देश भर में हुई बदले की कार्यवाही की राजनीति का अवलोकन
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असम में राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर

असम के राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर के समन्वयक की न केवल भाजपा अपितु कांग्रेस भी आलोचना कर रही है कि उन्होने अनेक बंगाली हिन्दुओं को सूची से बाहर कर दिया है। उनके विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट भी दर्ज की गयी है। अंतिम सूची में 19 लाख लोग शामिल नहीं किए गए हैं जो राज्य की कुल जनसंख्या का 6 प्रतिशत है। इन लोगों को विदेशी विषयक अधिकरण के समक्ष अपील करनी होगी किंतु सत्तारूढ भाजपा दो जिलों में प्रायोगिक आधार पर इस प्रक्रिया के पुनः सत्यापन के लिए उच्चतम न्यायालय में जाने की योजना बना रही है। तब तक समन्वयक को उनके विरुद्ध दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्टों से निपटना होगा। एक प्रथम सूचना रिपोर्ट असम गरिया मरिया युवा छात्र परिषद ने दर्ज की है तो दूसरी अल इंडिया लीगल एड फाउंडेशन ने दर्ज की है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में अनेक विसंगतियां हैं जैसे कि किसी परिवार के तीन सदस्यों के नाम सूची मे शामिल हैं किंतु दो सदस्यों के नाम शामिल नहीं है। सशस्त्ऱ बलों के कर्मियों के नाम छोड दिए गए हैं। यह सरासर सिंगति है। इन लोगो को कब और कैसे राहत मिलेगी?
अरूणाचल प्रदेश में चीन द्वारा पुल बनाने की खबर?

अरूणाचल प्रदेश में सत्तारूढ भाजपा के सांसद और प्रदेश पार्टी अध्यक्ष तामिर गाओ ने इस बात पर बल दिया है कि चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा के लगभग 75 किमी अंदर एक लकडी का पुल बनाया है जबकि सेना ने ऐसी खबर का खंडन किया है।
गावो का दावा स्थाानीय लोगों की बातों पर आधरित है जो नदी में मछली पकडने गए थे और जिन्होंने उन्हें वीडियो भेजा था। इस क्षेत्र के प्रतिनिधि गावो का कहना है कि इस तथ्य को छुपा नहीं सकते और वे इस पुल के स्थान को भी बता सकते हैं। उनका कहना है कि चीनी सेना द्वारा अतिक्रमण नियमित आधार पर किया जा रहा है।
जबकि सेना का कहना है जिस क्षेत्र का उल्लेख किया जा रहा है उसका नाम फिशटेल है अैर वहां पर नियंत्रण रेखा के बारे में भ्रम है और वहां पर न तो चीनी सैनिकों और न ही नागरिक स्थायी रूप से रहते हैं और निगरानी हमारे सैनिकों द्वारा की जाती है। जबकि सांसद का कहना है कि स्थानीय लोग जानते हैं कि इस पुल का निर्माण किसने किया। किसकी बात पर भरोसा किया जाए। क्या सरकार इस भ्रम को दूर करेगी?
राजस्थान मानव अधिकार आयोग का विचित्र आदेश

राजस्थान मानव अधिकार आयोग को वास्तविकता को ध्यान में रखना होगा। आयोग ने सरकार को सलाह दी है कि वह महिलाओं को लिव इन रिलेशनशिप में रहने से मना करे और इसका कारण यह बताया कि ऐसी महिलाओं को कानून से संरक्षण की आवश्यकता है क्योंकि उन्हें रखैल के रूप में देखा जा सकता है। आयोग की दो सदस्यीय खंडपीठ ने बुधवार को आदेश दिया कि ये राज्य सरकार का दायित्व है कि वह महिलाओं को लिव इन रिलेशनशिप में रहने के नुकसानों से बचाए क्योंकि किसी महिला की गरिमा के विपरीत उसे रखैल के रूप में रखना चरित्र हनन के समान है। आयोग का यह कहना भी है कि रखैल के रूप में जीवन सही नहीं है और ऐसी महिलाएं अपने मूल अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकती हैं। आयोग ने सुझाव दिया कि ऐसे संबंधों के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाया जाए। आयोग भूल गया कि पिछले वर्ष उच्चतम न्यायालय ने ऐसे दंपत्तियों के अधिकारों को घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम 2005 के अंतर्गत मान्यता दी थी। क्या राज्य के मुख्य सचिव गृह इस आदेश पर ध्यान देंगे? आयोग के आदेश की अनदेखी करना उचित होगा।
जुर्माना नहीं श्रीमान

देशभर में यातायात पुलिसकर्मियों की मौज आयी हुई है। 1 सितंबर से देशर भर में मोटर वाहन अधिनियम लागू होने से भारी जुर्माना लगाया जा रहा है और लोग ऐसे जुर्माने के औचित्य पर प्रश्न उठा रहे हैं। इसके कुछ उदाहरण सामने आए हैं।
हरियाण के कैथल में एक स्कूटी सवार पर स्कूटी के दस्तावेज न होने के कारण 16 हजार रूपए का जुर्माना लगाया गया तो गुडगांव में एक दोपहिया वाहन चालक पर 23 हजार रूपए और ओडिशा के भुवनेश्वर में ऑटो रिक्शा चालक पर अधिनियम की विभिन्न धाराओं में 47500 रूपए का जुर्माना लगया गया है। ये लोग इतना भारी जुर्माना कैसे देंगे?
ओडिशा के आटो चालक का कहना है कि वे इतना भारी जुर्माना नहीं दे सकते हैं। उन्हें मेरे ऑटो को जब्त करने दो जिसे मैंने पिछले सप्ताह 25 हजार रूपए में लिया था और मुझे जेल हुई तो भेज दो। जुर्माने की राशि के बारे में पुनर्विचार की आवश्यकता है क्योंकि इससे जब्त किए गए वाहनों को रखने की जगह भी नहीं मिलेगी, न्यायालयों में मामले बढेंगे और जेलों में भी भीडभाड होगी। केन्द्रीय परिवहन मंत्री गडकरी को इस बारे में विचार करना होगा कि जुर्माने से सडक पर अनुशासन नहीं लाया जा सकता है।


