राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने अपने अभिभाषण में अपनी केंद्र सरकार की प्रथमिकताओं को सिलसिलेवार बताया। सरकार के एजेंडे को पेश करते हुए सभी दलों से तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं को खत्म करने के लिए सहयोग मांगा है। उन्होंने कहा, ‘देश के लोगों को लंबे समय तक मूलभूत सुविधाओं के लिए इंतजार करना पड़ा, लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं। सरकार के दबाव, प्रभाव या अभाव की स्थिति से जनता को मुक्त करना है।’
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा, ‘यह नया भारत गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के उस आदर्श भारत की ओर बढ़ेगा, जहां लोगों का चित्त भयमुक्त हो और आत्म सम्मान से युक्त। नए भारत के इस पथ पर सभी व्यवस्थाएं पारदर्शी होंगी और ईमानदार लोगों की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी।

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के अभिभाषण की ख़ास बातें
पीएम मोदी ने विपक्षी दलों से सहयोग की मांग करते हुए कहा कि विपक्षी दलों को नंबरों की चिंता छोड़कर अपना योगदान देना चाहिए। उनकी आवाज और चिंताएं सरकार के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
मीडियाकर्मियों से बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘नई लोकसभा के गठन के बाद आज प्रथम सत्र प्रारंभ हो रहा है। अनेक नए साथियों के परिचय का यह अवसर है। नए साथी जब जुड़ते हैं तो नया उमंग, नया उत्साह, नए सपने भी जुड़ते हैं। भारत के लोकतंत्र की विशेषता ताकत का अनुभव हम हर चुनाव में करते हैं। यह चुनाव इसलिए भी खास है कि आजादी के बाद सबसे ज्यादा महिला प्रतिनिधियों का चुना जाना, सबसे अधिक मतदान जैसे विशेषताओं का चुनाव रहा। कई दशक के बाद एक सरकार को पूर्ण बहुमत के साथ और पहले से अधिक सीटों के साथ जनता ने सेवा का मौका दिया है।’
प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में गतिरोध के स्थान पर सक्रिय भागीदारी की अपील सभी सांसदों से की। उन्होंने कहा, ‘पिछले 5 वर्ष का अनुभव रहा है जब सदन चला है तो देश हित के निर्णय भी बहुत अच्छे हुए हैं। उन अनुभवों को आधार पर मैं आशा करता हूं कि सभी दल बहुत ही उत्तम प्रकार की चर्चा और जनहित के फैसले और जनआकांक्षाओं की पूर्ति की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र में विपक्ष का होना, सक्रिय होना और सामर्थ्यवान होना अनिवार्य शर्त है। मैं आशा करता हूं कि प्रतिपक्ष के लोग नंबर की चिंता छोड़ दें। हमारे लिए उनका हर शब्द मूल्यवान है, हर भावना मूल्यवान है। जब हम चेयर पर एमपी के रूप में बैठते हैं तो पक्ष-विपक्ष से ज्यादा निष्पक्ष की भावना बहुत महत्वपूर्ण है। मुझे विश्वास है कि निष्पक्ष भाव से जनकल्याण की भावना को ध्यान में रखकर सभी सदस्य इस सदन की गरिमा को ऊंचा उठाने में योगदान करेंगे। मुझे विश्वास है कि पहले की तुलना में अधिक उपयोगी हमारे सत्र रहेंगे। अधिक ऊर्जा, अधिक गति, अधिक सामूहिक भाव का हमको अवसर मिलेगा।’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कुछ विपक्षी सांसद बहस को बहुत प्राणवान बनाते हैं। पीएम ने कहा, ‘कुछ सांसद बहुत अच्छे विचार रखते हैं, लेकिन ज्यादातर वो रचनात्मक होते हैं और टीआरपी का मेल नहीं होता। लेकिन टीआरपी से ऊपर बहुत तर्कवत कोई सदन में सरकार की आलोचना भी करता है तो उससे हमें बल मिलेगा। 5 साल तक इस भावना को पूरा करने में आप भी (प्रेस) सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। अगर सकारात्मकता को बल देंगे तो सकारात्मकता की दिशा में जाने में बल मिलेगा।’
]]>प्रधानमंत्री मोदी के अलावा उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों ने भी शपथ ग्रहण की, इनमें राजऩाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी, डी वी सदानन्द गौड़ा, हरसिमरत कौर बादल, रविशंकर प्रसाद, संतोष गंगवार और स्मृति ईरानी शामिल हैं। डॉ हर्षवर्धन, श्रीपद नायक तथा अश्विनी चौबे ने संस्कृत में शपथ ली।
प्रधानमंत्री के बाद कांग्रेस के श्री सुरेश ने शपथ ग्रहण की। पीठासीन अधिकारियों- कोडिकुनिल सुरेश, बृजभूषण शरण सिंह और भर्तृहरि महताब ने भी शपथ ली।
बजट सत्र 26 जुलाई तक चलेगा। सत्र के दौरान लोकसभा की 30 और राज्यसभा की 27 बैठकें होंगी। लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव बुधवार को होगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दोनों सदनों को 20 जून को संबोधित करेंगे। केन्द्रीय बजट अगले महीने की पांच तारीख को प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आशा व्यक्त की है कि संसद के इस सत्र के दौरान सभी राजनीतिक दल चर्चा में भाग लेंगे। नरेन्द्र मोदी ने सांसदों का स्वागत करते हुए कहा कि सदस्यों को मुद्दों पर निष्पक्ष तरीके से सोचना चाहिए और देश के व्यापक हित में काम करना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार ज्यादातर विपक्षी दलों को लोकसभा में अपने नेता को लेकर फैसला करना अभी बाकी है और इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद एक बैठक आयोजित की जाएगी। खुद कांग्रेस ने भी इस बारे में फैसला नहीं किया है कि वह लोकसभा में अपना नेता किन्हें नियुक्त करेगी। पार्टी के एक नेता ने दबी जुबान से कहा कि अब तक कोई फैसला नहीं किया गया है और यह मुद्दा नेतृत्व के पास अब तक लंबित है।
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