प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को किया समर्पित
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मालीगांव – बोहाग बिहू के शुभ दिन पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम में असम में 249 किलोमीटर दोहरी लाइन, 86 किलोमीटर नई लाइन और 512 किलोमीटर विद्युतीकृत रेल लाइन राष्ट्र को समर्पित किया। गुलाब चंद कटारिया, असम के राज्यपाल, डॉ हिमंत विश्व शर्मा, असम के मुख्यमंत्री, सर्बानंद सोनोवाल, माननीय केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन एवं जलमार्ग और आयुष मंत्री, रामेश्वर तेली, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री और बिमल बोरा, मंत्री, असम सरकार भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
इस अवसर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि पूर्वोत्तर में हमेशा भौगोलिक रूप से संपर्क की कमी एक मुद्दा था, जिसे वर्तमान सरकार द्वारा सड़क, रेल और हवाई संपर्क पर जोर देकर हल किया जा रहा है। पिछले 9 वर्षों के दौरान ब्रॉडगेज ट्रेनें मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा पहुंचीं। पूर्वोत्तर में पहले की तुलना में नई रेल लाइनें तीन गुना तेजी से बिछाई जा रही हैं और रेल लाइनों का दोहरीकरण 10 गुणा अधिक तेजी से हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज 6,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 5 रेल परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया है, जो असम सहित क्षेत्र के एक बड़े हिस्से के विकास को गति प्रदान करेंगी। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि रेल पहली बार असम के एक बड़े हिस्से में पहुंची है और रेल लाइनों के दोहरीकरण से असम के साथ-साथ मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और नागालैंड को आसानी से जोड़ा जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आस्था और पर्यटन स्थलों की यात्रा अब और भी आसान हो जाएगी।
ये नवनिर्मित लाइनें इस क्षेत्र में रेल परिवहन परिदृश्य को बदलेगी। आवश्यक वस्तुओं का वहन करने वाली ट्रेनों सहित अधिक से अधिक ट्रेनें पूरे देश में फैले उत्पादन केंद्रों से काफी कम समय में पूर्वोत्तर राज्यों में पहुंच सकेंगी। डिगारू से लामडिंग तक 147 कि.मी. लंबी दोहरी लाइन सेक्शन का निर्माण 2,538 करोड़ रुपये की लागत से किया गया। 17 बड़े पुलों, 106 छोटे पुलों और 07 रोड ओवर ब्रिजों का निर्माण इसमें शामिल है। यह सेक्शन असम के कामरूप (मेट्रो), मरीगांव और नगांव जिलों से होकर गुजरता है। यह मार्ग की परिचालन संबंधी बाधाओं को कम करने में मदद करेगी, जो दक्षिण और ऊपरी असम क्षेत्रों के अलावा नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा जैसे राज्यों की ओर सभी ट्रेनों की आवाजाही के लिए जिम्मेदार है।

न्यू बंगाईगांव-धुपधरा 102 कि.मी. लंबे सेक्शन का निर्माण न्यू बंगाईगांव-गोवालपारा-कामाख्या 176 कि.मी. लंबी दोहरीकरण परियोजना के एक हिस्से के रूप में किया गया। इस खंड में 35 बड़े पुलों, 228 छोटे पुलों और 24 रोड अंडर ब्रिज का निर्माण शामिल है। इस परियोजना की लागत 1,962 करोड़ रुपये थी। असम के बंगाईगांव और गोवालपारा जिलों से गुजरते हुए यह पूर्वोत्तर क्षेत्र की ओर ट्रेनों के संचालन के लिए लाभदायक होगा।
गौरीपुर – अभयापुरी 86 कि.मी. नई लाइन सेक्शन न्यू मैनागुड़ी (पश्चिम बंगाल) से जोगीघोपा (असम) 279 कि.मी. लंबी नई रेलवे लाइन परियोजना का हिस्सा है। यह 5 स्टेशनों- आलमगंज, बगरीबारी, बिलासीपारा, चापर और बेचिमारी से होकर गुजरती है।
इस सेक्शन के पूरा होने से असम के धुबड़ी और बंगाईगांव जिलों के अधीन एक बड़े क्षेत्र की आबादी को पहली बार रेल सेवा का लाभ मिला। 1,267 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस परियोजना में 30 प्रमुख पुलों, 305 छोटे पुलों, 03 सुरंगों, 133 रोड अंडर ब्रिजों और 02 रोड ओवर ब्रिजों का निर्माण शामिल है।
विश्व में सबसे बड़ा “ग्रीन रेलवे” बनने की भारतीय रेल की महत्वाकांक्षी योजना के एक हिस्से के रूप में, 2030 तक इसे शून्य कार्बन उत्सर्जन नेटवर्क बनाये जाने की योजना है। नव विद्युतीकृत 381 कि.मी. रानीनगर जलपाईगुड़ी – गुवाहाटी और 131 कि.मी. चापरमुख – सेनचोवा और सेनचोवा – मैराबारी सेक्शन से पूर्वोत्तर से विभिन्न मेट्रो शहरों जैसे नई दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद आदि के लिए ट्रेनों की निर्बाध कनेक्टिविटी हो जाएगी। पूर्वोत्तर की ओर भारी ढुलाई वाली मालगाड़ियों का परिचालन संभव हो पायेगा। जीवाश्म ईंधन की खपत में बचत से ट्रेन परिचालन लागत में भी काफी कमी आई है।



