भारत ने पिछले पांच वर्षों के दौरान अनेक युगांतकारी नीतियां बनाई हैं ताकि देश में रहने वाले 1.3 अरब से भी अधिक लोगों के लिए ऊर्जा न्याय को सुनिश्चित किया जा सके।
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अबू धाबी में 8वीं एशियाई मंत्रिस्तरीय ऊर्जा गोलमेज बैठक के आरंभिक सत्र को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अब हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि यह बदलाव ‘ऊर्जा न्याय’ में निहित हो, जिसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के ऊर्जा विजन के सबसे महत्वपूर्ण घटक के रूप में किया है।
प्रधान ने कहा कि उभरता एशिया आगामी 20 वर्षों में वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगा। वैश्विक संदर्भ में विकासशील अर्थव्यवस्थाएं वृद्धिशील वैश्विक विकास में 80 प्रतिशत योगदान करेंगी। इसमें भारत और चीन का योगदान 50 प्रतिशत से भी अधिक होगा। प्रधान ने कहा, ‘ऊर्जा पहुंच एवं जीवन यापन के उच्च मानक के साथ-साथ विकासशील देशों में बेहतर समृद्धि की बदौलत ही ऊर्जा की ज्यादा मांग सुनिश्चित होगी। ऊर्जा में दक्षता और स्वच्छ प्रौद्योगिकी के मद्देनजर कम आमदनी और प्रति व्यक्ति कम ऊर्जा खपत वाले देशों के लिए यह आवश्यक है कि उनकी पहुंच प्रौद्योगिकी और पूंजी तक निश्चित रूप से हो।

इससे जीवाश्म ईंधन की आपूर्ति एवं कीमत के लिए अल्पकालिक कदम उठाने की तुलना में बेहतर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।’ उन्होंने कहा कि अपर्याप्त एवं असंतुलित ऊर्जा अवसंरचना के कारण एशियाई क्षेत्र के 400 मिलियन लोगों को बिजली की सुविधा प्राप्त नहीं है। इसी तरह गांवों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ बिजली नहीं मिल पा रही है। अतः सुरक्षित, स्थिर, किफायती और बेहतर ऊर्जा सभी देशों की सरकारों का एक महत्वपूर्ण दायित्व है।
भारत के ऊर्जा विजन के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि इसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री ने वर्ष 2016 में की और यह ऊर्जा पहुंच, ऊर्जा दक्षता, ऊर्जा निरंतरता और ऊर्जा सुरक्षा नामक चार स्तम्भों पर आधारित है। उन्होंने कहा, ‘पिछले पांच वर्षों के दौरान ऊर्जा नियोजन से जुड़े हमारे एकीकृत दृष्टिकोण के तहत भारत ऊर्जा न्याय के साथ ऊर्जा पहुंच पर विशेष जोर दे रहा है जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है।’ भारत ने पिछले पांच वर्षों के दौरान अनेक युगांतकारी नीतियां बनाई हैं ताकि देश में रहने वाले 1.3 अरब से भी अधिक लोगों के लिए ऊर्जा न्याय को सुनिश्चित किया जा सके।
बाद में प्रधान ने कहा, ‘भारत में हमें 1.3 अरब से भी अधिक लोगों के लिए ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ानी है जिनकी प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत वैश्विक औसत से कम है। अब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है और इसकी ऊर्जा मांग दुनिया की सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। कुल वैश्विक प्राथमिक ऊर्जा मांग में हमारी हिस्सेदारी वर्ष 2040 तक दोगुनी होकर 11 प्रतिशत हो जाएगी। हम देश में ऊर्जा मांग में इसी तरह की वृद्धि को ध्यान में रखते हुए तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए ऊर्जा क्षेत्र में समान अनुपात में व्यापक निवेश आवश्यक है।’

मंत्री ने कहा 2020 तक बीएस-iv से सीधे बीएस-vi ईंधन को अपनाने जा रहे हैं। भारत वर्ष 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करके गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर हो रहा है। हमने 16,000 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी गैस पाइपलाइन का निर्माण किया है और 11,000 किलोमीटर लंबी अतिरिक्त गैस पाइपलाइन का निर्माण कार्य जारी है।’ उन्होंने उपस्थित लोगों को बताया कि भारत जैव ईंधन से एक विमान की उड़ान संचालित कर अगस्त 2018 में चुनिंदा राष्ट्रों के प्रतिष्ठित क्लब में शामिल हो गया।
अबू धाबी में आयोजित 8वीं एशियाई मंत्रिस्तरीय ऊर्जा गोलमेज बैठक के दौरान श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने अलग से अन्य देशों के कई राजनेताओं के साथ भी भेंट की।


