अमृत महोत्सव देश के राष्ट्रीय एकता की आधारशिला
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भारतवर्ष स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ के अमृत महोत्सव भारत की एकता अखंडता को मजबूत किया है। हमें इसकी ऊर्जा, शक्ति और राष्ट्रीयता की भावना को बलवती बनाए रखकर इसके जज्बे को अनंत काल तक अक्षुण रखना होगा। राष्ट्रीय एकता अथवा राष्ट्रीयता किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र की संश्लिष्ट आत्मा होती है। भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द राष्ट्रीय एकता के संदर्भ में कहे थे कि हम जब-जब असंगठित हुए हैं, हमें आर्थिक व राजनीतिक रूप से की कीमत चुकानी पड़ी है, हमारे विचारों में जब जब संकीर्णता आई आपस में झगड़े हुए हमने जब भी नए विचारों से अपना मुख मोड़ा, हमें सदैव हानि ही हुई, हम विदेशी शासन के अधीन हो गए l
यह एक विराट सत्य है कि राष्ट्रीय एकता सशक्त और समुद्र समृद्ध राष्ट्र की आधारशिला होती है और राष्ट्रीय एकता छिन्न-भिन्न होने से किसी भी राष्ट्र की स्वतंत्रता स्वतंत्र नहीं रह पातीl राष्ट्र के विभिन्न घटकों में वैचारिक और आस्था का समानता होने के बावजूद राष्ट्र में एकता प्रेम तथा भाईचारे का कायम रहना अत्यंत समीचीन हैl आज जब भारत देश आक्रांता चीन पाकिस्तान और जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों से अपने हाथ दो,चार कर रहा है, देश के अंदर किसान आंदोलन, लखीमपुर खीरी आंदोलन, और जगह-जगह वैचारिक मतभेद देश के विकास एवं शांति के लिए लिए एक बड़ा व्यवधान बने थे, ऐसे में देशवासियों को एकजुट होकर देश की मुख्यधारा का शांति और अमन के लिए साथ देना चाहिए।
भारत में कई धर्मों जातियों के लोग रहते हैं, जिनके रहन-सहन एवं आस्था में अंतर तो है ही, साथ ही उनकी भाषाएं भी अलग-अलग हैं। अलग अलग होने के बावजूद पूरे भारतवर्ष के लोग भारतीयता की जिस भावना से ओतप्रोत होकर एक साथ रहते हैं ऐसी एकता को विश्व भर में सर्वोत्तम राष्ट्रीय एकता का उदाहरण कहा जा सकता है। हमारी राष्ट्रीय एकता के फल स्वरुप ही जब भी हमारी एकता को खंडित करने का प्रयास किया गया, भारत का एक-एक नागरिक सजग और सचेत होकर एशिया सामाजिक शक्तियों के विरुद्ध सदैव खड़ा दिखाई दिया है। गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर कहते हैं कि भारत की एकता तथा चेतना समय की कसौटी पर सही सिद्ध हुई है।

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आज देश की राष्ट्रीय एकता को सबसे बड़ा खतरा आतंकवाद से है। आतंकवाद में सिर्फ हमारे देश की बल्कि पूरे विश्व की शांति को बड़ा खतरा है। विगत दशकों में आतंकवादी कभी मुंबई, कभी दिल्ली, कभी जम्मू कश्मीर को अपना निशाना बनाकर अशांति फैलाने का प्रयास करते हैं और देश के कई राज्यों में अपार आर्थिक तथा जनहानि पहुंचाई है।
इसके अतिरिक्त देश में अलगाववादी तत्वों ने भी देश की एकता को बहुत नुकसान पहुंचाया है, राष्ट्रीय एकता में बाधक अनेक शक्तियों में अल गाव की राजनीति भी एक है, जहां के राजनेता वोट बैंक बनाने के लिए कभी अल्पसंख्यकों में अलगाव के बीज बोते हैं कभी आरक्षण के नाम पर पिछड़े वर्गों के देश की मुख्यधारा से अलग करते हैं तो कभी विशेष जाति प्रांतीय भाषा के हिमायती बन कर देश की राष्ट्रीय एकता को खंडित करने की कोशिश करते हैं।
आज जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा फिर से स्थापित करने की मांग हो, खालिस्तानी समर्थकों की मांग हो या वोट बैंक की राजनीति इन सब के पीछे दिखाई देती है। इस देश के हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी परस्पर प्रेम से रहना चाहते हैं लेकिन अलगाववादी राजनेता इनमें विवाद पैदा कर अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं। इन समस्याओं के समाधान का जिम्मा या उत्तरदायित्व मात्र शासन पर बैठे राजनेताओं अथवा प्रशासनिक अधिकारियों का ही नहीं है, इन सब के लिए आम जनता को भी मिलजुल कर खुलकर प्रयास करना होगा।
आज कभी देशवासी मंदिर, मस्जिद को लेकर झगड़ पडते हैं तो कभी हिंदी और अंग्रेजी को लेकर, तो कभी असम, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में राज्य के निवासियों को भगाया जाता है,तो कभी एक ही धर्म के लोग जात-पात की बातों पर उलझ पड़ते हैं। देश में फिर बाबरी मस्जिद गिराए जाने गोधरा कांड, मुजफ्फरनगर दंगे जैसी स्थिति या फिर से ना आए इसके लिए सांप्रदायिक विद्वेष, श्रद्धा, ईर्ष्या आदि राष्ट्र विरोधी भावनाओं को अपने मन से दूर रख सद्भावना का वातावरण कायम रखना होगा।
पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा है कि भारत ही अकेला ऐसा देश है, जहां मंदिरों, गिरजाघरों मस्जिदों, गुरुद्वारों और मठों में शांतिपूर्ण सह अस्तित्व है। स्वतंत्रता के बाद हमारी एकता तो मजबूत हुई है।आज सांप्रदायिकता, क्षेत्रीय जातीयता, और भाषागत अनेकता ने पूरे देश को आक्रांत करके रखा है। और इस माहौल को हम सबको अपने प्रयासों से दूर कर ऐसी भावनाओं को जनमानस से परे रखना है। यदि विघटनकारी प्रवृत्तियों पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं किया गया तो भारत की एकता और अखंडता को खतरा बना ही रहेगा।
जब भी देश में कोई दो घटक आपस में संघर्ष करते हैं तो उसका दुष्परिणाम पूरे देश को भुगतना पड़ता है। मामला चाहे आरक्षण का हो या अयोध्या राम मंदिर का सब की गूंज पूरे देश के जनजीवन को प्रभावित करती है। ऐसे में देश के सभी नागरिकों का कर्तव्य बनता है कि वह राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने हेतु तन मन धन से समर्पित रहे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी कहा है कि जब तक हम एक एकता के सूत्र में बने हैं तब तक मजबूत हैं और जब खंडित हैं, तब तब तब कमजोर हुए हैं। देश की राष्ट्रीय एकता, भाईचारा, अखंडता, की प्रासंगिकता हर राष्ट्र के लिए इतिहास में थी, वर्तमान में है, और भविष्य में रहेगी।


