पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अब हमारे बीच नहीं रहीं। सुषमा का कार्डियक अरेस्ट के कारण मंगलवार रात को निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने के बाद एम्स में भर्ती कराया गया था। निधन से तीन घंटे पहले उन्होंने ट्वीट में कहा था- जीवन में इसी दिन की प्रतीक्षा कर रही थी।
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मुख्य बातें
- 67 वर्षीय पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को मंगलवार रात दिल का दौरा पड़ने के बाद एम्स में भर्ती कराया गया था
- इससे पहले उन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर मोदी को बधाई देते हुए ट्वीट किया था
- प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- भारतीय राजनीति के एक गौरवपूर्ण अध्याय का अंत हो गया
- बुधवार दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक उनके पार्थिव शरीर को भाजपा मुख्यालय में रखा जाएगा
- सुषमा स्वराज का पार्थिव शरीर उनके घर लाया गया, आज दोपहर 3 बजे होगा अंतिम संस्कार
भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार रात को निधन हो गया। बताया जा रहा है उनके सीने में दर्द हुआ, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। वे पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रही थीं। वह 67 साल की थीं।
धारा 370 की समाप्ति के जश्न में डूबे देश को उस वक्त धक्का लगा जब पूर्व विदेश मंत्री और देश की सबसे लोकप्रिय राजनीतिज्ञों में से एक भाजपा नेता सुषमा स्वराज के निधन की ख़बर देशभर में आनन-फानन में फ़ैल गई।
वो आखिरी ट्वीट
निधन से पहले उन्होंने अपना आखिरी ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने अनुच्छेद 370 पर कहा था- प्रधानमंत्री जी आपका हार्दिक अभिनंदन, मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी।
बीजेपी नेता जेपी नड्डा ने बताया कि लोगों द्वारा अंतिम सम्मान देने के लिए उनके आवास पर उनके पार्थिव शरीर रखा जाएगा। आज दोपहर 12 बजे उनके पार्थिव शरीर को भाजपा मुख्यालय लाया जाएगा जहां लोग अपनी प्रिय नेता के अंतिम दर्शन कर सकेंगे। दोपहर 3 बजे पार्थिव शरीर को लोधी रोड श्मशान घाट ले जाया जाएगा, जहां उनका पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
इससे पहले भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा- श्रीमती सुषमा स्वराज के निधन के बारे में सुनकर बहुत धक्का लगा। देश ने एक बहुत ही प्रिय नेता को खो दिया है जिसने सार्वजनिक जीवन में गरिमा, साहस और अखंडता का प्रतीक बनाया है। हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार।।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि स्वराज ने देश के लिए जो योगदान दिया, उसके लिए वह हमेशा याद रखी जाएंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, “सुषमा जी का निधन निजी क्षति है। उन्होंने देश के लिए जो किया, उनके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। दुख की इस घड़ी में मेरी सांत्वना उनके परिवार और समर्थकों के साथ है। ओम शांति।”
एक अन्य ट्वीट में पीएम मोदी ने सुषमा को बेहतरीन प्रशासक करार दिया। उन्होंने लिखा, “एक शानदार प्रशासक, सुषमा जी ने जिस किसी मंत्रालय का प्रभार संभाला वहां उन्होंने ऊंचे मानडंद स्थापित किए। दूसरे देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे ले जाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। बतौर मंत्री हमने उनकी दयाभावना को भी बखूबी देखा कि किस तरह से उन्होंने दूसरे मुल्कों में फंसे भारतीयों की मदद की।”
आगे उन्होंने लिखा, “भारतीय राजनीति के एक अध्याय का अंत हो गया है। भारत अपने उल्लेखनीय नेता के निधन पर शोक व्यक्त करता है, जिन्होंने अपना जीवन सार्वजनिक सेवा और गरीबों के जीवन को समर्पित किया। सुषमा स्वराज जी अपनी तरह की अलग महिला थीं, जो करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत थीं।”
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, सुषमा स्वराज जी के दुखद निधन से मुझे गहरा आघात लगा है। उन्होंने हमेशा मुझे बड़ी बहन का स्नेह दिया और संगठनात्मक सलाह देकर राजनीतिक अभिभावक का फ़र्ज़ निभाया। भारतीय राजनीति में मज़बूत विपक्षी और पूर्व विदेश मंत्री के तौर पर उनकी भूमिका को सदैव स्मरण किया जाएगा। उनके निधन से देश की, पार्टी की और व्यक्तिगत मेरी अपूर्तीय क्षति हुई है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। ॐ शांति।
जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सुषमा स्वराज के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि सुषमा एक ऐसी अदभुत नेता थीं जिनके सभी पार्टियों के लोगों से मित्रवत रिश्ते थे।
राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘सुषमा स्वराज जी के निधन के बारे में सुनकर स्तब्ध हूं। वह एक अद्भुत नेता थीं, जिनकी पार्टी लाइन से इतर मित्रता थी। उन्होंने कहा, ‘दुख की इस घड़ी में उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदना है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। ऊॅं शांति।’
