गटबग से मिली मेटाबोलाइट और आंत के बैक्टीरिया के बीच प्रक्रियाओं की सटीक समझ और होस्ट मनुष्य के स्वास्थ्य पर इनके परिणामों की जानकारी
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$cat_ID is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 378
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$category_count is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 379
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$category_description is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 380
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$cat_name is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 381
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$category_nicename is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 382
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$category_parent is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 383
भोपाल ; मनुष्य की आंत में विभिन्न प्रकार के आहारों और दवाओं को बैक्टीरिया कैसे विखंडित करते हैं इसका पूर्वानुमान लगाने के लिए भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान भोपाल के शोधकर्ताओं ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्रक्रिया विकसित की है। यह टूल वेब आधारित है जो मनुष्य की आंत में पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण में शामिल विभिन्न बैक्टीरिया एंजाइमों, प्रतिक्रियाओं और बैक्टीरिया के बारे में जानकारी देता है।
इस शोध के निष्कर्ष हाल ही में जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में प्रकाशित किए गए। यह शोध पत्र डॉ. विनीत शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, जैविक विज्ञान विभाग, आईआईएसईआर भोपाल और उनके शोध विद्वानों श्री आदित्य मालवे और श्री गोपाल श्रीवास्तव ने मिल कर लिखा है । गटबग https://metabiosys.iiserb.ac.in/qutbug पर उपलब्ध है और उपयोग किया जा सकता है।
मनुष्य की आंत में लाभदायक बैक्टीरिया भी होते हैं जिन्हें सामुहिक रूप से गट माइक्रोबायोम कहते हैं। हम कोई चीज जो मुंह से खाते हैं उस पर होने वाली शारीरिक प्रक्रियाओं में माइक्रोबायोम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मानव शरीर में कोशिकाओं से अधिक संख्या में पेट आंत नली में माइक्रोब्स होते हैं। मनुष्य की आंत के माइक्रोबायोम में बैक्टीरिया की एक हजार से अधिक प्रजातियों रहती हैं।
इनमें 3.3 मिलियन से अधिक यूनिक जीन हैं। ये बैक्टीरिया विभिन्न एंजाइमों का स्राव करते हैं जो मनुष्य के आहार को प्रॉसेस करते हैं और शरीर को विभिन्न मेटाबोलाइट प्रदान करते हैं जो स्वस्थ और शारीरिक गतिविधियों के सुचारु रहने के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, मनुष्य- माइक्रोब का यह संबंध जटिल है और यह माइक्रोबायोम विशाल है। आर फिर लोगों में बैक्टीरिया का यह समूह भिन्न-भिन्न होता है इसलिए यह अध्ययन अधिक चुनौती भरा है। आईआईएसईआर भोपाल की टीम ने इसके लिए एक एआई टूल बनाया है जिसे “गटबग” नाम दिया गया है। यह जैव सक्रिय आहार मोलेक्यूल के साथ-साथ जो दवाइयां हम खाते हैं उन पर काम करने वाले सभी संभावित बैक्टीरिया एंजाइमों का पूर्वानुमान देता है।
शोध की तकनीकी जानकारी देते हुए डॉ. विनीत के. शर्मा, आईआईएसईआर भोपाल ने कहा, “गटबग मशीन लर्निंग, न्यूरल नेटवर्क और केमोइंफॉर्मेटिक के तालमेल से काम करता है। हम ने एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए मनुष्य की आंत के लगभग 700 बैक्टीरिया स्ट्रेन से प्राप्त 363,872 एंजाइमों का डेटाबेस और 3,457 एंजाइम युक्त सब्सट्रेट डेटाबेस का उपयोग किया है।
डॉ. विनीत शर्मा ने यह भी कहा, “गटबग इसकी बेहतर समझ होगी कि हम जो खाना या दवाइयां खाते हैं, उन्हें हमारे पेट में मौजूद बैक्टीरिया कैसे प्रॉसेस करते हैं और इससे हमारा स्वास्थ्य कैसे प्रभावित होता है। इस जानकारी के साथ सही आहार सुनिश्चित करना, नए प्रीबायोटिक्स का विकास करना, न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद तैयार करना आसान होगा। इससे प्रत्येक व्यक्ति के आंत में मौजूद बैक्टीरिया की प्रकृति के आधार पर सटीक दवा देने में भी सुधार होगा। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति विशेष की जरूरत के अनुसार दवा दी जा सकती है।”
इस शोध की खासियत यह है कि इसमें मॉडल को ट्रेन करने के लिए सबसे बड़े एंजाइम सब्सट्रेट डेटाबेस का उपयोग किया गया था। डेटाबेस में आठ आबादियों से प्राप्त आंत के बैक्टीरिया की प्रजातियों की जानकारी रखी गई ताकि यह पता लगे कि आंत के बैक्टीरिया के चलते विभिन्न आबादियों में दवा और आहार के मेटाबॉलिज्म कैसे अंतर होता है।
गटबग विभिन्न मोलेक्यूल के खंडित होने और उनके वाहक बैक्टरिया स्ट्रेन में भी शामिल एंजाइमों का पता लगाने में सक्षम पाया गया। इस टूल का परीक्षण 27 विभिन्न मोलेक्यूल के साथ किया गया जिनमें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, फ्लेवोनोइड्स और दवाइयां भी शामिल थीं और परिणाम भी बहुत सटीक मिले। सफलता की दर 0.78 से 0.97 तक दर्ज की गई।



