16 सितंबर को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करनेके बाद सार्वजनिक नीति और प्रशासन, नैतिकता और जवाबदेही और जन शिकायतों के निवारण, प्रेरणा, नवाचार, सतत विकास लक्ष्यों, पर्यटन को बढ़ावा देने, हिंद महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग, विशिष्ट पहचान प्राधिकरण, पासपोर्ट सेवा केंद्र और भारत निर्वाचन आयोग के साथ-साथ भारत – मालदीव संबंधों पर सत्रों का आयोजन किया जाएगा।
भारत के प्रधान मंत्री ने जून 2019 में मालदीव की अपनी यात्रा में भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति पर जोर दिया था और व्यापक सामाजिक-आर्थिक विकास और लोकतांत्रिक तथा स्वतंत्र संस्थानों की मजबूती की अपनी आकांक्षाओं को साकार करने में मालदीव को भारत के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया था। यात्रा के दौरान भारत के सुशासन केंद्र और मालदीव के प्रशासनिक सेवा आयोग के बीच हस्ताक्षर किए गए एक समझौता ज्ञापन में अगले 5 वर्षों में राष्ट्रीय सुशासन केंद्र में मालदीव के 1000 प्रशासनिक कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण गतिविधियों की परिकल्पना की गई थी। एमओयू के तहत, 10 प्रशिक्षण कार्यक्रम सितंबर 2019 से दिसंबर 2020 तक आयोजित किए जाएंगे। एमओयू के तहत पहले 3 प्रशिक्षण कार्यक्रम 2019 में (क) सितंबर 16-28, 2019 और नवंबर 2015, 2019 में मध्य प्रबंधन स्तर के 60 अधिकारियों के लिए आयोजित किए जाएंगे तथा (ख) शीर्ष प्रबंधन स्तर के 30 अधिकारियों के लिए दिसंबर 2-14, 2019 के दौरान आयोजित किये जाएंगे।
भारत मालदीव के प्रशासनिक कर्मचारियों की क्षमता निर्माण के लिए सबसे बड़ा विकास भागीदार है। विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की एक अनूठी विशेषता यह है कि इसके 70 प्रतिशत प्रतिनिधि महिला अधिकारी हैं। कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मालदीव के प्रशासनिक कर्मचारियों के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।
]]>एनआरसी सूची से बाहर लोगों को पुष्टि पर्ची देने के साथ ही उनके अपील करने की 120 दिन की अवधि शुरू हो जाएगी। ये लोग एनआरसी सूची में अपना नाम नहीं होने को विदेशी ट्राइब्यूनल में चुनौती दे सकते हैं।
एनआरसी सूची से बाहर लोग नाम न होने की पुष्टि पर्ची के साथ वर्तमान में मौजूद विदेशी ट्राइब्यूनल में तत्काल अपील कर सकते हैं। ये आशा की जाती है कि सभी जिलों में दो सौ और नये विदेशी ट्राइब्यूनल खुलने के बाद अपील की प्रक्रिया और सरल हो जाएगी। एनआरसी की अंतिम सूची में 19 लाख लोगों के नाम नहीं हैं।
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