असल में यह मानना ही नहीं चाहिए कि ट्राई जनता के हित में ही फैसला करती है। इसकी कई वजह भी हैं क्योंकि ट्राई के मैंडेट में ही लिखा है कि उसे जनता के साथ बाजार और सर्विस प्रदाताओं के हितों का भी ध्यान रखना है जिससे बाजार का संतुलित विकास हो सके।
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करीब 3 साल पहले मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो ने पूरे टेलीकॉम मार्केट को हिलाकर रख दिया था। जियो ने करीब 6 महीने तक अपनी सारी सेवाएं पूरे देश को बिल्कुल मुफ्त दीं। यानी इसके आने के बाद पहले से स्थापित कई टेलीकॉम कंपनियां इस बाजार से बाहर हो गईं। मसलन, यूनिनॉर, एयरसेल, एमटीएस, रिलायंस कम्यूनिकेशन जैसी कंपनियां डूब गईं। एयरटेल और वोडाफोन जैसी बड़ी कंपनियां भी अपनी योजना को नया रूप देने में जुट गईं। दरअसल जियो के आने के बाद ही पता चला था कि ये कंपनियां ग्राहकों को कितना लूट रही थीं।
याद कीजिए जियो ने जब टेलीकॉम इंडस्ट्री में कदम रखा था तो वह एक स्टार्टअप कंपनी की रूप में सामने आई थी और देखिये आज उसकी क्या हैसियत है। अब यह भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई है, जिसके पास 34 करोड़ उपभोक्ता हैं।
पिछले कुछ महीनों से रिलायंस जियो अपने जियो गीगाफाइबर प्लान पर काम कर रहा था और अब उसे भी लॉन्च कर दिया। जिसके जरिए आप तमाम एचडी और प्रीमियम चैनल देख सकेंगे। जियो ने तो यह भी ऑफर दे दिया है कि जिस दिन कोई मूवी रिलीज होगी, उसी दिन आप उसे अपने घर में बैठे-बैठे देख सकेंगे। यानी सिनेमाहॉल जाने की जरूरत नहीं होगी। यानी हो सकता है कि कुछ सिनेमाघरों में ताले लग जाएं। लेकिन मुकेश अंबानी ने जियो की वार्षिक जनरल मीटिंग में एक के बाद कई ऐसी घोषणाएं कर दी हैं, जो पूरे डिजिटल जगत के परिदृश्य को ही बदल कर रख देगा।
आइए अब यह भी जान लेते हैं कि जिओ की राह आसान बनाने वाला कौन है? हमारे जनमानस में एक धारणा घर कर बैठी है कि ट्राई जनता के हित में ही फैसला करती है और वह टेलीकॉम कंपनियों पर लगाम कसने के लिए ही कार्य कर रही है। जबकि असल में यह मानना ही नहीं चाहिए कि ट्राई जनता के हित में ही फैसला करती है। इसकी कई वजह भी हैं क्योंकि ट्राई के मैंडेट में ही लिखा है कि उसे जनता के साथ बाजार और सर्विस प्रदाताओं के हितों का भी ध्यान रखना है जिससे बाजार का संतुलित विकास हो सके।
पिछले साल के आखिर में ट्राई ने एक ऐसा आदेश दिया जिससे सालों से जमे जमाए केबल कारोबारियों का धंधा एक झटके में तबाही के कगार पर आ गया। ट्राई ने ऐसा नियम बनाया जिसके अनुसार फ्री टू एयर चैनल लेने पर भी ग्राहकों को न्यूनतम 154 रुपए चुकाने थे। ट्राई ने यह भी दावा किया कि नए नियम लागू होने के बाद ग्राहक सिर्फ उन्हीं चैनलों का पैसा देंगे, जिन्हें उन्होंने चुना है लेकिन जीएसटी समेत कैपिसिटी फीस ही 153 हो रही है और ऐसे में चुनिंदा चैनल लेने पर ही बिल आसानी से 300 रुपये के पार कर जाता है।
कुछ समय पहले रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने ट्राई के प्लान के बाद की परिस्थितियों पर एक सर्वे किया तो सामने आया कि इससे ग्राहकों का बिल 25 फीसदी या उससे ज्यादा बढ़ गया है। और उच्च मध्यवर्गीय घरों में जहां 2 या 2 से अधिक टीवी थे वहां तो यह बिल लगभग दोगुना आने लगा। कमाल की बात यह है कि जिस कदम से सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को मिलना वाला था उसके बजाए फायदा लोकप्रिय चैनलों को मिला। अभी तक फ्री टू एयर चल रहे कई सारे टीवी चैनलों ने खुद को पेड चैनल में परिवर्तित कर लिया है। उनका मुनाफा बढ़कर 94 रुपये प्रति महीने तक पहुंच गया।
पिछले साल ही रिलायंस केबल डीटीएच बिजनेस में उतरने की पूरी तैयारी कर चुका था और इधर ट्राई के आदेश के कारण ग्राहकों को डीटीएच की महंगी सर्विस लेने की आदत पड़ चुकी है यानी सारी परिस्थितियां जियो फाइबर के अनुकूल हैं
जियो गीगा फाइबर, फाइबर टु द होम यानी एफटीटीएच पर आधारित है। यानी जियो फाइबर एक ही केबल से टीवी सेटअप बॉक्स के साथ साथ इंटरनेट, टेलीफोन की भी सुविधा देगा। यानी पहले लोग वाई-फाई, टीवी और लैंडलाइन के अलग-अलग खर्च करते थे, वो अब नहीं करना पड़ेगा। इससे हाई स्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग-गेमिंग भी पहले से बेहतर होगी। इसके अलावा स्मार्ट होम डिवाइस भी कनेक्ट कर सकेंगे।
हालांकि अभी प्लान की घोषणा नहीं हुई है लेकिन सूत्रों के अनुसार जियो फाइबर के प्लान 700 रु से शुरू हो रहे हैं जिसमें सिर्फ ब्रॉडबैंड की सुविधा बताई है, यानी आपको केबल वाली सुविधा वाला प्लान चाहिए तो शुरुआत में न्यूनतम 1000-1200 तक हर घर से मिल सकते हैं जिसे जियो के ग्राहक हंसकर देने को तैयार हो जाएंगे।
15 अगस्त पर बहुत सारी घोषणाएं की जा सकती हैं। कई अच्छी ख़बरें सुनने को मिल सकती हैं। लेकिन ट्राई का प्रतिस्पर्धा के माहौल को दरकिनार करना कई सवाल खड़े करता है। इसके बीच जियो गीगाफाइबर प्लान देश को एक विशेष दिशा में ले जाने वाला सबसे बड़ा कदम साबित होगा। वह जो दिखाएगा वही आप देखेंगे, वह जो बताएगा वही आपको पता होगा। आप एक कम्पनी की विचारधारा के अधीन हो जाएंगे क्योंकि यह व्यवस्था सत्तापक्ष को बहुत भाती है।


