए सभी 539 सांसदों के ऐफिडेविट की समीक्षा के बाद यह लिस्ट जारी की है। एडीआर ने कहा कि 542 नवनिर्वाचित सांसदों में से तीन सांसदों के हलफनामे नहीं मिल सके। इनमें भाजपा के दो और कांग्रेस के एक सांसद शामिल हैं। 17वीं लोकसभा में बीजेपी के 303 सांसद हैं और कांग्रेस के 52। एडीआर ने बताया कि 542 सांसदों में से 2 बीजेपी के और एक कांग्रेस सांसद की ऐफिडेविट की जानकारी नहीं मिल सकी। भाजपा के 301 सांसदों में से 265 (88 फीसदी) सांसद करोड़पति हैं और एनडीए में शामिल शिवसेना के सभी विजेता 18 सांसद 1 करोड़ से अधिक की जायदाद के मालिक हैं। कांग्रेस के 51 सांसदों के ऐफिडेविट की जानकारी है जिसमें से 43 सांसद करोड़पति हैं।
टीएमसी के 91, तो डीएमके के 96 फीसदी सांसद करोड़पति
बीजेपी के 301 सांसदों में से 265 (88 प्रतिशत) करोड़पति हैं। वहीं एनडीए में बीजेपी के सहयोगी दल शिवसेना के सभी 18 सांसदों की संपत्ति एक करोड़ से ज्यादा है। कांग्रेस के जिन 51 सांसदों के हलफनामों का विश्लेषण किया गया, उनमें से 43 (96 फीसदी) सांसद करोड़पति पाए गए। इसी तरह डीएमके के 23 में से 22 (96 प्रतिशत), तृणमूल कांग्रेस के 22 में से 20 (91 प्रतिशत) और वाइएसआर कांग्रेस के 22 में से 19 (86 प्रतिशत) सांसद करोड़पति हैं। एडीआर के मुताबिक शीर्ष तीन करोड़पति सांसद कांग्रेस के हैं। इनमें मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से चुनाव जीते नकुलनाथ पहले पायदान पर हैं जिन्होंने अपनी संपत्ति 660 करोड़ रुपए घोषित की है।
]]>इस मौके पर पीएम मोदी ने संसदीय दल को संबोधित करते हुए कहा कि मैं सबसे पहले तो हृदय से आप सबका आभार व्यक्त करता हूं। यह हमारे सेंट्रल हॉल की यह घटना असमान्य घटना है। हम आज नए भारत के हमारे संकल्प को एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने के लिए यहां से एक नई यात्रा का आरंभित करने वाले हैं। देश की राजनीति में जो बदलाव आया है, अपने अपने स्तर पर आप सभी ने इसका नेतृत्व किया है। आप सभी इस बदलाव के प्रक्रिया के साक्षी भी हैं। आप सभी अभिनंदन के अधिकारी हैं।
पीएम मोदी ने शनिवार को खासतौर पर युवा और पहली बार सदन में चुनकर आए सांसदों को कुछ टिप्स दिए। उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग आपसे ऑफ द रिकार्ड चर्चा भी करेंगे, लेकिन यह दिल्ली है यहां कुछ भी ऑफ द रिकार्ड नहीं होता है।
उन्होंने कहा, ‘हमारा मोह हमें संकट में डालता है। इसलिए हमारे नए और पुराने साथी इन चीजों से बचें क्योंकि अब देश माफ नहीं करेगा।’ हमपर बहुत बड़ी जिम्मेदारियां है। हमें इन्हें निभाना है। वाणी से, बर्ताव से, आचार से, विचार से हमें अपने आपको बदलना होगा।

इसके अलावा मोदी ने सभी नए सांसदों को वीआईपी कल्चर से बच कर रहने की भी सलाह दी। हम न हमारी हैसियत से जीतकर आते हैं, न कोई वर्ग हमें जिताता है, न मोदी हमें जिताता है। हमें सिर्फ देश की जनता जिताती है। हम जो कुछ भी हैं मोदी के कारण नहीं, जनता जनार्दन के कारण हैं। हम यहां अपनी योग्यता के कारण नहीं हैं, जनता जनार्दन के कारण हैं।
एनडीए के संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया।
राष्ट्रपति भवन में हुई इस मुलाक़ात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शपथ ग्रहण की जानकारी को जल्द ही राष्ट्रपति कोविंद के साथ साझा किया जाएगा।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भारत की पड़ोसी प्रथम नीति के महत्व को रेखांकित करते हुए मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के बाद पड़ोसी देश को अपनी प्राथमिकता में शामिल करेंगे। वहीं राजनयिक सूत्रों का कहना है कि औपचारिक निमंत्रण प्राप्त होने की स्थिति में सार्क देश शपथग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं। गौरतलब है कि मोदी ने 2014 में अपने शपथग्रहण समारोह में सार्क नेताओं को आमंत्रित किया था।

एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, ‘मीडिया में शपथ ग्रहण समारोह के लिए विदेशी गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित करने के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं। हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। निर्णय हो जाने पर हम इसके बारे में जानकारी साझा करेंगे।’ ऐसी अटकले हैं कि दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सबसे पहले भूटान यात्रा पर जाएंगे।
]]>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकतंत्र के इतिहास में ये जीत सबसे बड़ी घटना है। इसके लिए मैं आप सबका बेहद आभार व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोगों ने इस फकीर की झोली भर दी है। चुनाव आयोग को इन चुनावों को सफलतापूर्व और उत्तम तरीके से पूरे कराने के लिए मैं बधाई देता हूं। उन्होंने ने कहा कि आज कोई विजयी हुआ है तो हिन्दुस्तान विजयी हुआ है, लोकतंत्र विजयी हुआ है, जनता-जनार्दन विजयी हुई है। इस लोकसभा चुनाव में जो विजयी हुए हैं, उन सभी विजेताओं को मैं हृदयपूर्वक बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में मैं पहले दिन से कहा रहा था कि ये चुनाव कोई दल नहीं लड़ रहा है, कोई उम्मीदवार नहीं लड़ रहा है, कोई नेता नहीं लड़ रहा है। ये चुनाव देश की जनता लड़ रही है।

मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में भारत में दो ही जातियां
रहेंगी। एक गरीब और दूसरी गरीबी हटाने वाली। भारत के उज्ज्वल भविष्य, एकता-अखंडता
के लिए जनता ने इन चुनाव में एक नई तस्वीर सामने रखी है। सारे समाजशास्त्रियों को
अपनी सोच पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। अब इस देश में दो जातियां
बची हैं और वही रहने वाली हैं। देश इन दो जातियों पर ही केंद्रित होने वाला है।
हमें 21वीं सदी में इन दोनों को सशक्त करना है। ये दो शक्तियां देश से गरीबी
का कलंक मिटा सकती हैं। इस सपने को लेकर हमें चलना है।”
मोदी ने कहा, “चार राज्यों में भी चुनाव थे। उन राज्यों की जनता ने
जिन सरकारों को चुना, मैं वहां की जनता का अभिनंदन करता हूं। मैं विश्वास
दिलाता हूं कि केंद्र इन राज्यों की विकासयात्रा में कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी।”
हाल के महीनों में किसानों की समस्याएं देश के सामने विकराल रूप धारण किये रहीं। मध्य प्रदेश और राजस्थान में तो किसानों के आंदोलन पर पुलिस की गोलीबारी के भी कई मामले सामने आये, जिनमें अनेक किसानों की मौतें हुईं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान मुख्यरूप से कृषि आधारित राज्य हैं, जिनकी कृषि-आय देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। इसके अलावा व्यापक बेरोज़गारी, आय, कृषि और नोटबंदी के कारण असंगठित क्षेत्र की नौकरियों में कमी जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण भारतीय राजनीति में छाये रहे।
पिछले साल के विधानसभा चुनाव के नतीजों ने प्रधानमंत्री द्वारा गढ़े गये ‘कांग्रेसमुक्त भारत’ के सपने को भी ज़मीनी स्तर पर धराशायी कर दिया है। गठबंधन की राजनीति को भी इससे एक नयी दिशा मिली है। और जनता के बीच एक स्पष्ट संदेश भी गया है कि कोई भी विपक्षी गठबंधन राष्ट्रीय पार्टी की मजबूत पहल के बिना सफल नहीं हो सकता।
बहरहाल मतदाताओं ने 2019 के लिए अपना संदेश दे दिया है। संदेश यह कि मोदी को शासन पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपने पद की गरिमा को बनाये रखना होगा। सांप्रदायिक या नफरत भरे भाषणों को छोड़कर अपनी छवि सुधारनी होगी। इसके अलावा, राहुल गांधी को एक परिपक्व और सरोकारों से जुड़े नेता के रूप में अपनी छवि को गढ़ना होगा, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो गयी है। हालांकि कांग्रेस भले ही तीन राज्यों में विधानासभा चुनाव जीत गयी है, लेकिन उसे राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन का नेता घोषित करने की ग़लती नहीं करनी चाहिए थी। बीजेपी के मुकाबले विपक्ष को सीधा और सपाट संदेश मिला है कि सभी नेताओं को जनभावना को ऊपर रखना होगा और गठबंधन को बाद में।
आम चुनाव के मद्देनजर बीजेपी अपनी रणनीति में आक्रामक ढंग से परिवर्तन लायेगी। आगामी बजट अत्यधिक लोकलुभावन घोषणाओं से भरा हो सकता है। इसके बाद ध्रुवीकरण होगा। मोदी सरकार ट्रिपल तलाक विधेयक को आगे बढ़ा सकती है। ‘मोदी ब्रांड’ को जोरशोर से फिर उठाया जायेगा, सर्जिकल स्ट्राइक जैसे अन्य उपाय भी सामने आयेंगे। बीजेपी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 307 या अनुच्छेद 35 का उन्मूलन, विजय माल्या, ललित मोदी और नीरव मोदी को भारत लाने और राज्य चुनावों को एक साथ कराने जैसे अन्य कदमों को उठाने में कोई कोर-कसर नहीं छोडी जायेगी।
लेकिन जनमानस में जब विरोध के स्वर उठते हैं, तो यह विरोध अनुमान से भी ज्यादा तेजी से गति पकड़ता है। ऐसा पहले भी देखने को मिला है। शंका तो इस बात की व्यक्त की जा रही है कि बीजेपी के ये कदम कहीं उस पर ही न भारी पड़ जायें, क्योंकि जनभावना की उपेक्षा में ही इंदिरा गांधी की सरकार गिर गयी थी। इसी कारण अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह की सरकारें भी चुनाव हार गयी थीं। भारत में उस इतिहास को फिर से दोहराया जा सकता है।
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