जन्म दिन विशेष: वो खंडवा जाना चाहते थे। जिंदगी के आखिरी पल अपने घर में बिताना चाहते थे क्योंकि उन्हें बंबई कभी अपने घर जैसा नहीं लगा। वो बहुत अकेला महसूस करते थे। उन्हें लगता था कि कोई उनका दोस्त नहीं है। वो गायक थे, वो एक्टर थे, वो गीतकार थे, वो संगीतकार थे, वो निर्माता थे, निर्देशक थे, स्क्रिप्टराइटर थे। लेकिन कुछ ऐसे लोग भी थे जो उन्हें दीवाना मानते थे, पागल मानते थे, अक्खड़ मानते थे। वो यानी आभास कुमार गांगुली यानी हर दिल अजीज अमर गायक किशोर कुमार।
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आज वे हमारे बीच भले ही नहीं हों लेकिन उनके गाये हजारों गीत आज भी हमारा स्वस्थ्य मनोरंजन कर रहे हैं। उनके गीतों में एक ओर खिल्लड़पन छलकता है तो वहीं दूसरी ओर दर्द भरे नगमे उनकी संवेदनाओं को भी प्रकट कर देते है।
ऐसे महान कलाकार का जन्म खंडवा में लेना किसी ऐतिहासिक घटना से कम नहीं है। इसे खंडवा की साहित्यिक, संस्कृति, विभूतियों का पुण्य ही कहा जा सकता है। बहरहाल किशोर दा का जन्म 4 अगस्त,1929 को खंडवा के बाम्बे बाजार मार्ग निवासी कुंजलाल गंगोली के घर हुआ था।
किशोर के पिता कुंजलाल गांगुली वकील और मां गौरी देवी धनाढ्य परिवार से ताल्लुक रखती थीं। किशोर चार भाइयों में सबसे छोटे थे। सबसे बड़े अशोक, उसके बाद सती देवी और फिर अनूप।
किशोर अभी बच्चे ही थे, जब अशोक कुमार बड़े फिल्म अभिनेता बन गए थे। अनूप को भी शौक था। भाइयों के साथ किशोर को भी फिल्म और संगीत का शौक हो गया। केएल सहगल के फैन थे। उन्हीं की तरह गाने की कोशिश करते थे और पढ़ाई जारी थी। इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज से वो ग्रेजुएट हुए। अभी वो किशोर कुमार नहीं बने थे। आभास ही थे। वो बंबई आ गए। बॉम्बे टॉकीज के लिए कोरस गाना शुरू किया। उन्होंने नाम भी बदल लिया। यहां अशोक कुमार काम करते थे। 1948 में फिल्म आई जिद्दी। इसके लिए खेमचंद प्रकाश के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार ने अपना पहला गाना गाया – मरने की दुआएं क्यों मांगूं।
आज वह भले ही हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी खूबसूरत पंक्तियों ने उन्हें आज भी अपने चाहने वालों के दिलों के जिंदा रखा है। किशोर कुमार फिल्मी जगत की एक ऐसी धरोहर हैं, जिन्हें शायद फिर संवारने में कुदरत को भी कई सदियां बीत जाएंगी। उनकी जादुई आवाज आज भी लोगों के सिर चढ़कर बोलती है। आज उनके जन्मदिन के खास मौके पर हम आपके सामने उनके कुछ ऐसे बेहतरीन नग्में पेश करने जा रहे हैं, जिन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकता।
गायन में योडलिंग शैली इजाद करने का श्रेय भी किशोर दा को ही जाता है, उनके गीतों की यही एक महत्वपूण् विशेषता भी रही कि योडलिंग शैली के उनके गाये गीत केवल वहीं गा सकते थे, उनकी नकल आज तक कोई भी नहीं कर पाया। वे पुरुषों की आवाज तो निकालते थे ही गायन में भी कभी-कभी महिला गायिका की आवाज भी खुद ही निकाल लिया करते थे। वे सुगम संगीत के गायक तो थे ही क्लासिकल (शास्त्रीय) संगीत पर आधारित गीत गाने में भी सफल रहे थे।

किशोर कुमार के कुछ राज जो अब राज नहीं रहे
- किशोर कुमार ने अपने जीवन में चार बार शादी की। उनकी पहली पत्नी एक बंगाली गायिका और अभिनेत्री रूमा घोष थी। दूसरी शादी उन्होंने मशहूर और खूबसूरत अभिनेत्री मधुबाला से की। योगिता बाली उनकी तीसरी पत्नी थी। चौथी शादी उन्होंने लीना चंदावरकर से की।
