किसी मौजूदा विधायक या सांसद को इस्तीफा दिलाकर राज्यपाल बनाने का वाकया देश ने कभी कभी ही देखा होगा। परंपराओं के मुताबिक राज्यपाल जैसे प्रमुख संवैधानिक पद पर पर्याप्त सियासी या प्रशासनिक अनुभव वाले नेता की ही नियुक्ति होती है।
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देश में आधा दर्जन गर्वनरों की नियुक्ति राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने की है। गवर्नर की तैनाती के बहाने केंद्र सरकार ने एक बार फिर पिछड़ा दांव चला है। गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को उत्तर प्रदेश का नया राज्यपाल बनाया गया है जबकि जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं बिहार में फागू चौहान को राज्यपाल बनाया गया है। घोसी से विधायक फागू चौहान पिछड़ी जाति के हैं। इस लिहाज से राज्यपालों की नियुक्तियां रणनीतिक हैं। इनके बहाने बीजेपी ने अपनी भविष्य की रणनीति पर अमल किया है।
बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन पटना के एक महिला कॉलेज में मुख्य अतिथि बन कर गए थे तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि बतौर राज्यपाल बिहार में यह उनका आखिरी कार्यक्रम है। सूत्रों के मुताबिक कार्यक्रम के दौरान ही उनके एक कारिंदे ने उन्हें बताया – सर, आपका ट्रांसफर हो गया है मध्य प्रदेश। हैरान लालजी टंडन ने पूछा-बिहार कौन आ रहा है। जवाब मिला, फागू चौहान। राजनीति के दिग्गज लालजी टंडन को शायद समझने में जरा-सी भी देर नहीं लगी कि केंद्र में बैठी उनकी सरकार का इरादा क्या है।
गुजरात की पूर्व सीएम आनंदीबेन पटेल अभी मध्य प्रदेश की राज्यपाल हैं। उनका तबादला उत्तर प्रदेश कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में राम नाईक का कार्यकाल खत्म, आनंदीबेन पटेल को नया राज्यपाल बनाया। पश्चिम बंगाल में केसरीनाथ त्रिपाठी का कार्यकाल खत्म हुआ जगदीप धनखड़ को नियुक्त किया गया। त्रिपुरा में कप्तान सिंह सोलंकी का कार्यकाल खत्म, रमेश बैंस को राज्यपाल बनाया गया, वहीं नगालैंड में पद्मनाभ आचार्य का भी कार्यकाल पूरा होने पर आरएन रवि को राज्यपाल नियुक्त किया है।
आप जानते ही होंगे कि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी और नागालैंड के राज्यपाल पद्मनाभ आचार्य का कार्यकाल खत्म हो रहा है। पांच अन्य राज्यों के राज्यपाल भी अगले दो महीनों में रिटायर होंगे। गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा का 30 अगस्त 2019 को कार्यकाल खत्म हो रहा है। गुजरात के ओम प्रकाश कोहली 15 जुलाई, कर्नाटक के वजुभाई रुडा भाई वाला 31 अगस्त, केरल के राज्यपाल जस्टिस पी सदाशिवम चार सितंबर, महाराष्ट्र के राज्यपाल विद्यासागर राव का कार्यकाल 29 अगस्त को खत्म हो रहा है।
बीजेपी यह मानकर चल रही है कि बिहार में अगले साल होने वाले चुनाव में भी इसका फायदा मिल सकता है। यूपी के फागू चौहान लोनिया (पिछड़ी) जाति से आते हैं। वह 1985 में चौधरी चरण सिंह के साथ जुड़कर पहली बार विधायक बने थे। वह जनता दल और बीजेपी के साथ बसपा में भी रहे हैं। बिहार में पिछड़ों के समीकरण को साधने के लिए बीजेपी के लिए यह दांव मददगार साबित हो सकता है।
दरअसल फागू चौहान उत्तर प्रदेश के सीटिंग विधायक हैं। वे उत्तर प्रदेश पिछडा वर्ग आयोग के अध्यक्ष भी हैं। आजमगढ से लेकर मऊ तक के इलाके में वे प्रमुख ओबोसी नेता हैं। फागू चौहान उत्तर प्रदेश की चौहान जाति से आते हैं जिसे बिहार में नोनिया जाति के नाम से जाना जाता है। बिहार में ये अति पिछड़ी जाति है और इस जाति के वोटरों की तादाद भी ठीक-ठाक है। नोनिया या बेलदार को निषाद यानि मल्लाह जाति की उप जाति भी माना जाता है। ये बिहार का बड़ा वोट बैंक है। बीजेपी का नेतृत्व ये मान रहा है कि 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव उसे अकेले लड़ना पड़ सकता है।
किसी सीटिंग विधायक या सांसद को इस्तीफा दिलाकर राज्यपाल बनाने का वाकया देश ने कभी कभी ही देखा होगा। परंपराओं के मुताबिक राज्यपाल जैसे प्रमुख संवैधानिक पद पर पर्याप्त सियासी या प्रशासनिक अनुभव वाले नेता की ही नियुक्ति होती है। फागू चौहान कभी मंत्री नहीं रहे । लेकिन बीजेपी के मिशन बिहार में फागू चौहान सबसे ज्यादा फिट बैठ रहे थे। लिहाजा उन्हें विधायकी छोड़ कर राजभवन में बिठाने का फैसला ले लिया गया। जबकि लालजी टंडन बीजेपी के अगले मिशन में बिहार में फिट नहीं बैठ रहे थे। अचानक उन्हें मध्यप्रदेश भेज दिया गया है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी के बीच जारी खींचतान के बीच टंडन की तैनाती का खास महत्व है।
सूत्रों का कहना है कि कर्नाटक के बाद अब बीजेपी का अगला निशाना मध्य प्रदेश होने वाला है। बीजेपी के पक्ष में समर्थन जुटाने की जिम्मेदारी दे कर ही लालजी टंडन को मध्यप्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। अब तक मध्य प्रदेश की राज्यपाल को अब उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके पीछे भी बीजेपी का पिछड़ा दांव ही है।
आनंदी बेन का अभी लंबा कार्यकाल बाकी है। इसके बावजूद यहां खाली हो रही राज्यपाल की कुर्सी पर उनकी तैनाती की गई है। गुजरात की पूर्व सीएम आनंदी बेन कुर्मी जाति से हैं और पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की करीबी मानी जाती हैं। यूपी में कुर्मी प्रदेश अध्यक्ष की तैनाती के बाद आनंदी बेन पटेल की नियुक्ति के भी गहरे सियासी मायने हैं।
दरअसल, बीजेपी को अब तक चुनाव में पिछड़ों का ही फायदा मिलता आया है। इस वजह से वह इन्हें एकजुट करने में जुटी है। घोसी से विधायक फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाए जाने के बाद यूपी में एक और विधानसभा सीट खाली हो जाएगी। ऐसे में 13 सीटों पर उपचुनाव होंगे। विधानसभा की 11 सीटें सांसदों के विधायक बनने और एक सीट विधायक को अयोग्य घोषित किए जाने के कारण खाली चल रही हैं।


