पश्चिम बंगाल के डॉक्टरों की हड़ताल का असर देशभर में दिखाई दे रहा है। सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं दिल्ली के एम्स समेत 18 बड़े अस्पतालों के डॉक्टर भी हड़ताल पर हैं। वहीं कोलकाता में एनआरएस मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट की घटना के खिलाफ हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रस्ताव को फिर से ठुकरा दिया है।
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ख़बर संक्षेप में
- पश्चिम बंगाल में चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं की बीच मरीजों की सुनने वाला कोई नहीं
- हिंसा के विरोध में 700 डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा
- ममता को दो दिन का अल्टीमेटम
- देश के प्रमुख शहरों में हड़ताल से चिकित्सा सेवा प्रभावित
- आईएमए ने देशभर के डॉक्टरों से हड़ताल में शामिल होने के अपील की
पश्चिम बंगाल में दो जूनियर डॉक्टरों पर हुए हिंसक हमले के बाद से छिड़ा आंदोलन देशव्यापी होता जा रहा है। पांच दिनों से जारी डॉक्टरों की हड़ताल ख़त्म होने की जो हल्की सी उम्मीद शुक्रवार को जगी थी, वो अब धुंधली होती जा रही है। यह उम्मीद तब टूटती दिखी जब जूनियर डॉक्टरों के समूह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मीटिंग के न्योते को ये कहते हुए ठुकरा दिया कि ममता पहले उस अस्पताल-एनआरएस जाएं जहां जूनियर रेज़िडेंट डॉक्टरों की कथित पिटाई के बाद डॉक्टरों का विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ था, साथ ही वह अपने दिए गए बयान के लिए बिना शर्त माफ़ी मांगे।

अगर मरीजों के इलाज की बात के जाये तो पश्चिम बंगाल में यह समस्या लगातार बढ़ रही है और पूरा हेल्थ सिस्टम ही चरमराया नजर आ रहा है। हिंसा के शिकार साथियों के प्रति समर्थन जताते हुए बंगाल के 700 सरकारी डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया। वहीं इस मामले से निपटने को लेकर सरकार दिशाहीन नजर आ रही है।
विगत 13 जून को एसएसकेम हॉस्पिटल का दौरा करने वाली ममता बनर्जी पूरी तरह शांत रहीं। इस बीच ज्यादातर डॉक्टरों ने काम पर वापस लौटने के लिए सीएम ममता बनर्जी की ओर से माफी मांगे जाने की भी शर्त रखी है। यही नहीं दिल्ली स्थित एम्स के डॉक्टरों की असोसिएशन ने भी ममता सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि यदि दो दिनों में पश्चिम बंगाल सरकार ने मांगें स्वीकार नहीं की तो फिर एम्स में भी डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
ममता के बयान से डॉक्टरों में भड़का गुस्सा
एक ही दिन में 700 डॉक्टरों का इस्तीफा देना अप्रत्याशित है। असल में डॉक्टरों का गुस्सा 13 जून को ममता बनर्जी की ओर से दिए गए उस बयान के चलते भड़का, जिसमें उन्होंने कहा था कि डॉक्टर या तो 4 घंटे में काम पर लौटें या फिर ऐक्शन के लिए तैयार रहें। ममता की धमकी से बेपरवाह जूनियर डॉक्टरों ने अपने आंदोलन को तेज कर दिया और धीरे-धीरे तमाम सीनियर डॉक्टर्स भी उनके समर्थन में आ गए। उसी दिन एनआरएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल ने इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद कॉलेज ऑफ मेडिसिन ऐंड सागर दत्त हॉस्पिटल के भी 21 सीनियर डॉक्टरों ने अपनी नौकरी छोड़ दी। इसके बाद 14 जून को मेडिकल कॉलेज के 107 डॉक्टरों ने अपने इस्तीफे के साथ एक बार फिर से विरोध को तेज कर दिया।

17 जून को देशभर में ठप हो जाएंगे बड़े अस्पताल?
पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के साथ हुई हिंसा के खिलाफ दिल्ली मेडिकल असोसिएशन और इंडियन मेडिकल असोसिएशन ने भी समर्थन दिया और इसकी निंदा करते हुए 17 जून को देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की। देश के 19 राज्यों के डॉक्टरों ने एक साथ मिलकर 17 को पैन इंडिया स्ट्राइक की घोषणा की है और इसकी जानकारी सभी ने अपने-अपने राज्यों को दे दी है। आरडीए के एक प्रतनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी हैं।

बिना किसी शर्त के माफी मांगे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
आंदोलन कर रहे डॉक्टरों ने ममता बनर्जी से बिना किसी शर्त के माफी की मांग की है। अपनी 6 मांगों में डॉक्टरों ने कहा कि सीएम को घायल डॉक्टरों का हालचाल जानने हॉस्पिटल जाना होगा और उनके ऑफिस को अधिकारिक बयान जारी कर हमले की निंदा करनी होगी। वहीं डॉक्टरों ने रेजिडेंट डॉक्टर पर हमला करने वालों के खिलाफ हुई कार्रवाई के अधिकारिक दस्तावेज देने की मांग की है। उन्होंने डॉक्टरों के खिलाफ सभी मामलों को बिना शर्त वापिस लेने की मांग की है। डॉक्टरों ने आधारभूत इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की मांग के साथ डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सशस्त्र पुलिस बल तैनात करने की मांग की है।
देश के दूसरे हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन जारी
पश्चिम बंगाल से शुरू हुई जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल आज देश के दूसरे हिस्सों तक आ पहुंची है। डॉक्टरों ने दिल्ली में एम्स और सफदरजंग में नए मरीजों का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया। इससे दूर-दराज से आए मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। हालांकि पुराने मरीजों के लिए ओपीडी खुली है। हड़ताल के समर्थन में दिल्ली मेडिकल असोसिएशन, आईएमए और डॉक्टरों के अन्य कई संगठन भी आ गए हैं।

डॉक्टर से मारपीट पर हो सकती है 12 साल की जेल
डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर बड़ी राहत के संकेत केंद्र सरकार की ओर से मिल रहे हैं। केंद्र सरकार जल्द ही विभिन्न राज्य सरकारों से विचार करने के बाद डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून ला सकती है, जिसके तहत डॉक्टर से मारपीट या हमला करने की घटना संगीन अपराध की श्रेणी में आ सकता है। साथ ही दोषियों को कम से कम 12 वर्ष तक की सजा का प्रावधान भी हो सकता है। इसके अलावा इस कानून को गैर-जमानती भी रखने का विचार चल रहा है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों पर हुए हमले के बाद देशव्यापी हड़ताल होने से केंद्र सरकार ने डॉक्टरों को जल्द से जल्द सुरक्षा दिलाने पर विचार शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री सभी राज्य सरकारों के साथ बैठक कर डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून के अलावा क्लिनिक्ल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में बदलाव करने पर विचार कर सकते हैं। सूत्रों का यहां तक कहना है कि सभी राज्य सरकारों से मिलकर एक ऐसा कानून लागू करने पर विचार किया जाएगा, जिसमें डॉक्टर पर हमला करने वालों के खिलाफ न सिर्फ तत्काल कार्रवाई हो, बल्कि कम से कम 12 वर्ष की गैर-जमानती सजा का प्रावधान हो। हालांकि इस पर अंतिम फैसला सभी राज्यों से प्रस्ताव मिलने के बाद ही हो सकेगा।


