विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तंबाकू व धूम्रपान के अन्य उत्पादों से होने वाली बीमारियों और मौतों की रोकथाम को ध्यान में रखकर इस वर्ष की थीम ‘तंबाकू और फेफड़ों का स्वास्थ्य’ रखी है।
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यह जीवन है
सुन्दर और अनमोल,
धूम्रपान रूपी जहर से
ना करो इसका मोल।
आज पूरी दुनिया विश्व तंबाकू निषेध दिवस मना रही है। इसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों में बढ़ती हुई तम्बाकू एवं धूम्रपान के सेवन की प्रवृत्ति को रोकथाम के लिये तम्बाकू एवं बीड़ी, सिगरेट के दुष्परिणामों से समाज को अवगत कराना है, ताकि तम्बाकू एवं गुटका बीड़ी, सिगरेट के सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति से युवा पीढ़ी एवं जन-जन को कैंसर, टीबी, हृदयघात की बीमारियों से बचाया जा सके एवं तम्बाकू एवं धूम्रपान के सेवन की रोकथाम हेतु वातावरण व चेतना का निर्माण हो सके।
इसी के मद्देनजर विश्व तंबाकू दिवस को पहली बार 7 अप्रैल 1988 को विश्व शान्ति की सबसे बड़ी वैश्विक संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ की इकाई विश्व स्वास्थ्य संगठन की वर्षगाँठ पर मनाया गया। इसके बाद हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गयी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया के करीब 125 देशों में तंबाकू का उत्पादन होता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में 80 फीसदी पुरुष तंबाकू का सेवन करते हैं, लेकिन भारत सहित कुछ देशों में महिलाओं में धूम्रपान करने की आदत काफी बढ़ी है। दुनियाभर में धूम्रपान करने वालों का करीब 10 फीसदी भारत में है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 25 हजार लोग गुटखा, बीडी, सिगरेट, हुक्का आदि के जरिये तंबाकू का सेवन करते हैं।
गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2008 में सभी तंबाकू विज्ञापनों, प्रमोशन आदि पर बैन लगाने का आह्वान किया। विश्व तंबाकू निषेध दिवस का वर्ष 2019 के लिए थीम है- तंबाकू और फेफड़ों का स्वास्थ्य। विश्व के लोगों को तंबाकू मुक्त और स्वस्थ के प्रति आसानी से जागरूक बनाने के लिये पूरे विश्व भर में एक मान्यता-प्राप्त वैश्विक संस्था डब्लूएचओ के आह्वान पर इस अभियान में विश्व भर में कई वैश्विक संगठन, सदस्य देशों की केन्द्र, राज्य सरकारें, सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठन आदि इस दिवस को पूरे उत्साह से मनाते हैं। सम्पूर्ण स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण इस महान दिवस को अत्यन्त ही सन्देशपरक बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के स्थानीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी हाल में ‘ड्रग्स-फ्री इंडिया’ अभियान चलाने की बात कही है। उन्होंने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे देश के युवा गुटका, चरस, गांजा, अफीम, स्मैक, शराब और भांग आदि के नशे में पड़ कर बर्बाद हो रहे हैं। इस कारण से वे आर्थिक, सामाजिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से विकलांगता की ओर अग्रसर हो रहे हैं। वे अपने व परिवार को समाज में नीचा दिखा रहे हैं। अनुभवी काउंसलरों तथा योग शिक्षकों द्वारा रोगी को मानसिक, आध्यात्मिक, शारीरिक रूप से प्रार्थना व नियमित योग द्वारा रोगी का खोया हुआ आत्म विश्वास फिर से जागृत कर उसे नशे के जाल से निकाला और समाज में स्थापित किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ड्रग्स थ्री डी बुराइयों को लाने वाला है और ये बुराइयां जीवन में डार्कनेस (अंधेरा), डिस्ट्रक्शन (बर्बादी) तथा डिवास्टेशन (तबाही) हैं। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है जिनके जीवन में कोई ध्येय नहीं है, लक्ष्य नहीं है, जीवन में एक खालीपन है, वहां ड्रग्स का प्रवेश सरल होता है। ड्रग्स से अगर बचना है और अपने बच्चे को बचाना है, तो उसे ध्येयवादी बनाइए। जीवन में कुछ अलग करने के इरादे वाला बनाइए, बड़े सपने देखने वाला बनाएं। फिर बाकी बेकार तथा नकारात्मक चीजों की तरफ उनका मन ही नहीं लगेगा।
संयुक्त राष्ट्र संघ की इकाई विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तंबाकू के सेवन को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की एक भयानक समस्या का दर्जा दिया गया है। चरस, गांजा, अफीम, स्मैक की अवैध खेती तथा व्यापक स्तर की तस्करी में विश्व स्तर के कई आतंकवादी संगठन तथा समाज विरोधी तत्व सक्रिय हैं।
नशे का आदी बनकर हम अपनी मेहनत से कमाये पैसों से आतंकवादियों तथा असामाजिकं तत्वों को फलने-फूलने में अपरोक्ष रूप से मदद करते हैं। इसलिए नशा करने के पहले इस बिन्दू पर अवश्य विचार कर लेना चाहिए।
