शहर में खाली पड़े प्लाटों में कूड़ा डालकर वातावरण को दोहरा नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
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अशोकनगर शहर में जगह-जगह खाली पड़े भूखंड स्वच्छता अभियान की राह में बड़ी बाधा बनते जा रहे हैं। शहर में ऐसा कोई खाली प्लाट नहीं, जिसमें गंदगी के ढेर न हो। यहां आसपास के लोग कूड़ा डालते हैं, जिसके चलते गंदगी का ढेर लगे हुए हैं। इससे दूर तक वातावरण दूषित होता है एवं बीमारी का प्रकोप भी फैल रहा है।
गंदगी के ढेर के कारण लावारिस पशु भी मंडराते रहते हैं। शहर के कई वार्डों में बारिश के समय पानी की निकासी के इंतजाम नहीं हैं। इससे पानी खाली प्लॉटों में जमा हो जाता है। इससे न सिर्फ मच्छर पनपते हैं, बल्कि संक्रामक बीमारियों का भी खतरा बना रहता है। इसके अलावा मकानों में सीलन व अन्य तरह की परेशानियां खाली प्लाटों के पास निवासरत लोगों को होती है। इसके बावजूद जनप्रतिनिधि इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे।
कचरा घर में तब्दील हो चुके इन खाली प्लॉटों पर इनके मालिक धन निवेश कर चुके हैं और अब उन्हें इंतजार है किसी तगड़े ग्राहक का जो उनके भूखंड को बड़ी कीमत पर खरीद ले मगर इस इंतजार की घड़ी के बढ़ते जाने से आसपास रहने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
शहर में सैकड़ों की संख्या में खाली प्लाट पड़े हुए हैं। उनमें से अधिकांश प्लाट उन लोगों के हैं। जिनके पास पहले से ही शहर में मकान हैं। लोगों ने धन निवेश करने के लिए प्लाट खरीदकर डाल दिए हैं। इस कारण इन लोगों के द्वारा खाली प्लॉटों पर मकान नहीं बनाए जा रहे हैं। बारिश के समय में इन प्लॉटों में पानी भर जाता है। साथ ही खाली पड़े प्लाटों पर लोग कचरा डालते रहते हैं। जिससे स्थानीय मोहल्लेवासियों को दिक्कतों का सामना कर गंदगी के ढेर के बीच ही निवास करना पड़ता है। इस तरह के कचरे के ढेर शहर के अमूमन सभी वार्डों में देखे जा सकते हैं। कई वर्षों से खाली पड़े इन प्लाटों की ओर संबंधित मालिकों का भी कोई ध्यान नही है और कई लोगों ने इनमें कचरा डालकर इन्हें कचरा घर बना दिया है।
इस ओर नगरपालिका द्वारा भी कोई ध्यान नही दिया जा रहा और स्थानीय लोग इससे परेशान हैं। शहर की लगभग हर कालोनी में खाली प्लाट पड़े हुए हैं। लेक सिटी, ओम कालोनी, नहर कालोनी, साईं सिटी कालोनी, खालसा कालोनी आदि में विगत कई वर्षों से खाली पड़े पड़े है। अधिकांश कॉलोनियों में खाली प्लाट मुसीबत बने हुए हैं। यह खाली प्लॉट बारिश में तालाब के रूप में तब्दील हो जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी शहर की नहर कालोनी में होती है, जहां खाली पड़े प्लाट नागरिकों की सबसे बड़ी परेशानी बने हुए हैं।
गौरतलब है कि शहर में जो भी नई कॉलोनी विकसित हो रही हैं उनमें भी लोगों ने प्लाट खरीदकर डाल दिए हैं मगर इन भूखंडों से पानी निकासी की व्यवस्था नहीं की गई है जिससे संबंधित कॉलोनियों के रहवासियों का घरों के बाहर बैठना भी मुश्किल है। बावजूद नगर पालिका इन वार्डों में नाले-नालियों का निर्माण नहीं करा रही। मोहल्लेवासियों के मुताबिक सडक़ों पर उड़ रहे कचरे के कारण नालियां जाम हो जाती हैै। जिससे नाली का पानी सड़क पर बहने लगता है। अभी गर्मी के मौसम में हवा चलने के कारण कचरा घरों के अंदर भी पहुंच रहा है। यदि प्लाट मालिक द्वारा बाउंड्री करा ली जाए तो लोगों को परेशानी नही होगी।
पहले गंदगी, फिर कचरे में आग
पहले तो लोग कूड़ा डालते रहते हैं, जिससे बदबू आती है। जब कूड़े के ढेर बड़े हो जाते हैं तो इनमे आग लगा दी जाती है। कहने को तो शहर में आग लगाने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। लेकिन तमाम नियम व कानून कायदे कागजों में सिमटते नजर आते हैं।
प्लॉट मालिकों की होती है जिम्मेदारी
शहर में लोगों ने जगह-जगह प्लाट लेकर छोड़ दिए। इनमें कुछ लोगों ने निर्माण करवा लिया। वहां कुछ लोगों ने सिर्फ मुनाफा कमाने के लिए ही प्लाट खरीदे थे। इन प्लॉटों की उन्होंने अभी तक चारदिवारी तक नहीं निकाली। नियम कहता है कि यदि किसी का खाली प्लाट पड़ा है तो प्लाट मालिक उसकी चाहरदीवारी करवाए ताकि लोग उसमें कूड़ा न डाल सकें।