सुषमा का सियासी सफर
विदेश मंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी सरकार में उनका कार्यकाल अभूतपूर्व सफलता और लोकप्रियता से भरा रहा। भारत की विदेश नीति को उन्होंने नए आयाम प्रदान किए। सुषमा जी विदेश में बसे भारतीय लोगों के लिए देवदूत के सामान थी। दुनिया के किसी भी देश में किसी भी भारतीय को किसी भी तरह का कोई भी कष्ट हो सुषमा जी के पास गुहार लगाता और सुषमा स्वराज ट्वीट तथा अन्य माध्यम से उनकी समस्याओं का समाधान कर देती थी। पार्टी के भीतर ही नहीं बल्कि अपने विरोधियों के बीच भी अपने व्यवहार और मृदुता के लिए लोकप्रिय सुषमा स्वराज की वक्तृत्व कला के सभी कायल थे।

भारतीय जनता पार्टी में उन्हें अटल बिहारी वाजपई के बाद सर्वाधिक प्रखर और मुखर वक्ता माना जाता था। उन्होंने कुछ समय दिल्ली के मुख्यमंत्री का भी पद संभाला लेकिन उनका वह कार्यकाल उतना संतोषजनक नहीं रहा। दिल्ली की राजनीति में उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली, किंतु राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी को लगातार लोकप्रिय बनाने और भाजपा के विस्तार में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पहला चुनाव 1977 में लड़ा था
सुषमा ने सबसे पहला चुनाव 1977 में लड़ा। तब वे 25 साल की थीं। वे हरियाणा की अंबाला सीट से चुनाव जीतकर देश की सबसे युवा विधायक बनीं। उन्हें हरियाणा की देवीलाल सरकार में मंत्री भी बनाया गया। इस तरह वे किसी राज्य की सबसे युवा मंत्री रहीं।
1998 में दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं
नब्बे के दशक में सुषमा राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो गईं। अटलजी की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया। 1998 में उन्होंने अटलजी की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। हालांकि, इसके बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा हार गई। पार्टी की हार के बाद सुषमा ने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी और राष्ट्रीय राजनीति में लौट आईं।
सुप्रीम कोर्ट की वकील रह चुकी थीं सुषमा
सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला में हुआ था। उनका परिवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा था। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की और 1973 में सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की। सुषमा का स्वराज कौशल से 1975 में विवाह हुआ। स्वराज कौशल वकील हैं। वे मिजोरम के गवर्नर भी रह चुके हैं। 1990 में देश के सबसे युवा गवर्नर बने, तब उनकी उम्र 37 साल थी।
यूं तो सुषमा स्वराज ने लंबी राजनीतिक पारी खेली है। हरियाणा से अपनी राजनीति शुरु करने वाली सुषमा स्वराज 1977 में जनता पार्टी की राज्य सरकार में जब सबसे युवा मंत्री बनीं तो उनकी उम्र महज 26 साल थी। तब वह जनता पार्टी में थीं और उनका रुझान समाजवादी विचारधारा की तरफ था।जनता पार्टी के विभाजन के बाद भी वह चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली जनता पार्टी में ही बनी रहीं। लेकिन बाद में वह भाजपा में शामिल हो गईं। हरियाणा सरकार में श्रम व रोजगार मन्त्री रहने वाली सुषमा अम्बाला छावनी से विधायक बनने के बाद लगातार आगे बढ़ती गयीं और बाद में दिल्ली पहुंचकर उन्होंने केन्द्र की राजनीति में सक्रिय रहने का संकल्प लिया।
1977–82 हरियाणा विधान सभा की सदस्य निर्वाचित
1977–79 हरियाणा सरकार में श्रम एवं रोजगार मन्त्री बनीं
1987–90 हरियाणा विधान सभा की सदस्य निर्वाचित
1987–90 मन्त्रिमण्डल सदस्य, शिक्षा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, हरियाणा सरकार
1990–96 राज्य सभा में चुनी गयीं (प्रथम अवधि)
1996–97 (15 मई 1996 – 4 दिसम्बर 1997) सदस्य, 11वीं लोक सभा (द्वितीय अवधि)
1996 केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल, सूचना एवं प्रसारण मन्त्री
1998–99 सदस्य, 12वीं लोक सभा (तृतीय अवधि)
1998 केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल, सूचना एवं प्रसारण तथा दूरसंचार मंत्री (अतिरिक्त प्रभार)
1998 दिल्ली की मुख्य मंत्री
1998 दिल्ली विधान सभा के हौज खास निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित
2000–06 राज्य सभा सदस्य (चतुर्थ अवधि)
2000–03 सूचना एवं प्रसारण मन्त्री
2003–04 स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्री एवं संसदीय विषयों की मन्त्री
2006–09 सदस्य, राज्य सभा (पंचम अवधि)
2009–14 सदस्य, 15वीं लोक सभा (छठी अवधि)
2009-09 लोकसभा में विपक्ष की उप नेता
2009–14 विपक्ष के नेता एवं लाल कृष्ण आडवाणी का स्थान लिया
2014–2019 सदस्य, 16वीं लोक सभा (सातवीं अवधि)
2014–2019 विदेश मंत्री, केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में रहीं
6 अगस्त 2019, मंगलवार देर रात दिल का दौरा पडने के कारण उनका निधन हो गया।


