छत्तीसगढ़ सरकार ने एंडवचर्स टूरिज्म के नाम पर ज्यादात्तर गुफाओं को पर्यटन स्थल में तब्दील कर दिया है जिसकी वजह से चमगादड़ के प्राकृतिक आशियाने उजड़ते जा रहे हैं।
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पर्यटन और रोजगार का जरिया यहां कुछ मासूम जीवों की जान पर आफत बनाता जा रहा है। जंगलों में इंसानी दखल पहले से ही जीवों के लिए खतरा बना हुआ है। इसके बाद एंडवचर्स टूरिज्म की बढ़ती होड़ और घातक होती जा रही है। देश के ज्यादातर हिस्सों से लगभग विलुप्त हो चुके चमगादड़ अब सीमित जगहों पर ही बचे हैं। अब वहां भी उनके आशियाने पर खतरा मंडराने लगा है।
नेशनल केव रिसर्च एंड प्रोटेक्शन आर्गनाईजेशन की टीम ने हाल में छत्तीसगढ़ की गुफाओं में चमगादड़ों की जनसंख्या और उनके रहन-सहन पर अध्ययन किया। इनके अध्ययन में पता चला है कि छग जंगलों में चमगादड़ों की संख्या तेजी से घट रही है।
टीम के अनुसार राज्य की ज्यादातर गुफाओं में पर्यटन स्थल बनाने से चमगादड़ों का प्राकृतिक आशियाना छिन गया है। बाहर निकलने पर आसपास की फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला धुआं उनकी जान ले रहा है।
आर्गनाईजेशन के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश की ज्यादातर गुफाओं को पर्यटन स्थल में तब्दील कर दिया गया है या किया जा रहा है। इसके कारण चमगादड़ों का प्राकृतिक आशियाना छिन रहा है। चमगादड़ दिन में भी अंधेरे में रहना पसंद करते हैं, इसके लिए वह गुफाओं को चुनते हैं। अब गुफाओं में पर्यटन और शोर-गुल से परेशान होकर चमगादड़ गुफा से बाहर भागने को मजबूर हो चुके हैं।
टीम ने छत्तीसगढ़ में कांकेर जिला अंतर्गत सोनखुदाई गुफा, सरगुजा, सूरजपुर, बस्तर और दंतेवाडा आदि जगहों पर अध्ययन किया है। टीम ने इन जगहों पर मौजूद 14 गुफाओं का विस्तृत सर्वे किया। रायगढ़ ब्लाक लैलुंगा में स्थित कुर्रा गुफा में लगभग 25 हजार चमगादड़ झुंड पाए गए। कुछ झुंड में चमगादड़ कम तो कुछ में बहुत ज्यादा हैं।
संगठन के निदेशक डॉ जयंत विश्वास के अनुसार सर्वे में पता चला है कि चमगादड़ों की संख्या इलाके में तेजी से घट रही है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो बहुत जल्द चमगादड़ यहां से भी विलुप्त हो जाएंगे। नेशनल केव रिसर्च एंड प्रोटेक्शन आर्गनाईजेशन को सर्वे के दौरान चमगादड़ों के अवैध शिकार के भी सुबूत मिले हैं।
सर्वे में टीम को पता चला है कि रायगढ़ जिले के शिंघनपुर गुफा व बस्तर जिले की सभी गुफाओं में रहने वाले चमगादड़ों का स्थानीय लोग शिकार कर रहे हैं। अवैध शिकार भी चमगादड़ों की संख्या घटने की अहम वजह है। इतना ही नहीं गुफाओं के जल प्रवाह प्रदूषित होने का भी बुरा असर पड़ रहा है। टीम ने अपने सर्वे की रिपोर्ट के साथ राज्य सरकार को चमगादड़ों के संरक्षण पर गंभीरता बरतने को पत्र लिखा है।
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार चमगादड़ किसान मित्र होते हैं। ये रात में खेत-खलिहान में उड़ान भरते वक्त कीट-पतंगों को नष्ट करते हैं। इससे किसानों को खेत में रासायनिक कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके अलावा चमगादड़ों के मल-मूत्र में फॉस्फोरस की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इसमें अन्य प्राकृतिक खाद के मुकाबले कहीं ज्यादा उर्वरक क्षमता होती है। इस तरह से चमगादड़ों का होना किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है।


