राज्य में लगातार बारिश से बिगड़ते हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने जहां आज राज्य के सभी स्कूलों में अवकाश की घोषणा की है.
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इन दिनों देश में भारी बारिश और बाढ़ से कईं राज्य त्राही-त्राही करते नजर आ रहे हैं। इनमें दक्षिण भारत के राज्य केरल, आंध्र प्रदेश भी शामिल हैं जहां बाढ़ के हालातों ने लोगों को जीना मुहाल कर दिया है। इतना ही नहीं लोगों को अभी इस बारिश से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। मौसम विभाग ने अगले दो दिन केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक के अलावा तटवर्ती इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
केरल में हाल बेहाल
खराब मौसम और भारी बारिश की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य केरल है जहां बाढ़ के साथ ही भूस्खलन भी हो रहे हैं। राज्य के पुथुमाला और वायनाड में गुरुवार को हुए भूस्खलन की वजह से हालात बिगड़ गए। हालांकि, इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और भूस्खलन के बाद रेस्कूय ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। वहीं कोचीन एयरपोर्ट पर 11 अगस्त तक सारे ऑपरेशन रद्द कर दिए गए हैं। राज्य डिजास्टर मैनेजमेंट की टीम ने कुल 22,165 लोगों को सुरक्षित निकाल कर 315 राहत कैंपों में पहुंचाया है।
बाढ़ से महाराष्ट्र के अनेक जिलों में त्राहि-त्राहि, कई लोगों की मौत
मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक विकट स्थिति बने रहने का अनुमान जताया है। एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन लगातार बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने में जुटे हुए हैं। 1 लाख 40 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया।

भारी बारिश के चलते महाराष्ट्र के अनेक क्षेत्रों में बाढ़ के चलते त्राहि-त्राहि मची है। राज्य में बाढ़ के कारण अब तक 16 लोगों के मारे जाने की सूचना है, जबकि इस प्राकृतिक प्रकोप के चलते कई लोग घायल है। राज्य के कई जिले भीषण बाढ़ की चपेट में है। अकेले पुणे संभाग में ही अभी तक 1 लाख 40 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं बाढ़ के चलते पुणे में 4, सतारा 7, सांगली और कोल्हापुर में दो-दो और सोलापुर एक मौत की खबर है।
वहीं महाराष्ट्र के पुणे और बंगलोर हाइवे पर तकरीबन 5 हजार ट्रकों की कतार है, हाइवे पर तकरीबन 4 से 5 फुट तक पानी होने की वजह से यातायात अवरूद्ध है। राधानगरी बांध के 5 दरवाजे खोले गए। बांध में तकरीबन 10 से 12 फीट अधिक पानी होने की वजह से इन दरवाजों को खोला गया है। पानी बढ़ने और लगातार बरसात होने से कोयना और कृष्णा नदी में बाढ की स्थिती गंभीर होती जा रही है। उधर सांगली के कई गांव मुख्य संपर्क मार्ग से कट गए हैं। कई इलाकों में पानी प्रवेश करने की वजह से लोग घर के सामान और जानवरों को लेकर मुख्य सडक पर ही अपना बसेरा बना रखा है।
पिछले चार दिनों से बरसात और इलाके में बाढ की स्थिति से अपने जान माल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इलाके में एनडीआरएफ सेना, नौसेना और अन्य सुरक्षा दल की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की की कोशिश लगातार जारी है।

पुणे के डिविजनल कमिश्नर दीपक महेस्कर के मुताबिक, ‘डिविजन के पांच जिलों (सोलापुर, सांगली, सतारा, कोल्हापुर और पुणे) से अभी तक 1 लाख 40 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।’ राहत और बचाव कार्य में 16 बटालियन और 12 इंजीनियर टास्क फोर्स के 1 हजार जवान समेत टेरिटोरियल आर्मी की 4 टीमें, एनडीआरफ की 10 टीमें सतारा, कोल्हापुर और सांगली में लगी हैं। टेरिटोरियल आर्मी की 4 टीमों के अलावा 89 नाव, नौसेना और भारतीय तटरक्षक की टीम भी बचाव कार्य में जुटी हैं।
कोल्हापुर जिले के सभी स्कूल कॉलेजों को बंद रखा गया है। मौसम विभाग द्वारा पुणे जिले की तीन तहसीलों और सांगली की पांच तहसीलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के सांगली जिले में कुल 213 प्रतिशत बारिश हुई है जबकि सतारा में 173 और पुणे में 166 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। कोल्हापुर में यह स्तर 116 प्रतिशत और सोलापुर में 78 प्रतिशत रहा है।

पुणे, सतारा, सांगली और कोल्हापुर के सभी बांध पूरी तरह से भर चुके हैं। पुणे जिले में नदी के किनारे के सभी गांवों को अलर्ट कर दिया गया है। बाढ की स्थिति के चलते महाराष्ट्र के दूध भंडार माने जाने वाले ये तीन जिले खासकर कोल्हापुर से मुंबई, पुणे आने वाले दूध की आपूर्ती पर भी बडा असर पड़ा है। गोकुल दूध संघ ने दूध लेना बंद रखा है और वारणा और अन्य स्थानीय दूध संघ भी दूध की आपूर्ति मुंबई तक नहीं कर पा रहे हैं।
पुणे-बैंगलौर हाईवे पर लगभग छह फीट पानी जमा है। उधर कोल्हापुर जिले के राधानगरी डैम के 6 दरवाजे भी बुधवार को खोल दिए गए। इसके कारण जिले के अंदरूनी इलाके में भी बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। भारी बारिश और पानी भरने और भूस्खलन के चलते सेंट्रल रेलवे के मुंबई पुणे डिविजन और साउथ वेस्टर्न रेलवे के मिराज और लोंडा सेक्शन पर कई ट्रेनों को रोका गया है, डाईवर्ट किया गया है। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एमएआरडी) ने बाढ़ के चलते अपने आंदोलन को अस्थाई रूप से रोक दिया है।