नशे की आदत तब पड़ती है जब इंसान का खुद पर आत्म नियंत्रण नहीं रहता। जब इंसान मन तथा इंद्रियों के नियंत्रण में आने लगता है तो नशे की आदत सर पर चढ़ जाती है। इस मानसिक तथा आत्म नियंत्रण को पाने में योग मदद करता है। योग-प्रणायाम तथा ध्यान हमारी मानसिक तथा आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाता है। योग से आत्म नियंत्रण में वृद्धि होने से व्यक्ति की अंदर से किसी भी प्रकार का नशा करने की इच्छा ही नहीं होती है। योग तथा व्यायाम नशे की बुराई को दूर करने में पूरी तरह से सहायक है। बशर्ते दैनिक जीवन में योग को नियमित तौर पर अपनाया जाए। योग को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जाए।
योग और आध्यात्म दोनों ही मनुष्य के तन और मन दोनों को सुन्दर एवं उपयोगी बनाते हैं। योग का मायने हैं जोड़ना। योग मनुष्य की आत्मा को परमात्मा की आत्मा से जोड़ता है। इसलिए हमारा मानना है कि प्रत्येक बच्चे को बचपन से ही योग एवं आध्यात्म की शिक्षा अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए। सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए ‘योग’ वर्तमान समय की सारे विश्व की अनिवार्य आवश्यकता है और यह हमारी महान सांस्कृतिक विरासत भी है।
एक आंकड़े के अनुसार विश्व में तंबाकू के इस्तेमाल के कारण 70 लाख व्यक्तियों की प्रतिवर्ष मृत्यु हो जाती है। लाखों लोग तंबाकू की खेती और इसके व्यापार से अपनी आजीविका कमाते हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि इस कारण से इस समस्या का हल कैसे संभव है? ऐसे लोगों को दूसरे समाजोपयोगी व्यवसायों में समायोजित करने की योजना दृढ़तापूर्वक बनायी जानी चाहिए। तंबाकू में जिस रसायन की मात्रा सबसे अधिक पायी जाती है वो है निकोटिन। निकोटिन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। यह इन्सान को नशे का आदी तो बनाता ही है साथ में इसके प्रभाव से मानव शरीर में अनेकों प्रकार के कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों को जन्म भी देता है। निकोटिन के प्रभाव के चलते व्यक्ति के अंग भूख, प्यास, दिमाग आदि काम करना बंद कर देते हैं जिसके चलते धीरे-धीरे व्यक्ति पूर्ण रूप से बिना नशे के जीवित नहीं रह पाता है और वही नशा एक दिन व्यक्ति के जीवन के अंत का कारण भी बनता है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर कथन
- “तंबाकू छोड़ना इस दुनिया का सबसे आसान कार्य है। मैं जानता हूँ क्योंकि मैंने ये हजार बार किया है।”- मार्क तवैन
- “तंबाकू मारता है, अगर आप मर गये, आप अपने जीवन का बहुत महत्वपूर्ण भाग खो देंगे।”- ब्रुक शील्ड
- “तंबाकू का वास्तविक चेहरा बीमारी, मौत और डर है- ना कि चमक और कृत्रिमता जो तंबाकू उद्योग के नशीली दवाएँ बेचने वाले लोग हमें दिखाने की कोशिश करते हैं।”- डेविड बिर्न
- ज्यादा धूम्रपान करना जीवित इंसान को मारता है और मरे सुअर को बचाता है।”- जार्ज डी प्रेंटिस
- सिगरेट छोड़ने का सबसे अच्छा तरीका है तुरंत इसको रोकना- कोई अगर, और या लेकिन नहीं।”- एडिथ जिट्लर
- “तंबाकू एक गंदी आदत है जैसे कथन के लिये मैं समर्पित हूँ।”- कैरोलिन हेलब्रुन
कभी दूसरों की देखा-देखी, कभी बुरी संगत में पड़कर, कभी मित्रों के दबाब में, कई बार कम उम्र में खुद को बड़ा दिखाने की चाहत में, तो कभी धुएँ के छ्ल्ले उड़ाने की ललक, कभी फिल्मों में अपने प्रिय अभिनेता को धूम्रपान करते हुए देखकर तो कभी पारिवारिक माहौल का असर तंबाकू उत्पादों की लत का कारण बनता है। अधिकतर लोग किशोरावस्था या युवावस्था में दोस्तों के साथ सिगरेट, गुट्खा, जर्दा आदि का शौकिया रूप में सेवन करते हैं। शौक कब आदत एवं आदत लत में बदल जाती है पता ही नहीं चलता और जब तक पता चलता है तब तक शरीर को बहुत नुकसान पहुँच चुका होता है। अभिभावकों को तंबाकू की लत है तो बच्चों में ऐसे जीन्स होते हैं, जो उन्हें भी उस नशे की तरफ खींचते हैं।
बच्चों पर जो अभिभावक हर वक्त पढ़ाई का बोझ लादे रहते हैं। निरन्तर तनाव में बच्चों को कई बार नशीले पदार्थों के सेवन की ओर ले जाती हैं। अगर वे खेल, कला, संगीत, लेखन, नृत्य, बागवानी, प्रकृति प्रेम आदि में भी रूचि लेते हैं, तो उनका काफी खाली समय इन सकारात्मक गतिविधियों में लग जाता है। वे दूसरों से बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं। ऐसे में नशे की तरफ बढ़ने की आशंका काफी कम हो जाती है। नशे से बचे रहने की कोई गारंटी नहीं है, क्योंकि बाहरी दुनिया का प्रभाव बहुत शक्तिशाली होता है, लेकिन अगर बच्चा खेल, लोक कलाओं, बागवानी, लेखन, संगीत, इनोवेशन आदि में संलग्न है तो नशे के प्रभाव को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। वे बेहतर करना चाहते हैं, क्योंकि कामयाबी का नशा किसी भी दूसरी चीज के नशे से कहीं बड़ा होता है।


