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आज पूरे विश्व में विश्व आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है। ऐसे में हम यहां उनसे जुड़ी कुछ अनूठी मान्ताओं का जिक्र कर रहे हैं। आम तौर पर आपने विधवा महिलाओं को सफेद वस्त्र में देखा होगा, लेकिन एक ऐसा क्षेत्र है जहां दुल्हन को सफेद कपड़ों में विदा किया जाता है।
लेकिन मंडला जिले के रामनगर के पास स्थित चौगान की मढ़िया आस्था का केन्द्र है। यह गौंड़ आदिवासियों के तीर्थ के रूप में विख्यात है। यहां विराजने वाली देवी को प्रसन्न करने के लिए भव्त श्वेत वस्त्र धारण करते हैं। वहीं यहां से जुड़ी आस्था के कारण ग्रामीण अपनी बेटी को भी सफेद साड़ी में विदा करते हैं।
जानकारी के अनुसार चौगान की मढ़िया के पंडा पूजन-पाठ के दौरान सफेद कपड़े पहनते हैं। यहां पहुंचने वाले भव्त भी सफेद कपड़ों धारण करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफेद रंग शांति का प्रतीक है। इसलिए इस कपड़े का प्रयोग किया जाता हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफेद वस्त्र शुभ माने जाते हैं। इसलिए इनका प्रयोग वैवाहिक आयोजन में भी किया जाता है। चौगान की मढ़िया गोंड आदिवासियों की आस्था का केन्द्र है। रामनवमीं के बाद विशेष मुहूर्त में यहां जवारे का विसर्जन किया जाता है। इस आयोजन में शामिल होने के लिए अन्य प्रदेश से भी लोग आते हैं।
विधवा विवाह के
लिए यह होती है रस्म
देश में तरह-तरह
की मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं। हम ऐसी ही एक अजीब परंपरा के बारे में आपको
बता रहे हैं। मध्य प्रदेश के मंडला, बालाघाट, डिंडौरी शहडोल, उमरिया जिले में बसे बैगा आदिवासियों की
कुछ परंपराएं ऐसी हैं, जिनके बारे में सुनकर आप चौंक जाएंगे।
बैगा चक में रहे रहे बैगाओं में महिलाओं को पति की मौत के बाद दूसरी शादी करने की
अनुमति होती है। लेकिन दूसरी शादी से पहले महिलाओं को यहां प्रचलित परंपरा से
गुजरना पड़ता है।
स्वेच्छा से वर चुनने का अधिकार
मंडला जिले के मवई निवासी छोटे लाल बैगा बताते हैं कि उनके समाज में महिलाओं को दूसरी शादी करने से पहले पवित्र किया जाता है। इस प्रप्रिया के दौरान महिला को गरम पानी से नहलाया जाता है। गरम पानी से स्नान करने के बाद महिला पवित्र हो जाती है। इसके बाद वह अपनी स्वेच्छा से अपना वर चुनती है। रीति-रिवाज के अनुसार विधवा होने पर महिला की उसके देवर से शादी कराई जाती है। यदि महिला देवर के अलावा किसी और के नाम की चूड़ी पहनती है तो उसे उसके साथ विवाह करने की अनुमति दी जाती है, लेकिन विधवा विवाह में पहले देवर का अधिकार माना जाता है।
महिला कर सकती है संबंध विच्छेद
बैगा जनजाति की महिलाओं को कई अधिकार दिए गए हैं। इसके तहत यदि महिला को पति का रवैया पसंद नहीं आए तो वह उससे संबंध विच्छेद कर सकती है। इसके लिए उसे अपने घर वालों को राजी करना होता है। इसके लिए सामाजिक बैठक आयोजित की जाती है। जिसमें संबंध विच्छेद का निर्णय लिया जाता है। समाज के निर्णय के अनुरूप ही महिला बिना तलाक लिए दूसरी शादी करती है।


