इसके आधार पर नेशनल कैंसर ग्रिड (एनसीजी) की स्थापना हुई और टाटा मेमोरियल सेंटर ने इसका प्रबंधन किया। इसमें भारत से 183 हितधारक हैं और इसे कैंसर अस्पतालों और विदेशों के अन्य संबंधित संस्थानों के लिए खोला गया है। टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) के निदेशक डॉ. राजेंद्र बडवे ने एनसीजी का विवरण दिया और बताया कि कैसे इसका विदेशी अस्पतालों तक दायरा बढ़ाया जा सकता है और इससे उन्हें क्या लाभ प्राप्त होंगे।

एनसीजी का उद्देश्य कैंसर के इलाज में असमानता को दूर करना है। एनसीजी ‘विश्वम’ से वैश्विक स्तर पर यही भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती है। इस कनेक्ट के लांच होने के तुरंत बाद 11 देशों ने इसमें अपनी दिलचस्पी जाहिर की। श्रीलंका और बांग्लादेश के अस्पतालों में वीडियो विदेशों के लिए एनसीजी की पेशकश के बारे में वीडियो संदेश के माध्यम से इस कनेक्ट की सराहना की। एनएएचयू, आईएईए निदेशक सुश्री मे अब्देल-वहाब ने एनसीजी विश्वम के लांच के अवसर पर आईएईए की ओर से प्रशंसा व्यक्त करते हुए कैंसर के इलाज में आए अंतर को पाटने के लिए इसे एक व्यापक पैकेज की संज्ञा दी।
एनसीजी विश्वम कैंसर के कनेक्ट का आधिकारिक ‘लोगो’ भी इस अवसर पर जारी किया गया। इस लोगो में तीन सी – कैंसर, केयर और कनेक्ट को एक मिट्टी का दीपक बनाते हुए दर्शाया गया है। इस दीपक की ज्योति लाल बिंदु द्वारा दर्शायी गई है। यह लाल बिंदु कुमकुम का भी प्रतीक है। जबकि इसका ओरिएन्टेशन एक आंख का प्रतिनिधित्व करता है। दीपक समृद्धि और जीवन को दर्शाता है, जबकि दीपक की लौ आत्मज्ञान के माध्यम से स्वतंत्रता की प्रतीक है।
]]>यह विश्व में अपनी तरह का सबसे बड़ा शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम है। इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘निष्ठा’ का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों में गहन चिंतन प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों को प्रोत्साहित करना है। शिक्षकों की जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न पहलुओं से जुड़े उनके कौशल को बढ़ाया जाएगा। पठन-पाठन के बेहतर नतीजे सुनिश्चित करना, योग्यता आधारित शिक्षण एवं परीक्षण, विद्यार्थी केन्द्रित शिक्षण शास्त्र, स्कूलों में सुरक्षा, व्यक्तिगत-सामाजिक गुणवत्ता, समावेशी शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित शिक्षक-शिक्षण में आईसीटी, स्वास्थ्य एवं योग सहित तंदुरूस्ती, पुस्तकालय, इको-क्लब, युवा क्लब, किचन गार्डनसहित स्कूली शिक्षा में पहल, स्कूलों में नेतृत्व के गुण इत्यादि इन पहलुओं में शामिल हैं। इस एकीकृत कार्यक्रम का उद्देश्य लगभग ४२ लाख प्रतिभागियों की पाठन क्षमता को बेहतर बनाना है।
पोखरियाल ने कहा कि शिक्षक ही राष्ट्र की शक्ति हैं, इसलिए उनकी गुणवत्ता अवश्य ही सर्वश्रेष्ठ होनी चाहिए। देश का प्रधानमंत्री का सपना है कि हमारे शिक्षकों की गुणवत्ता इतनी बेहतर हो, जिससे कि उन्हें विश्व भर में सम्मान मिले।
ये प्रशिक्षण राज्य और संघ शासित प्रदेशों द्वारा चिन्हित किए गए ३३१२० की रिसोर्स पर्सन्स (केआरपी) और स्टेट रिसोर्स पर्सन्स (एसआरपी) द्वारा सीधे तौर आयोजित किया जाएगा, जिन्हें राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी)राष्ट्रीय प्रशिक्षण शैक्षिक योजना और प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए), केन्द्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस), नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस), केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और गैर-सरकारी संगठन द्वारा चिन्हित किए गए १२० नेशनल रिसोर्स पर्सन्सद्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा।
एकीकृत कार्यक्रम सभी प्रमखों और शिक्षकों को प्रथम स्तर के काउंसलर के रूप में प्रशिक्षित करना चाहता है ताकि वे उत्साहपूर्वक शिक्षा को बढ़ावा देने और विशेष रूप से सक्षम बच्चों (स्पेशल चिल्ड्रन) की आवश्यकताओं का खास तौर पर ध्यान रखने के अलावा छात्रों की आवश्यकताओं के प्रति सजग और उत्तरदायी बन सकें

निष्ठाके लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों तथा सीबीएसई, केवीएस, एनवीएस, स्कूलों के प्रधानाचार्यों और कैवल्य फाउंडेशन, टाटा ट्रस्ट, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और अरबिन्दो सोसाइटी जैसे गैर-सरकारी संगठनोंके सुझावों को शामिल करते हुए एक परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से विकसित किया गया है।
शिक्षकों की सहायता के लिए डिजिटल सामग्री और प्रौद्योगिकी सक्षम शिक्षण पद्धतियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इस विशाल क्षमता निर्माण कार्यक्रम को प्रौद्योगिकी के साथ एकीकृत किया गया है। एमओओडीएलई (मॉड्यूलर ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड डायनेमिक लर्निंग एनवायरनमेंट) पर आधारित एक मोबाइल ऐप और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) एनसीईआरटी (https://nishtha.ncert.gov.in/) द्वारा विकसित किया गया है। एलएमएस का उपयोग रिसोर्स पर्सन्स और टीचर्स के पंजीकरण, संसाधनों के प्रसार, ट्रेनिंग गैप और प्रभाव विश्लेषण, निगरानी, सलाह और प्रगति का ऑनलाइन आकलन करने के लिए किया जाएगा।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, नेशनल रिसोर्स पर्सन्स व्हाट्सएप/फेसबुक ग्रुप आदि के माध्यम से नियमित रूप से केआरपी के संपर्क में रहेंगे और क्वालिटी सर्कल्स बनाएंगे जो विचारों, चुनौतियों और उनके समाधानों और सर्वोत्तम पद्धतियों को साझा करने के काम आएंगे।
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