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चरित्र अथवा सच्चरित्रता को यदि हम परिभाषित करें, तो अच्छे आचरण, चाल चलन, स्वभाव, गुणधर्म, आदि इत्यादि को चरित्र तथा सचरित्रता का तात्पर्य अच्छा चाल चलन, अच्छा स्वभाव, अच्छे व्यवहार से है। मनुष्य समाज के बीच रहने वाला दोपाया है। अतः समाज के मध्य ऐसे गुणों का होना आवश्यक है, जिनके द्वारा व समाज में शांति पूर्वक रहते हुए देश की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। मनुष्य के खराब आचरण से समाज का वातावरण भी प्रदूषित, खराब होता है।
दूसरी तरफ अच्छे राष्ट्रीय चरित्र फलादेश हमेशा प्रगति के पथ पर चलकर एक महान राष्ट्र की संज्ञा पाता है। काम, क्रोध,लोभ, मोह, संताप, निर्दयता और ऐसे अवगुण मनुष्य के सामाजिक जीवन में अशांति उत्पन्न करते हैं। ऐसा व्यक्ति सदैव दुराचारी ही माना जाता है जो अच्छे आचरण या अच्छे चरित्र का ना हो। दूसरी ओर इसके जरा विपरीत निष्ठा, ईमानदारी, लगन शीलता, संयम तथा परोपकार इत्यादि पालन करने वाला मनुष्य चरित्रवान और सच्चरित्र वाला कहलाता है। इसके अलावा उदारता, विनम्रता,सहिष्णुता, सत्यभाषण किसी राष्ट्र को चरित्रवान बनाता है।

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हमारे देश के महान नेता बापू महात्मा गांधी ने कूटनीति की चमक को बड़ा नहीं समझा,बुद्धि विकास को बड़ा नहीं समझा, चरित्रिक बल को ही मान दिया है। आज हमें अधिक से अधिक इस बात पर विचार करना है कि चरित्र बल केवल एक व्यक्ति का नहीं समूचे देश का होना चाहिए। राष्ट्रीय चरित्र को अत्यधिक महत्व देने वाली पंक्तियां मूर्धन्य आलोचक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा अंग्रेजी में लिखी गई पंक्तियां से हम सब भली भली भांति परिचित हैं,उसका हिंदी भावार्थ है, यदि धन गया तो कुछ भी नहीं गया, यदि स्वास्थ्य गया तो थोड़ा गया, और यदि चरित्र चला गया तो सब कुछ चला गया। उनके इस कथन से चरित्र का महत्व स्पष्ट परिलक्षित होता है। कर्म मानव की अभिव्यक्ति है, वैसे ही जीवन चरित्र की अभिव्यक्ति है।
हारवर्ट स्पेंसर ने कहा कि किसी मनुष्य राष्ट्र की सबसे बड़ी आवश्यकता शिक्षा नहीं चरित्र है, और यही सबसे बड़ा उसका रक्षक है। चरित्रवान व्यक्ति ही अच्छा राष्ट्रीय चरित्र निर्माण कर सकता है। और अच्छा राष्ट्रीय चरित्र एक महान देश को जन्म देता है। जिसमें विश्व में शांति, सद्भावना एवं परस्पर सहयोग की भावना को बल मिलता है। चरित्रवान नेता पूरे देश को अच्छे से नेतृत्व देकर सही विकास और शिक्षा की ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।
चरित्रहीन नेता देश को रसातल की ओर ले जाने में नहीं चूकता है। इसीलिए हमारा परम कर्तव्य बनता है कि हम देश के प्रतिनिधि के रूप में चरित्रवान नेताओं का ही चुनाव करें। राजनीति एक कठिन डगर है, जहां की पगडंडी बल खाकर आगे बढ़ती है। और इस प्रयास में हमें समाज में सदाचार को बढ़ाने की अत्यंत आवश्यकता है।
भ्रष्टाचार कदाचार की संभावनाओं को खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए, और इस प्रयास में हमें बच्चों को प्रारंभ से ही नैतिक शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए।चरित्रवान नेता सदैव अपने नागरिकों को महान बनने की प्रेरणा देता है। और सचरित्र ही हमेशा उदाहरण बनके आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। महात्मा गांधी तथा अन्य नेताओं ने चारित्रिक प्रबलता के दम पर ही ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंका था।

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सदाचारी व्यक्ति की समाज में प्रतिष्ठा होती है,और दुराचारी नेता सदैव निंदा का पात्र बनता है। जिस राष्ट्र के नेता नागरिक दुराचारी हो उसकी प्रगति कभी ठीक से नहीं होती। अतः देश की सही व निरंतर प्रगति के लिए आवश्यक है कि उसके अग्रणी नेता नागरिक आने वाली पीढ़ी सच्चरित्र एवं निष्ठावान हो।किसी भी व्यक्ति या नागरिक का चरित्र होना इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह कितना शिक्षित है।एक अशिक्षित व्यक्ति भी अपने मर्यादापूर्ण जीवन से अच्छे चरित्र की संज्ञा पा सकता है, और यदि उच्च शिक्षित व्यक्ति भ्रष्टाचार दुराचार में लिप्त हो तो वह दुष्ट चरित्र ही कहलाता है।
कई अति शिक्षित व्यक्ति दुराचार एवं विचार में लिप्त होकर अपने पढ़े लिखे होने को कलंकित करते हैं। और वही कम पढ़ा लिखा या अशिक्षित ऑटो ड्राइवर यात्री द्वारा भूल से छोड़े गए लाखों रुपए पुलिस थाने में जमा कर आता है, यह उस अनपढ़ व्यक्ति की उत्तम चरित्र की परिभाषा है।
आज बड़े-बड़े पढ़े-लिखे अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त होकर जेल तक की हवा खाने के लिए मजबूर हैं। यह लोग समाज के चरित्र,राष्ट्र के चरित्र के लिए अत्यंत घातक है। अच्छे चरित्र सही हमारे आत्मबल में वृद्धि होती है जिससे हम विपरीत परिस्थितियों में मर्यादा पूर्वक जीवन की शक्ति पाते हैं। अतः नागरिकों की राष्ट्रीय चरित्र की भावना एवं व्यक्तिगत चरित्र के कारण हम विश्व में अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकते हैं। यह कोई भाषण या उपदेश नहींहै,इसे जीवन में अपनाकर देखिए आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन जरूर आएंगे। शुभकामनाओं के साथ।


