युवा सोच वाले राजीव गांधी को 21वीं सदी के भारत का निर्माता भी कहा जाता है। 40 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बनने वाले राजीव गांधी ने आधुनिक भारत की नींव रखने की दिशा में काम किया। राहुल गांधी ने ट्विटर पर वीडियो शेयर कर राजीव गांधी की उपलब्धियां गिनाई हैं।
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देश के सातवें और भारतीय इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की आज 75वीं जयंती है। इस मौके पर सोनिया गांधी, पूर्व पीएम डॉ। मनमोहन सिंह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने समेत कई दिग्गजों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने ट्वीट कर श्रद्धांजलि दी। राहुल गांधी ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि राजीव गांधी की दूरदर्शी नीतियों से भारत के निर्माण में मदद मिली। उन्होंने ट्वीट कर कहा, आज हम राजीव गांधी जी की 75वीं जयंती मना रहे हैं।
कांग्रेस आई के शासनकाल में अक्टूबर, 1984 से दिसंबर 1989 तक देश के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त, 1944 को हुआ था। जब देश आजाद हुआ था तब राजीव गांधी सिर्फ 3 साल के थे और आजादी के 37 सालों बाद 40 की उम्र में वो देश के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने। देश के इतिहास में अब तक इतनी ज्यादा सीटों के साथ कभी सरकार नहीं बनी है और भविष्य में भी ऐसा दोबारा होने की उम्मीद नहीं है। राजीव गांधी के शासनकाल में 508 सीटों में से 401 सीटों पर कांग्रेस पार्टी का कब्जा था।
स्वर्गीय राजीव गांधी की 75वीं जयंती के मौके पर राहुल गांधी ने ट्विटर पर वीडियो शेयर कर राजीव गांधी की उपलब्धियां गिनाई हैं।
राजीव गांधी को भारत में कंप्यूटर क्रांति लाने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने न सिर्फ कंप्यूटर को भारत के घरों तक पहुंचाने का काम किया बल्कि भारत में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को आगे ले जाने में भी अहम भूमिका निभाई।
इसके अलावा वह व्यक्ति राजीव गांधी ही थे, जिन्होंने भारत में दूरसंचार क्रांति की शुरुआत की थी। उन्हें डिजिटल इंडिया का आर्किटेक्ट और सूचना तकनीक व दूरसंचार क्रांति का जनक कहा जाता है। राजीव गांधी की पहल पर अगस्त 1984 में भारतीय दूरसंचार नेटवर्क की स्थापना के लिए सेंटर पार डिवेलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स यानी सी-डॉट की स्थापना की गई।
राजीव गांधी मानते थे कि विकास का फायदा जमीनी स्तर पर तभी पहुंचेगा जब सत्ता का वास्तविक विकेन्द्रीकरण हो। इसलिए पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करना उनकी विकास योजना का सबसे अहम हिस्सा बन गया। उनकी देख-रेख में पंचायतों को संवैधानिक दर्जा और सुरक्षा प्रदान करने के लिए संविधान में संशोधन करने हेतु एक विधेयक का मसौदा तैयार किया गया। 15 मई, 1989 को इसे लोकसभा में संविधान के 64वें संशोधन विधेयक के रूप में पेश किया गया।

राजीव गांधी से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
- आजाद भारत के इतिहास के सबसे कम 40 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने।
- राजीव गांधी एक फ्लाइंग क्लब के मैंबर भी थे जहां से उन्होंने सिविल एविएशन की ट्रेनिंग भी ली थी।
