ब्रिक्स देशों के नेताओं जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर बैठक कर वैश्विक समस्याओं पर चर्चा की। मोदी ने कहा- तेजी से बदलती तकनीक और जलवायु परिवर्तन मौजूदा और आने वाली पीढ़ियों के लिए चुनौती।
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पीएम मोदी जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जापान के ओसाका में हैं। जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देशों के नेताओं ने मुलाकात की। मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति चुने जाने पर सिरिल रामाफोसा को बधाई दी। इस दौरान उन्होंने ब्राजील के राष्ट्रपति चुने जाने पर जायर बोल्सोनरो को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स परिवार में आपका स्वागत है। इस बैठक में भारत ने आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया।

ब्रिक्स नेताओं के साथ अनौपचारिक बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि आज हमारे सामने तीन प्रमुख चुनौतियां हैं –
- विश्व की अर्थव्यवस्था में मंदी
- अनिश्चित नियमों पर आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था पर एक तरफा निर्णय-प्रतिद्वंद्विता
- आतंकवाद
इससे पहले जी-20 शिखर सम्मेलन के मार्जिन पर ब्रिक्स नेताओं की बैठक के दौरान अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर एकतरफा फैसले और प्रतिद्वंद्विता को प्रमुख चुनौती करार दिया।
इसके साथ ही उन्होंने विश्व जगत को आगाह करते हुए कहा कि आतंकवाद मानवता के लिये सबसे बड़ा खतरा है जो न सिर्फ बेगुनाहों की हत्या करता है बल्कि आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। हमें आतंकवाद और नस्लवाद के समर्थन के सभी माध्यमों को रोकना होगा।
‘एक साथ काम करने की जरूरत’
बैठक में मोदी ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को मजबूत करने, संरक्षणवाद से लड़ने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आतंकवाद से लड़ने के लिए हमें एक साथ काम करने की जरूरत है। उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता, गिरावट और संसाधनों की कमी को लेकर चर्चा की। साथ ही मोदी ने विकसित देशों को ध्यान दिलाते हुए यह भी कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में संसाधनों की घोर कमी है। ढ़ांचागत निवेश में ही करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर (करीब 90 लाख करोड़ रुपए) की कमी आई है।

इसके साथ ही उन्होंने विकास को स्थाई और सर्वसमावेशी बनाने पर जोर दिया। मोदी ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक जैसे डिजिटलाइजेशन और जलवायु परिवर्तन मौजूदा और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक चुनौती है। विकास तभी सार्थक है जब यह असमानता को कम करे और सशक्तिकरण में योगदान करे।
पीएम मोदी ने ब्रिक्स देशों की बैठक में दिए ये पांच सुझाव
- ब्रिक्स देशों के बीच तालमेल से एकतरफा फैसलों के दुष्परिणों का निदान कुछ हद तक हो सकता है। हमें रिफॉर्म मल्टीमैटरिलिज्म के लिए अंतर्राष्ट्रीय, वित्तीय और व्यापारिक संस्थाओं तथा संगठनों में आवश्यक सुधार पर जोर देते रहना होगा। निरंतर आर्थिक विकास के लिए आवश्यक ऊर्जा के संसाधन, जैसे तेल और गैस कम कीमतों पर लगातार उपलब्ध रहने चाहिए।
- न्यू डेवलेपमेंट बैंक द्वारा सदस्य देशों के भौतिक और सामाजिक इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा रिन्यूवल एनर्जी कार्यक्रमों में निवेश को और प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
- कोलिशियन और डिजास्टर रेजिनियन इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए भारत की पहल अल्पविकसित और विकासशील देशों को प्राकृतिक आपदा का सामना करने के लिए उचित इंफ्रास्ट्रक्चर करने में सहायक होगी। आपसे इस कोलिशियन में शामिल होने के लिए आवाह्न करता हूं।
- विश्वभर में कुशल कारीगरों का आवागमन आसान होना चाहिए, इससे उन देशों को भी लाभ होगा, जहां आबादी का एक बड़ा हिस्सा कामकाजी की उम्र पार कर चुका है।
- भारत ने हाल ही में आतंकवाद पर एक ग्लोबल कांफ्रेंस का आह्वान किया है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए ज़रूरी सहमति का अभाव हमें निष्क्रिय नहीं रख सकता। आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष को प्रमुख प्राथमिकताओं में जगह देने के लिए मैं ब्राज़ील की सराहना करता हूं।
गौरतलब है कि डॉनाल्ड ट्रंप की ओर से अमेरिकी उत्पादों पर उत्पाद शुल्क घटाने की चेतावनी के बीच यह बैठक बेहद अहम थी। डॉनाल्ड ट्रंप ने जापान पहुंचने से पहले ही भारत को लेकर कड़ा ट्वीट कर अपना अजेंडा स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा था, ‘मैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत की ओर से बीते कई सालों से काफी अधिक टैरिफ लगाए जाने और हाल ही में इसे और बढ़ाने को लेकर बात करूंगा। यह अस्वीकार्य है और बढ़ा टैरिफ वापस लिया जाना चाहिए।’


