इस अबसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्व में सैकडों जनजातियां और सामाजिक ग्रुप है तथा सैकड़ों बोलियां बोली जाती है, हमारा दायित्व है कि उत्तर-पूर्व की संस्कृति और बोलियों एवं भाषाओं को बचाकर रखते हुए, उन्हें संरक्षित रखते हुए विकास के रास्ते पर आगे बढ़ें। शाह का कहना था कि यहां के संगीत और साहित्य को छोड़कर यदि विकास किया जाता है तो उसके कोई मायने नहीं होगें।
उत्तर पूर्व और शेष भारत का जुड़ाव पुरातन काल से है जिसका जिक्र महाभारत के समय से मिलता है किंतु गुलामी के कालखंड के अंदर स्वरूप बिगाड़ा गया। शाह का कहना था कि उत्तर-पूर्व का विकास मोदी सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है और जो विकास यात्रा 2014 में यात्रा शुरू की गई है, 2022 आते-आते पूर्णता को प्राप्त करेगी। उत्तर-पूर्व के मात्र 8 राज्य नहीं बल्कि अष्टलक्ष्मी हैं जो संपूर्ण भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही साथ मंत्री ने कहा जो गांव विकास में पीछे हैं उन्हें साथ में शामिल करना होगा क्योंकि जब गांव विकसित होंगे, जिले विकसित होंगे तब राज्य विकसित होगा और तभी समग्र रूप से देश विकसित होगा।
अमित शाह ने कहा कि पहले एनईसी केवल एडवाइजरी काउंसिल थी किंतु अब यह प्लानिंग और इंप्लीमेंटेशन काउंसिल के रूप में भी कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि 2022 तक उत्तर-पूर्व के सभी 8 राज्य रेल तथा वायु कनेक्टिविटी से जुड जाएंगे। उन्होंने कहा कि 13 वें फाइनेंस कमीशन में उत्तर-पूर्व का बजट 3376 करोड़ था जिसे नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद 14वें फाइनेंस कमीशन में 1.5 गुना बढाकर 5053 करोड़ रुपए किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि एनईसी बजट का 30 प्रतिशत हिस्सा अति पिछडे तथा अविकसित क्षेत्रों के लिए खर्च किया जाएगा।
ढाका के साथ हुए सीमा समझौते से उत्तर-पूर्व का देश के विकास में योगदान बढ़ेगा। उन्होंने यहां की प्राकृतिक संपदा और असीम संभावनाओं को देखते हुए बताया विकास कार्य होने से उत्तर-पूर्व के राज्य देश के जीडीपी कंट्रीब्यूशन में शीर्ष स्थान पर होंगे।
एनआरसी के बारे में शाह ने कहा है यह हमारा संकल्प है कि भारत सरकार एक भी घुसपैठिए को यहां रहने नहीं देगी। अमित शाह ने उत्तर-पूर्व के राज्यों में सीमा विवाद के संबंध में कहा कि जब भारत और बांग्लादेश का सीमा विवाद समाप्त हो सकता है तो राज्यों के बीच सीमा विवाद को क्यों नहीं सुलझाया जा सकता। उत्तर-पूर्व के सीमा विवाद को सुलझाने का वक्त आ गया है। शाह का कहना था कि देश की सुरक्षा के लिए उत्तर-पूर्व बहुत ही महत्वपूर्ण है तथा उत्तर-पूर्व की कानून व्यवस्था के लिए 2022 के लक्ष्य तय करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि श्री नरेंद्र मोदी सरकार उत्तर-पूर्व के विकास के लिए दृढ संकल्प है तथा 2014 के बाद उत्तर-पूर्व में अनेकों विकास कार्य किए गए हैं।

पूर्वोत्तर भारत में अपार पनबिजली क्षमता मौजूद है और पनबिजली परियोजनाओं में राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री सिंह ने क्षेत्र में पनबिजली विकास को पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया और सभी हितधारकों से अपील की कि वे इस क्षमता का दोहन करने के लिए नजदीकी सहयोग करें। पंजाब और हिमाचल प्रदेश में पनबिजली परियोजनाओं के विकास ने राज्य की समृद्धि में बहुत योगदान किया है। इसी तरह पूर्वोत्तर राज्य भी पनबिजली परियोजनाओं के विकास से लाभ उठा सकते हैं।

बैठक के दौरान श्री आर के सिंह ने पूर्वोत्तर राज्यों में विद्युत क्षेत्र के विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की समीक्षा की, जिसमें एकीकृत विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस), दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई), प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) और आर-एआरडीआरपी योजनाएं शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि क्षेत्र के लिए आईपीडीएस के तहत १७९७.४३ करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
इस अवसर पर सुबानसिरी लोअर पनबिजली परियोजना से विद्युत आपूर्ति के लिए अरुणाचल प्रदेश और एनएचपीसी लिमिटेड के बीच पीपीए पर हस्ताक्षर किए गए।
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राज्य सरकार के साथ राष्ट्रीरय सहकारी विकास निगम द्वारा वित्त पोषित इस परियोजना को शीघ्र ही मेघालय में शुरू किया जाएगा। सुअर पालन विकास परियोजना से समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र में मांस की घरेलू उपलब्धता बढ़ जाएगी और इसके निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। जिससे लोगों को आजीविका के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही बेहतर प्रजनन स्टॉवक के साथ सुअर पालन शुरू करने के लिए ग्रामीणों के बीच जागरूकता बढ़ेगी।
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