- 1970 में उन्होंने एक पायलट के तौर पर एयर इंडिया ज्वाइन किया था और राजनीति में आने से पहले तक वो एयर इंडिया के लिए काम करते रहे।
- राजीव गांधी ने देशभर में डिजीटलाइजेशन और कंप्यूटराइजेशन पर विशेष ध्यान दिया था।
- राजीव गांधी के नेतृत्व में ही कांग्रेस पार्टी ने 408 सीटों के बहुमत के साथ केंद्र में सरकार बनाई थी।
- राजीव गांधी को हिन्दुस्तानी शास्त्रीय और आधुनिक संगीत दोनों पसंद था, उन्हें फोटोग्राफी का भी शौक था।
- देश में बिजली, तकनीक और कंप्यूटर सेवा बहाल करने पर उनका हमेशा से जोर था। आने वाले समय में भी देश में कंप्यूटर तकनीक में राजीव गांधी का योगदान अमूल्य माना जाएगा।
विश्व राजनीति पर गहरी छाप
राजीव गांधी ने परमाणु निरस्त्रीकरण को अपनी विदेश नीति के प्रमुख मुद्दे के रूप में चुना। नि:शस्त्रीकरण के वैश्विक अभियान के हिस्से के रूप में राजीव गांधी और सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव मिखाइल गोर्बाचेव ने 27 नवंबर, 1986 को एक परमाणु हथियार मुक्त और अहिंसक विश्व का आह्वान करने वाली घोषणा पर हस्ताक्षर किए। दिल्ली घोषणा-पत्र परमाणु निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।
अपने नाना पंडित जवाहर लाल नेहरू और माता श्रीमती इन्दिरा गांधी की विरासत के सहारे उनकी राजनीति पर एक मजबूत पकड़ बन रही थी। देश को 21वीं शताब्दी में ले जाने के लिए वे निरन्तर प्रयत्नशील थे।
भारत को 21वीं शताब्दी में ले जाने के लिए उन्होंने जिस आर्थिक उदारवाद की नींव रखी वह पंडित नेहरू और श्रीमती इन्दिरा गांधी की नीतियों से अलग दिखाई देती है जबकि वास्तविकता यह है कि वह नेहरू की उन नीतियों की परिणिति कही जा सकती है जो उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरन्त बाद प्रतिपादित की और इन्दिरा गांधी ने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के बाद उन्हें व्यवहार में लाने का प्रयास किया। राजीव गांधी ने खुले दिल से आयातित तकनीक की वकालत की।
राजीव गांधी ने सत्ता के दलालों को बाहर का रास्ता दिखाने की बात करके अपनी एक साफ सुथरी छवि देश के सामने प्रस्तुत की। उन्होंने लोगों को यह आश्वासन दिया कि प्रशासन से वह भ्रष्टाचार को उखाड़ फेकेंगें।
1984 में जब उन्होंने पार्टी की बागडोर
संभाली तो कांग्रेस पार्टी ने उन शिखरों को छुआ जहां तक वह पहले कभी पहुंचने में
सफल नहीं हुई थी। अपने नाना की भान्ति राजीव गांधी में सैंस ऑफ हयूमर भी थी जिसे
इन्दिरा जी ने सदैव अपनी दृढ़ता के पीछे छिपाए रखा। राजीव नेहरू और इन्दिरा जी की
भान्ति जल्दी गुस्से में नहीं आते थे। उनका सौम्य व्यक्तित्व उन्हें लोकप्रिय
बनाने में काफी सहायक हुआ। वह एक विशाल हृदय वाले इंसान थे। उन्हें जीवन की गहरी
समझ थी। जीवन से निरन्तर कुछ न कुछ सीखते रहने की उन्हें आदत थी। उन्होंने बहुत कम
समय में अपने आप को राजनीति में स्थापित कर लिया था।
1984 से 1988 तक राजीव गांधी
ने भारतीय राजनीति को अपने अनुकूल बनाया। 21 मई 1991 तक जब तमिलनाडु के श्री पेरम्बदूर नामक स्थान
पर टाइम बम विस्फोट में उनकी हत्या हुई, वह
भारत की राजनीति पर पूरी तरह से हावी रहे। राजीव की दु:खद और आसमियक मृत्यु ने भी
भारत की राजनीति को प्रभावित किया। उनके निधन के साथ ही नेहरू-इन्दिरा-राजीव युग
की महिमा का अंत हो गया।


