जाने माने वैज्ञानिक और इंजीनियर अवुल पकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे। अब्दुल कलाम के विचार आज भी युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं! वे कहते थे, ‘सपने वे नहीं होते, जो आपको रात में सोते समय नींद में आए बल्कि सपने वे होते हैं, जो रात में सोने ही न दें।’
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आज देश के सबसे प्यारे सपूत डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आजाद की चौथी पुण्यतिथि है। बुलंद सोच रखने वाले ‘मिसाइल मैन’ एपीजे अब्दुल कलाम को भारतीय मिसाइल प्रोग्राम का जनक कहा जाता है। चार साल पहले 27 जुलाई को उनका निधन मेघालय के शिलांग में हुआ था। यहां वो लेक्चर देने गए थे। उनकी आखिरी इच्छा, उनके आखिरी शब्द, सब हमें बताते हैं कि वो देश के लिए कितना सोचते थे। जब कलाम ने देश के सर्वोच्च पद यानी 11वें राष्ट्रपति की शपथ ली थी तो देश के हर वैज्ञानिक का सर फख्र से ऊंचा हो गया था।
कलाम हमारे प्रेरणा स्रोत
एक जीती-जागती कहानी के नायक एपीजे अब्दुल कलाम 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में पैदा हुए। उनका पूरा जीवन देश सेवा के लिए समर्पित रहा। कलाम साहब ने कभी पठन-पाठन से खुद को दूर नहीं किया। उन्होंने कुल 34 किताबें लिखीं जो भारतीय धरोहर के रूप में युगों तक युवाओं को राह दिखाती रहेंगी।
वो एक मछुआरे के बेटे थे, उन्होंने कई लेक्चर में इसका जिक्र किया था कि वो शुरुआती जीवन में अखबार बेचते थे। करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत कलाम अपनी मीठी जुबान से हजारों की भीड़ को सम्मोहित कर लेते थे।
1962 में कलाम इसरो में पहुंचे। इन्हीं के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 बनाया। 1980 में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के समीप स्थापित किया गया और भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया। कलाम ने इसके बाद स्वदेशी गाइडेड मिसाइल को डिजाइन किया। उन्होंने अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें भारतीय तकनीक से बनाईं। 1992 से 1999 तक कलाम रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार भी रहे।
कलाम ने विजन 2020 देश के सामने रखा। इसके तहत कलाम ने भारत को विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की के जरिए 2020 तक अत्याधुनिक करने की खास सोच दी गई। कलाम भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे.
कलाम को 1981 में भारत सरकार ने पद्म भूषण और फिर, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया।
इन्होंने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक और विज्ञान के व्यवस्थापक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) संभाला व भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे। इन्होंने 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से दूसरी बार 1998 में भारत के पोखरान-द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक भूमिका निभाई।
अब्दुल कलाम व्यक्तिगत ज़िन्दगी में बेहद अनुशासनप्रिय थे। यह शाकाहारी थे। इन्होंने अपनी जीवनी विंग्स ऑफ़ फायर भारतीय युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान करने वाले अंदाज में लिखी है। इनकी दूसरी पुस्तक ‘गाइडिंग सोल्स- डायलॉग्स ऑफ़ द पर्पज ऑफ़ लाइफ’ आत्मिक विचारों को उद्घाटित करती है इन्होंने तमिल भाषा में कविताऐं भी लिखी हैं। यह भी ज्ञात हुआ है कि दक्षिणी कोरिया में इनकी पुस्तकों की काफ़ी मांग है और वहां इन्हें बहुत अधिक पसंद किया जाता है।
यूं तो अब्दुल कलाम राजनीतिक क्षेत्र के व्यक्ति नहीं थे लेकिन राष्ट्रवादी सोच और राष्ट्रपति बनने के बाद भारत की कल्याण संबंधी नीतियों के कारण इन्हें कुछ हद तक राजनीतिक दृष्टि से सम्पन्न माना जा सकता है।
मई 2012 में, कलाम ने भारत के युवाओं के लिए एक कार्यक्रम ,भ्रष्टाचार को हराने के एक केंद्रीय विषय के साथ, “मैं आंदोलन को क्या दे सकता हूँ” का शुभारंभ किया। उन्होंने यहां तमिल कविता लिखने और वेन्नई नामक दक्षिण भारतीय स्ट्रिंग वाद्य यंत्र को बजाने का भी आनंद लिया।
कलाम कर्नाटक भक्ति संगीत हर दिन सुनते थे और हिंदू संस्कृति में विश्वास करते थे। इन्हें 2003 व 2006 में “एमटीवी यूथ आइकन ऑफ़ द इयर” के लिए नामांकित किया गया था।

कलाम के कुछ मूल मंत्र
देश के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सफलता का श्रेय अपनी माता को दिया करते थे। डॉ. कलाम के कुछ मूल मंत्र जो किसी भी इंसान को उसकी मंजिल तक पहुंचा सकती है: सपने देखना जरूरी है, लेकिन सपने देखकर ही उसे हासिल नहीं किया जा सकता। सबसे ज्यादा जरूरी है कि जिंदगी में खुद के लिए कोई लक्ष्य तय करना।
- पहली सफलता के बाद आराम नहीं करना चाहिए, क्योंकि अगर हम दूसरी बार असफल हो गए तो सब यही कहेंगे कि पहली सफलता भाग्य से मिली थी।
- अगर सफल होने का इरादा मजबूत है तो असफलता हम पर हावी नहीं हो सकती।
- हम सबके पास एक जैसी प्रतिभा नहीं है, लेकिन अपनी प्रतिभाओं को विकसित करने के अवसर सभी के पास बराबर हैं।
- दुख के दिनों में सभी के धैर्य की परीक्षा होती है। अगर दुख के समय धैर्य से काम करेंगे तो जल्दी ही बुरा समय दूर हो सकता है।
- जीवन में सुखों का महत्व तभी समझ आता है, जब ये सुख परेशानियों से गुजरने के बाद मिलते हैं।
- देना सबसे उच्च और श्रेष्ठ गुण है, लेकिन उसे पूर्णता देने के लिए उसके साथ क्षमा भी होनी चाहिए।
- सरलता और परिश्रम का मार्ग अपनाओ, जो सफलता का एक मात्र रास्ता है।


