भारत अमेरिकी संबंधों के नए सोपानो की संभावनाएं
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अमेरिका का भारत के साथ संबंधों का इतिहास बहुत मधुर नहीं रहा है पर अब लगता है कि अमेरिकी संबंधों की विश्वसनीयता की धूल धीरे धीरे हटने लगी हैl पिछले एक दशक से प्रधानमंत्री मोदी के भारत में सत्ता में आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपतियों बराक ओबामा ,डोनाल्ड ट्रंप, और अब जो बायडेन से अच्छे संबंधों के चलते भारत और अमेरिका काफी नजदीक आ गए हैं और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 3 दिन की अमेरिकी स्टेट विजिट से अमेरिका तथा भारत के संबंधों से संदेह के बादल हटने लगे हैंl
इस यात्रा से भारत और अमेरिका की मित्रता एक नई ऊंचाई तथा सोपान को मूर्त रूप देने में कामयाब होने की काफी आशाएं हैंl प्रधानमंत्री ने वहां की आधिकारिक प्रेस वार्ता में स्पष्ट कर दिया है कि भारत टठस्थ तो है पर वह शांति का पक्षधर हैl भारत और अमेरिका के बीच 5 सूत्रों में डायलॉग होंगे जो मुख्यतः स्वास्थ्य सेवाओं, नवीन ऊर्जा, शिक्षा तथा रक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित होंगेl
उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भी प्रधानमंत्री न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के आमंत्रण पर न्यूयॉर्क के संयुक्त राष्ट्र संघ मुख्यालय के समक्ष हजारों की भीड़ में योग अभ्यास करेंगे और इसमें लगभग 180 देश शामिल होने की संभावना है भारतीय सनातन परंपरा की धरोहर योग विद्या का अवधान भारत विश्व को प्रदान करेगा उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने 22 जून 1917 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था और इसके अंतर्गत पूरे विश्व में योग दिवस मनाया जाता है।
यह भारत सरकार की एक बड़ी उपलब्धि हैl इतिहास गवाह है कि 1998 में ऑपरेशन शक्ति के तहत भारत ने अमेरिका के सेटेलाइट को चकमा देकर पोखरण में दूसरा परमाणु परीक्षण किया था जिसके फलस्वरूप अमेरिका ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए थे। उसके पश्चात तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश जूनियर के बीच एक महत्वपूर्ण परमाणु सौदा हुआ था जिसके अंतर्गत भारत और शक्तिशाली देशों में शामिल हुआ था जिसके पास परमाणु शक्ति थीl
इसी तारतम्य में 2014 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ एक रणनीतिक साझेदारी भी हुई थी जिससे भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत हुए थे। 2020 में भारत अमेरिका के संबंधों का एक नवीन सोपान शुरू हुआ था जिसमें भारत के प्रधानमंत्री का स्वागत डोनाल्ड ट्रंप ने ह्यूस्टन में किया था जहां 50,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए थेl प्रधानमंत्री की 21 से 24 जून 23 तक की यात्रा में भारत तथा अमेरिका के बीच कई समझौता होने की संभावना दिखाई दे रही हैl
भारत अमेरिका के साथ जेट इंजन के निर्माण में टेक्नोलॉजी स्थानांतरण का समझौता करेगा यह समझौता एक अरब डॉलर का होगाl इसके अलावा भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका में एक्सपर्ट विशेषज्ञ से भी चर्चा करेंगे जिनमें वीजा की संख्या में बढ़ोतरी और उस पर सरलीकरण पर चर्चा होगी इसके अलावा भारत और अमेरिकी सरकार के बीच हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दखलंदाजी पर नियंत्रण रखने हेतु नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच वन तू वन चर्चा होगीl
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में ही मई में अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की अनेक तारीफ कर उनसे गले लग कर उनसे ऑटोग्राफ चाहने की भी पेशकश की थीl ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्र प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी बॉस कहा थाl उपरोक्त उदाहरण दर्शाते हैं कि भारत की विदेश नीति के नए आयाम स्थापित हुए है भारत के प्रधानमंत्री के अमेरिका दौरे को लेकर अमेरिका में उत्साह को दृष्टिगत रखते हुए भारत को एक उभरती हुई महाशक्ति होने का प्रमाण देती हैl
पिछले कई वर्षों से भारत चीन के साथ सबसे बड़े व्यापारिक संबंध थे लेकिन भारतीय तथा चीन सीमा पर भारी विवाद के कारण भारत ने चीन के साथ व्यापार बंद कर अब अमेरिका के साथ सबसे बड़ी व्यापारिक साझेदारी की हैl भारत के साथ रूस के व्यापारिक संबंध धीरे-धीरे काम हुए हैं रूस से व्यापार संबंध म 67% से कम होकर 45% ही रह गए हैं जबकि अमेरिका तथा भारत के बीच व्यापारिक संबंध काफी हद तक विस्तार पा चुके हैंl
प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा से व्यापारिक तथा रक्षा उपकरणों के समन्वयक व्यापारों की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। यह बात ध्यान देने योग्य है कि भारत की रूस तथा यूक्रेन के साथ युद्ध में तटस्थ भूमिका को पूरी दुनिया ने प्रशंसा की दृष्टि से देखकर काफी तारीफ की है और यही कारण है कि भारत और अमेरिका इस मुद्दे को लेकर नजदीक आए हैं।
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा भारत अमेरिकी संबंधों को व्यापार रक्षा स्वास्थ्य शिक्षा और अंतर्राष्ट्रीय शांति स्थापित करने में कितनी मददगार साबित होगी यह तो भविष्य बताएगा पर भारत को अपने परंपरागत मित्र रूस को किन्हीं भी शर्तों में नाराज नहीं करना होगा क्योंकि भारत को रूस ने चीन तथा पाकिस्तान के युद्ध में भारत के पक्ष में बहुत ज्यादा मदद की थी। अमेरिका से समझौतों के अलावा अब भारत को अमेरिका के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए एक सुरक्षित दूरी रखनी होगी तब जाकर ही भारत एक तटस्थ देश साबित और स्थापित होगा।


