आर्थिक मामलों की स्थाई समिति की अध्यक्ष और सीनेट सुश्री सोफी प्राइमास के नेतृत्व में फ्रांस के सांसदों के शिष्टमंडल के साथ आज दिल्ली में बातचीत करते हुए नायडू ने विश्व में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए भारत और फ्रांस में नजदीकी सहयोग का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसियों सहित सभी देशों के साथ सदैव शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास करता है। हम नहीं चाहते हैं कि कोई हमारे देश के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करे न ही हम स्वयं अन्य देशों के मामले में दखल देना चाहते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद निरोध, अंतरिक्ष सहयोग, आर्थिक भागीदारी और अन्य क्षेत्रों में फ्रांस के साथ अपनी भागीदारी को बहुत महत्व देता है। यह देखते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच नजदीकी संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारत-फ्रांस संसदीय मैत्री समूह की स्थापना का सुझाव दिया। उन्होंने स्मार्टसिटी पहल के तहत भारत के साथ भागीदारी करने के फ्रांस के निर्णय के बारे में प्रसन्नता जाहिर की और कहा कि भारत के विकास के लिए शहरी नवीकरण और स्वच्छ ऊर्जा में भारी निवेश की जरूरत है।
दोनों देशों के बीच अधिक से अधिक व्यापार, प्रौद्योगिकी और पूंजी प्रवाह का आह्वान करते हुए श्री नायडू ने कहा कि 2022 तक माल के व्यापार के निर्धारित लक्ष्य को 15 बिलियन यूरो तक पहुंचाने के लिए द्वीपक्षीय व्यापार की गति को कई गुना बढ़ाये जाने की जरूरत है। यह कहते हुए कि जलवायु परिवर्तन, भारत सरकार के लिए एक विश्वास का विषय है, उन्होंने पेरिस समझौते के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि भारत इस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने के मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने इस बारे में विशेष रूप से ‘वन प्लैनिट समिट’ आयाजित करने के लिए फ्रांस की सराहना की।
नायडू ने नवम्बर 2018 में आयोजित प्रथम विश्व युद्ध की युद्ध विराम संधि के शताब्दी वर्ष समारोह के दौरान फ्रांस की अपनी यात्रा का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में अपना बलिदान देने वाले 9,000 से भी अधिक भारतीय वीरों की याद में विलर्स गुइस्लैन में पहले भारतीय युद्ध स्मारक का उन्होंने उद्घाटन किया था। इसरो और सीएनईएस के माध्यम से भारत और फ्रांस के बीच दीर्घकालीन और बहुमुखी अंतरिक्ष सहयोग का उल्लेख करते हुए श्री नायडू ने कहा हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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अफ्रीका महात्मा गांधी की पहली कर्मभूमि थी जहां समानता, सम्मान और न्याय के लिए उनके आरंभिक संघर्ष ने, भारत और अफ्रीका के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को और प्रगाढ़ कर दिया। उपराष्ट्रपति ने संतोष व्यक्त किया कि राष्ट्रपिता की 150वीं जन्म जयंती के अवसर पर इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस संगोष्ठी में भारत-अफ्रीका संबंध, प्रशासन और भू-राजनीति, विकास और आर्थिक सहयोग, प्रवासी मुद्दे, सुरक्षा के साझा मुद्दे, मीडिया, संस्कृति तथा शिक्षा के क्षेत्र में आदान-प्रदान तथा भारत में अफ्रीकी अध्ययन को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि यदि भारत शीघ्र ही 5 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनने के प्रयास कर रहा है तो अफ्रीका का ऐजेंडा 2063 इसका पूरक बन सकता है। इस संदर्भ में नायडु ने प्रधानमंत्री द्वारा प्रतिपादित देश की दस – सूत्रीय अफ्रीका नीति की चर्चा करते हुए कहा कि हमारी नीति का लक्ष्य है कि अफ्रीका के साथ अपने संबंधों को निरंतर प्रगाढ़तर किया जाय।
हाल के वर्षों में भारत और अफ्रीका के बीच उच्चस्तरीय शासकीय दौरों में तेजी आयी है। 2015 के बाद से दोनों पक्षों के बीच लगभग 70 उच्चस्तरीय शासकीय दौरे हुए हैं। भारत ने हाल के वर्षों में अफ्रीका में 6 नये मिशन स्थापित किये हैं।
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