चमकी बुखार से पीड़ित मासूम बच्चों की सबसे ज्यादा मौतें मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में हुई हैं। वहीं चमकी बुखार का प्रकोप मोतिहारी तक पहुंच गया है।
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उत्तर बिहार में हर साल गर्मियों में चमकी यानी दिमागी बुखार (एईएस) की बीमारी बच्चों पर काल बनकर टूटती है। लेकिन इस बार बिहार के कई शहर इसकी चपेट में आ गए हैं। खासकर मुजफ्फरपुर जिले में यह बीमारी खतरनाक रूप धारण कर चुकी है।
एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार से मरने वालों की संख्या बढ़कर 100 पहुंच गई है। मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज व अस्पताल और केजरीवाल अस्पताल में 375 बच्चे एडमिट हैं।
चमकी बुखार से पीड़ित मासूमों की सबसे ज्यादा मौतें मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में हुई हैं। वहीं चमकी बुखार का प्रकोप मोतिहारी तक पहुंच गया है, जहां एक बच्ची बुखार से पीड़ित है।
बिहार में उमस भरी गर्मी के बीच मुजफ्फरपुर और इसके आसपास के इलाकों में ये बुखार बच्चों पर कहर बनकर टूटा है। मौसम की तल्खी और हवा में नमी की अधिकता के कारण संदिग्ध एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम और जापानी इंसेफलाइटिस (JE) नाम की बीमारी पिछले करीब से कहर बरपा रही है।
एक्शन में सरकार
चमकी बुखार के रोकथाम को लेकर अब तक जो भी प्रयास किए गए हैं वो स्थिति से निपटने में नाकाम साबित हुए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ। हर्षवर्धन रविवार को मुजफ्फरपुर पहुंचे। हर्षवर्धन ने कहा, ‘इस बीमारी की पहचान करने के लिए शोध होना चाहिए, जिसकी अभी भी पहचान नहीं है। इस बीमारी के प्रकोप को कंट्रोल करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम करना चाहिए और प्रभावित इलाकों के सभी बच्चों का टीकाकरण किया जाना चाहिए। साथ ही लोगों को बीमारी के बारे में जागरूक करने की जरूरत है।’

वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इलाके में चिलचिलाती गर्मी, नमी और बारिश के ना होने के चलते लोग हाइपोग्लाइसीमिया के कारण लोगों की मौत हो रही है। एसईएस से पीडि़त अधिकांश बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी अचानक शुगर की कमी और कुछ बच्चों के शरीर में सोडियम (नमक) की मात्रा भी कम पाई जा रही है।
हालांकि स्वास्थ्य मंत्री ने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार स्थिति को नियंत्रित करने, उचित उपचार करने और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए राज्य को वित्तीय मदद के साथ सभी संभव मदद करेगी। वहीं दूसरी ओर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रत्येक मृतक के परिजन को चार-चार लाख रुपये का मुआवज़ा देने की घोषणा की है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ डॉक्टरों को भी बीमारी से निपटने के लिए हरसंभव उपाय करने के निर्देश दिए।
राज्य सरकार जागी लेकिन देर से
बिहार में इस समय चमकी बुखार का प्रकोप अपने चरम पर है। सरकार की आंखे तक खुलीं जब एक ही दिन में एक ही जिले में 25 बच्चों की मौत हो गई। अस्पताल के सभी पीआईसीयू यूनिट भरे हुए हैं। बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ती चली जा रही है। इस बीमारी ने एक ही दिन में एक ही जिले मुजफ्फरपुर में 25 बच्चों को निगल लिया। सभी बच्चों की उम्र 4 से 15 साल के बीच बताई जा रही है। इस बीमारी का प्रकोप उत्तरी बिहार के सीतामढ़ी, शिवहर, मोतिहारी, वैशाली में जारी है। नीतीश कुमार का कहना है कि बुखार से बच्चों की मौत का मामला गंभीर है।
इस साल जनवरी से कुल 179 संदिग्ध एईएस मामले सामने आए हैं। इस बीच यह भी सवाल उठने लगे हैं कि कहीं इन बच्चों की मौत के पीछे लीची तो वजह नहीं है? मौतों के कारणों की जांच के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सात सदस्यीय केंद्र सरकार की टीम ने मुजफ्फपुर का दौरा किया है। बिहार के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि अधिकांश मौतें हाइपोग्लाइसीमिया (शरीर में अचानक शुगर की कमी) के कारण हुई हैं। इसका कारण इस इलाके में चिलचिलाती गर्मी, नमी और बारिश का न होना बताया जा रहा है।
बच्चों की मौत, लीची पर दोष?
पहले की रिपोर्टों में कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एईएस के कारण हो रही इन मौतों के पीछे लीची का होना बताया था। कहा जा रहा है कि मुजफ्फरपुर के आस-पास उगाई जाने वाली लीची में कुछ जहरीले तत्व हैं, जो इस बीमारी और मौतों का कारण हैं। बिहार के स्वास्थ्य अधिकारियों ने माता-पिता को सलाह दी है कि वे अपने बच्चों को खाली पेट लीची न खिलाएं और आधा पका हुआ या बिना लीची वाला भोजन ही करें।
गर्मियों के दौरान इस इलाके के गरीब परिवारों से संबंधित बच्चों को आमतौर पर नाश्ते के लिए सुबह से ही लीची खाने को दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि यह फल बच्चों में घातक मेटाबॉलिक बीमारी पैदा करता है, जिसे हाइपोग्लाइसीमिया इंसेफेलोपैथी कहा जाता है।
लीची में मिथाइल साइक्लोप्रोपाइल-ग्लाइसिन (एमसीपीजी) नाम का एक केमिकल पाया जाता है। जब शरीर में देर तक भूखे रहने और पोषण की कमी के कारण शरीर में शुगर लेवल कम हो जाता है तो यह मस्तिष्क को प्रभावित करता है।
आपको बता दें कि एक जून के बाद से एसकेएमसीएच अस्पताल में 197 बच्चों को भर्ती किया गया और केजरीवाल अस्पताल में 91 बच्चों को। इन बच्चों में ज्यादातर को हाइपोग्लाइसेमिया से पीड़ित पाया गया। उत्तर बिहार इलाके में हर साल गर्मियों में चमकी यानी दिमागी बुखार (एईएस) की बीमारी बच्चों पर काल बनकर टूटती है। इस साल यह जानलेवा बीमारी महामारी का रूप लेती जा रही है। उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी और वैशाली जिले में इस बीमारी का ज्यादा असर दिख रहा है।
गौरतलब है कि एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम और जापानी इंसेफलाइटिस को बिहार में ‘चमकी’ बुखार के नाम से जाना जाता है। इससे पीड़ित बच्चों को अचानक तेज बुखार आता है और बच्चे बेहोश हो जाते हैं।


