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भोपाल के प्रमुख रेलवे स्टेशन पर रखी ज्यादातर वॉटर कूलर मशीनें शोपीस बनकर रह गई है। इनमें से ठंडा पानी तो छोड़िये गरम पानी भी नहीं टपक रहा है। वॉटर कूलरों से पानी नहीं निकलने के कारण बोतलबंद पानी बेचने वालों की चांदी हो रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि बोतलबंद पानी बेचने वालों से मिलीभगत के चलते ही वॉटर कूलरों से पानी नहीं निकलता है। ये काम रेलवे के अधिकारियों की मिलीभगत से बढिया चल रहा है और यात्रियों की जेबें हल्की हो रही है।
भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म-2 पर लगाई गई वॉटर कूलर मशीन में से गरम पानी भी नहीं निकल रहा है था। शुक्रवार दोपहर 2.28 बजे कुशीनगर एक्सप्रेस आकर खड़ी हुई। यात्री ट्रेन से उतरते ही वाटर कूलरों की तरफ दौड़े। उनके हाथों में खाली बोतलें थीं। पानी भरने के लिए वाटर कूलर में लगीं टोटियों में बोतलें लगाईं और ऊपर से प्रेस किया तो पानी ही नहीं निकल रहा था। इसी बीच ट्रेन के चलने का समय हो रहा था। यात्री नाराज हो गए, उनका कहना था कि ये वाटर कूलर है या खाली ढांचा, इसमें ठंडा तो छोड़िए साधारण पानी भी नहीं निकल रहा है। हकीकत भी यही थी। प्लेटफार्म-2 पर इटारसी छोर की तरफ सभी वाटर कूलर बंद थे।
कुशीनगर एक्सप्रेस की तरफ प्रत्येक ट्रेन से भोपाल पहुंचने वाले यात्रियों को ठंडा पानी नसीब नहीं हुआ और वे भोपाल स्टेशन से प्यासे गुजर गए। यह समस्या एक दिन की नहीं है, हर दिन प्लेटफार्मों पर दबाव बढ़ने के बाद यह स्थिति बन रही है। फिर भी रेलवे के अफसरों को फिक्र नहीं है।
ठंडे पानी की किल्लत एक दिन की नहीं है। रोजाना भोपाल स्टेशन के प्लेटफार्मों पर दबाव बढ़ते ही वाटर कूलर पानी उगलना बंद कर देते हैं। इसके बावजूद भी रेलवे के अफसरों को फिक्र नहीं है। हाल ही में नए डीआरएम उदय बोरवणकर व सीनियर डीसीएम अनुराग पटेरिया ने स्टेशन का निरीक्षण किया था। डीआरएम ने कहा था कि साफ-सफाई समेत सभी सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए। सीनियर डीसीएम ने भी निरीक्षण में यात्री सुविधाओं पर फोकस किया था। इन दोनों निरीक्षणों का असर नहीं दिख रहा है। अभी ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ चल रही है।
एक अनुमान के मुताबिक 24 घंटे में 50 हजार से अधिक यात्री भोपाल स्टेशन से सफर शुरू करते हैं और इतने यात्री अन्य स्टेशनों से भोपाल स्टेशन पर उतरते हैं। इनमें से 10 हजार यात्री वाटर कूलरों से पानी भरते हैं, जो परेशान हो रहे हैं।
मंडल रेलवे उपयोगकर्ता सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य पंकज चतुर्वेदी का कहना है कि अफसर ठंडे पानी की व्यवस्था न कर यात्रियों को बोतलबंद पानी खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। हर गर्मी के सीजन में ऐसा होता है, जो सोची समझी साजिश का हिस्सा है। भोपाल स्टेशन पर कुछ लोग बोतलबंद पानी खपाने में लगे हुए हैं। रोजाना लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं।



