उत्तर प्रदेश में हर साल बाढ़ से होने वाली तबाही को रोकने के वास्ते राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण लखनऊ के उपाध्यक्ष ले. ज. आर पी साही की अध्यक्षता में मानसून पूर्व सरकारी एवं गैरसरकारी संगठनों की एक बैठक आयोजित की गई।
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$cat_ID is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 378
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$category_count is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 379
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$category_description is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 380
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$cat_name is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 381
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$category_nicename is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 382
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$category_parent is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 383
मानसून पूर्व सरकारी एवं गैरसरकारी संगठनों की इस बैठक में मुख्य रूप से मौसम, पशुपालन, रिमोट सेंसिंग, कृषि विभाग, यूनिसेफ सहित 22 संस्थाओं ने भाग लिया। चर्चा के मुख्य विन्दुओं में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण तथा इन्टर एजेंसी ग्रुप उत्तर प्रदेश के मध्य आपदा खतरा न्यूनीकरण तथा प्रतिउत्तर को लेकर समन्वय के सन्दर्भ मे चर्चा की गयी।
इस चर्चा में समुदाय आधारित आपदा प्रबन्धन के छोटे छोटे सफल प्रयासों के संकलन, संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए बड़े स्तर पर सम्भावित घटनाओं हेतु समन्वित प्रयास पर चर्चा हुई।
उड़ीसा के फैनी साइक्लोन का उदाहरण रखते हुए सरकारी या गैरसरकारी संस्थाओं के सहयोग से जो ऐतिहासिक कार्य किया गया है और जनधन की न्यूनतम हानि से प्रेरणा लेकर भविष्य में उत्तर प्रदेश में भी गैरसरकारी संस्थाओं के साथ समन्वय की कल्पना की गयी।
इस समन्वय मे राज्य, जिला, तहसीलऔर ग्राम पंचायत स्तरों पर संयुक्त प्रयासों, अच्छे अनुभवों को साझा करना तथा विजन बिल्डिंग को ध्यान में रखकर नियोजन की प्रक्रिया पर भी बल दिया गया जिससे प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नेतृत्व में समन्वित प्रयास हेतु सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं की साझा रणनिति तैयार हो, जिसमें आंकड़ों का आदान प्रदान, कौशल विकास, क्षमता वृद्धि, आवश्यक संसाधनों की पूर्ण जानकारी एवं उपयोग सम्भव हो।
आगामी दिनों मे उत्तरप्रदेश में ‘‘बाढ़ का पानी एक वरदान है या श्राप’’ विषयक कार्यशाला आयोजित करने पर भी चर्चा हुई ताकि वर्ष जल का सही ढ़ंग से संचयन सम्भव हो सके। बाढ़ के सन्दर्भ में राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण ने पिछले दिनो एक कार्ययोजना जारी किया जिसके बारे में उपाध्यक्ष ने विस्तार से बताया और सभी विभागों एवं संगठनों से सहयोग की अपेक्षा की।
प्रत्येक जिलों में उपलब्ध आपदा प्रबन्धन योजना को अधिक उपयोगी बनाने के लिए समीक्षा बैठको के आयोजन पर भी चर्चा की गयी। विशेषज्ञों ने बताया कि बुन्देलखण्ड के 7 जिले तथा मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों में 80 प्रतिशत कुएंऔर 60 प्रतिशत हैण्डपम्प अनुपयोगी हो गये है जिस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने सूखा क्षेत्र मे सहयोग के लिए समस्त हितभागियों को पत्र लिखा है जिसका लाभ प्रत्येक नागरिक को पहुँचाने हेतु हम सभी को प्रयास करने की आवश्यकता है।
बहराइच और कुशीनगर का उदाहरण देते हुए बताया गया कि बाढ़ के बाद विस्थापित होने से लगभग 27000 परिवारों की पहचान खो गयी जिन्हें किसी भी प्रकार के सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने की सम्भावना कम प्रतीत हो रही है।
कृषि विशेषज्ञों ने कम वर्षा के कारण होने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए किसानो के लिए वैकल्पिक फसल, योजना हेतु नियोजन की बात कही तथा स्थानआधारित उपयोगी साहित्य/एडवाइजरी का सुझाव दिया।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों मे अनियोजित भूजल दोहन के कारण फ्लोराइड, आर्सेनिक, आयरन सहित मेटल और मिनरल की पेयजल में बढ़ती हुई मात्रा, समुदाय मे चिन्ता का कारण बनती जा रही है। यह भी सम्भव है कि जे0ई0 और ए0ई0एस0 जैसी बीमारियां जो गोरखपुर और मुजफरपुर मे कोहराम मचा रही हैं, के नियंत्रण में आने वाली बाधाएं भी हमारी कम समझ और अनियोजित शोध का परिणाम है।