- “आनंद” फिल्म किशोर कुमार करने वाले थे। फिल्म को लेकर चर्चा के लिए जब हृषिकेश मुखर्जी किशोर कुमार के घर गए, तो कुमार के चौकीदार ने उनको भगा दिया। हुआ ये कि, किशोर कुमार को एक स्टेज शो कराने वाले बंगाली ने पूरे पैसे नहीं दिए थे। नाराज़ होकर उन्होंने अपने चौकीदार को कह रखा था कि अगर कोई बंगाली आए, तो उसको गेट से ही भगा दे। चौकीदार ने गलती से मुखर्जी को बंगाली संयोजक समझ लिया था।
- उन्होंने चार शादियाँ की, लेकिन वह असल ज़िंदगी में एकांत में रहना पसंद करते थे। कई लोग उन्हें सनकी भी कहते थे। ख़ास कर पैसे के लेन-देन के मामले में, वे बेहद सनकीपन वाली हरकतें करते थे। इसके कारण कुछ लोग ख़ास कर डायरेक्टर उनसे उलझना कम ही पसंद करते थे।
- किशोर कुमार ने अपने दरवाज़े के ऊपर “किशोर से सावधान” लिखवा रखा था। एक बार निर्देशक एचएस रवैल पैसे चुकाने उनके घर आए। पैसे चुका कर जब रवैल उनसे हाथ मिलाने लगे, तो किशोर ने रवैल के हाथ को मुँह में डाला और काटा भी। फिर बोले कि क्या उन्होंने बाहर लगा बोर्ड नहीं पढ़ा। मुखर्जी हंस पड़े और चलते बने।
- किशोर कुमार की टाल-मटोल वाली हरकतों से तंग आकर एक निर्देशक ने अदालत से एग्रीमेंट लिया, ताकि यदि किशोर उनकी बात न माने, तो वे उन पर केस कर सकें। अगले दिन जब वे आए, तो वे कार में तब तक बैठे रहे, जब तक निर्देशक ने उतरने के लिए नहीं कहा। एक कार सीन की शूटिंग में किशोर कार चलाते-2 खंडाला पहुँच गए, क्योंकि निर्देशक “कट” कहना भूल गया था।
- कुछ लोगों के मुताबिक किशोर कुमार गाना तब ही गाते थे, जब उनको यह यकीन हो जाता था कि उनको गाना गाने के बाद पूरे पैसे मिल जाएंगें।
- एक रिपोर्ट में यह सामने आया कि एक बार किशोर कुमार आधा मेकअप लगाकर पहुंच गए। जब निर्देशक ने उनसे इसका कारण पूछा तो वे बोले, “आधा पैसा आधा मेकअप”।
- एक बार निर्देशक एमवी रमन ने किशोर कुमार को बकाया 5000 रुपए का भुगतान नहीं किया। किशोर कुमार ने उनकी फिल्म में काम करने को मना कर दिया। बड़े भाई अशोक कुमार उन्हें मनाकर निर्देशक के पास ले गए। जब फिल्म की शूटिंग शुरू हुई, तब किशोर कुमार “पांच हजार रुपया”, ऐसे, गाने लगे और गुलाटियाँ मारने लगे। गुलाटियाँ मारते-2, वे दरवाज़े के पास पहुँच गए, और वहां से चलते बने!
- किशोर कुमार कभी भी मीडिया में रहना पसंद नहीं करते थे। उनको इंटरव्यू देना पसंद नहीं था। वह अपने आप में ही खुश रहते थे। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में आया था, कि उनके रहने वाले कमरे में खोपड़ियां और हड्डियां रखी हुई हैं।
वे कभी झरने के ताजे पानी की तरह बहते तो कभी तूफानी हवाओं की तरह उडने लगते थे, इसे केवल उनके गीत ही महसूस करा सकते हैं। ऐसे महान गायक एवं हरफानमौला कलाकार जिसने अपनी जन्मभूमि खंडवा का नाम रोशन करने में कोई कसर नही छोडी लेकिन खंडवावासी उनकी स्मृतियों को सहेजकर रखनें मे भी सफल नहीं हो सके। इसका उदाहरण उनका पैतृक निवास गौरीकुंज बाम्बे बाजार, गौरीकुंज आडिटोरियम सिविल लाईन स्थित है जो खुद अपनी दुर्दशा को बयां कर खण्डवासियो का सर शर्म से झुका रहा है। बहरहाल किशोर दा की आवाज अमर है और आकाशवाणी, दूरदर्शन एवं आडियो-वीडियो, सी।डी। के माध्यम से हवा में तैरकर हमारा मनोरंजन कर रही है एवं करती रहेगी।


