भोपाल में ऐसे ही कटाई जारी रही तो साल 2025 तक तीन फीसदी रह जाएगी हरियाली।
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भोपाल में जारी अंधाधुध कटाई के कारण आठ रहवासी क्षेत्रों और एक ईको सेंसिटिव जोन से हरियाली खत्म हो गई है। विकास कार्यों के लिए होने वाली पेडों की कटाई को नहीं रोका गया तो साल 2025 तक भोपाल शहर की हरियाली तीन फीसदी रह जाएगी। अभी यह नौ फीसदी है। ऐसी स्थिति में पर्यावरण का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। जल संकट की स्थिति काबू से बाहर होगी, गर्मी बर्दाश्त करना मुश्किल होगा। कुल मिलाकर जीवन यापन मुश्किल होगा।
यह खुलासा पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी पांडे की रिपोर्ट में हुआ है। पांडे ने विश्व पर्यावरण दिवस एक दिन पहले रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट भोपाल शहर में 10 साल पहले की हरियाली व मौजूदा हरियाली को लेकर तैयार की गई है। इसके लिए कुल 13 स्थान चुने गए थे।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इनमें से 9 स्थानों पर पेड़ों की कटाई के कारण हरियाली खत्म हुई है, जबकि 4 स्थानों पर हरियाली का स्तर बढ़ा है या स्थाई बना हुआ है।
यह रिपोर्ट साइड विजिट, गुगल इमेजनरी की मदद, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंगलुरु के प्रो. टीवी रामचंद्रन द्वारा भोपाल की हरियाली को लेकर साल 2016 में प्रकाशित रिसर्च पेपर व अन्य पैरामीटर की मदद से तैयार की गई है।
हरियाली कम होने की वजह अनियोजित विकास, जनसंख्या वृद्घि, जल स्त्रोतों का सूखना, वाहनों से फैलने वाला प्रदूषण व भू-जल में गिरावट व अन्य को बताया है। इसके लिए नगर निगम, सीपीए, सामान्य वन मंडल समेत स्थानीय शासकीय एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया है।
वर्ष 2009 में हबीबगंज स्टेशन के प्लेटफार्म-1 की तरफ 10 एकड़ क्षेत्र हराभरा था। वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाने के कारण पेड़ कटने से 2019 में मैदान दिख रहा है। इसी तरह हबीबगंज स्टेशन के प्लेटफार्म-5 की तरफ के 7 एकड़ क्षेत्र में पेड़-पौधे थे जो अब नहीं हैं। वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाने के कारण पेड़ काट दिए हैं।
इस क्षेत्र में 2009 तक अच्छी खासी हरियाली थी, लेकिन मौजूदा स्थिति में पेड़ नहीं बचे हैं। लगभग पूरे क्षेत्र में गैमन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत निर्माण चल रहा है कुछ पूरा हो चुका है।
इसी शहर के साउथ टीटी नगर में स्मार्ट सिटी के तहत 18 एकड़ में रोड बनाई गई है। रोड बनाने से पहले 2009 में यह क्षेत्र हरियाली से पटा था, जो अब वीरान हो गया है। दूसरे बस स्टैंड पर 12 एकड़ में भरपूर हरियाली थी। यहां पर करोड़ों रुपए की लागत से वन भवन बनाया जा रहा है। इसके कारण पेड़ काट दिए गए। अब यह क्षेत्र वीरान हो गया।

होशंगाबाद रोड पर आरआरएल से बीयू के बीच 1.71 एकड़ क्षेत्र में मुख्य सड़क के दोनों तरफ 2009 तक भरपूर हरियाली थी, जो सायकल ट्रैक व सर्विस रोड निर्माण के दौरान बलि चढ़ा दी गई। इसी तरह बीयू से ज्ञान-विज्ञान भवन के बीच 5 एकड़ क्षेत्र में पेड़ काटे गए। तुलसी नगर आटा चक्की क्षेत्र भी गैमन इंडिया से लगा हुआ है। इसमें 2009 तक दर्जनों एकड़ में अच्छी खासी हरियाली थी जो मौजूदा स्थिति में नहीं है। सैकड़ों पेड़ काट दिए गए हैं। वाल्मी-कलियासोत डैम मार्ग पर 2.22 एकड़ क्षेत्र में सड़क के किनारे 2009 में भरपूर हरियाली थी जो सड़क चौड़ीकरण में गायब हो चुकी है। 140 एकड़ स्वर्ण जयंती पार्क में 10 साल पहले हरियाली का जो स्तर था वह अभी भी बरकरार है। इसके अलावा शाहपुरा की पहाड़ी व एकांत पार्क में भी हरियाली का स्तर स्थिर है।
डॉ. सुभाष सी पांडे कहते हैं कि रिपोर्ट में शामिल किए गए 9 स्थानों का कुल क्षेत्र 225 एकड़ है। एक एकड़ में औसतन 425 पेड़ होते थे। इस तरह 9 साल में 95 हजार 850 पेड़ों को काटा गया है। काटे गए पेड़ों की उम्र 50 साल व उससे अधिक थी। ऐसे पेड़ दोबारा नहीं बन सकेंगे। इस हिसाब से पर्यावरण को गहरी क्षति हुई है।
उनका कहना है कि शहर के 9 स्थानों पर हुई पेड़ों की कटाई को आधार बनाया जाए तो पूरे शहर में 2009 से 2019 तक तीन लाख पेड़ काटे गए हैं। क्योंकि जिन स्थानों को रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है, वहां भी तेजी से विकास कार्य चल रहे हैं और पेड़ों की कटाई भी की जा रही है। साल 1992 में भोपाल की हरियाली 66 फीसदी थी जो 2009 में 35 और साल 2019 में 9 फीसदी रह गई है। जिस हिसाब से हरियाली घट रही है उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2025 तक भोपाल शहर में तीन फीसदी हरियाली बचेगी।


