किसी अप्रिय घटना को टालने के लिए पुलिस बल ने पांच सूत्री परामर्श भी जारी किया है जिसमें कहा गया है कि एनआरसी में नाम नहीं आने का मतलब यह नहीं है कि अमुक व्यक्ति को विदेशी घोषित कर दिया गया। अंतिम एनआरसी से बाहर रह गया हर व्यक्ति विदेशी न्यायाधिकरण में अपील कर सकता है।
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आज से महज एक दिन बाद यानी 31 अगस्त को राष्ट्रीय नागरिक पंजी (नेशनल सिटिजन रजिस्टर) का प्रकाशन होगा। किसी भी शख्स को भारतीय या गैर-भारतीय बताने वाली पहली सूची प्रकाशित होने के लगभग एक साल बाद आने वाली अंतिम एनआरसी सूची का प्रकाशन होते ही यह तय हो जाएगा कि पिछले साल के मसौदे से बाहर हुए 40 लाख लोगों में से कितने इस एनआरसी लिस्ट में जगह बना पाते हैं और कितने नहीं।
इसी के मद्देनज़र असम में एनआरसी के प्रकाशन के दौरान शांति-व्यवस्था कायम रखने के लिए सुरक्षा कड़ी कर दी गयी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में धारा 144 लगायी गयी है। एनआरसी को राज्य में मूल लोगों को अवैध बांग्लादेशियों से बचाने के लिए सुरक्षा कवच और असमी पहचान के सबूत के रूप में देखा जा रहा है।
असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोगों से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने से पहले असम से केंद्रीय सुरक्षा बलों की 55 कंपनियों को हटाया गया था। हालांकि अब सरकार के अनुरोध पर 51 कंपनियों को तैनात किया गया है।

दूसरी ओर असम पुलिस और सरकार ने राज्य में लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस प्रशासन ने लोगों से कहा है कि कुछ असामाजिक लोग एनआरसी को लेकर भ्रम फैला रहे हैं, उन पर ध्यान न दें।
असम सरकार ने कहा है कि राज्य का अंतिम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) कल प्रकाशित हो रहा है और इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। राज्य के गृह और राजनीति विभाग के अपर मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्ण के मुताबिक, ‘पूरे राज्य में पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। जिन लोगों के नाम अंतिम सूची में नहीं होंगे, उन्हें विदेशियों से संबद्ध अधिकरणों में अपील का अवसर दिया जायेगा।’
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत सरकार ने हाल में गजट अधिसूचना के ज़रिये अपील करने की अवधि साठ दिन से बढ़ाकर 120 दिन कर दी है, इसलिये विदेशियों से संबद्ध अधिकरणों के पास अपील किये जाने के लिये पर्याप्त समय होगा। विदेशी अधिकरण साठ दिन के अंदर दावों का निपटान करेंगे।
कुमार संजय ने कहा कि अगले महीने की पहली तारीख से नौगांव, तेजपुर, गुवाहाटी, बोंगाईगांव, धुबरी और नलबाड़ी जिलों में विदेशियों से संबद्ध 200 अधिकरण काम करना शुरू कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए कानूनी सहायता प्रकोष्ठ भी बनाए गए हैं। साथ ही अफवाहें फैलाने से रोकने के लिए पुलिस सोशल मीडिया पर निगरानी रख रही है।
वहीं दूसरी ओर असम पुलिस ने लोगों से समाज में भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश में जुटे कुछ तत्वों द्वारा फैलायी जा रही अफवाहों में नहीं आने अपील की। पुलिस ने कहा कि सरकार ने उन लोगों के लिए समुचित सुरक्षा मानकों की व्यस्था की है जिनका नाम अंतिम एनआरसी में नहीं आया हो।
गौरतलब है कि असम पुलिस ने गुरुवार को ट्वीट किया कि सरकार ने उन लोगों के लिए समुचित सुरक्षा मानक की व्यवस्था की है जिनका नाम यदि अंतिम एनआरसी में नहीं आया। अफवाहों पर ध्यान मत दें, कुछ तत्व समाज में भ्रम पैदा करने की चेष्टा कर रहे हैं। नागरिकों की सुरक्षा हमारी शीर्ष प्राथमिकता है।
इस बीच असम सरकार ने एनआरसी के प्रकाशन, उससे पहले और बाद के लिए सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम किये हैं। मुख्यमंत्री ने 23 अगस्त को यहां सभी जिलों के उपायुक्तों एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ एक बैठक में कानून व्यवस्था की समीक्षा की थी।
आपको यह भी बता दें कि यह फाइनल एनआरसी लिस्ट 31 जुलाई को प्रकाशित होनी थी, लेकिन राज्य में बाढ़ के कारण एनआरसी अथॉरिटी ने इसे 31 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया था। इससे पहले 2018 में 30 जुलाई को एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट आया था। लिस्ट में शामिल नहीं लोगों को दोबारा वेरीफेकशन के लिए एक साल का समय दिया था। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि नागरिकता खोने के बावजूद भी लोगों को डिटेंशन सेंटर नहीं भेजा जाएगा।


