राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री आसानी से उपलब्ध है। ऐसे में बच्चों की सोच को गंदी होने से बचाने के लिये उनके माता-पिता को ध्यान रखना होगा।
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सूचना, शिक्षा और मनोरंजन के लिए बनाए गए मीडिया ने अभूतपूर्व विकास किया है। अब हम सोशल मीडिया के दौर में जी रहे हैं। सोशल मीडिया ने संचार को सरल और तीव्रगामी बनाया है। आज गांव-गांव तक मोबाइल टॉवर लग चुके हैं और इंटरनेट की पहुंच आसान हो गई है।
टेलीकॉम के क्षेत्र में एफडीआई की बढ़त और निजीकरण के दरवाजे खुलते ही कंपनियों ने गांव-गांव तक टॉवरों का जाल बिछा दिया। परिणाम यह हुआ कि जिन गांवों में कल तक फोन कॉल स्वप्न हुआ करते थे, आज वहां तीव्र गति इंटरनेट चल रहा है। इंटरनेट की पहुंच के कारण स्मार्टफोन का बाजार भी बढ़ा है। वहीं स्मार्टफोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया के प्रयोग ने कई खतरों को भी जन्म दिया है। सोशल मीडिया का सर्वाधिक खतरा हमारे नाबालिगों पर मंडरा रहा है।
इसके नकारात्मक पक्ष आए दिन सामने आ रहे हैं। स्मार्टफोन में बच्चे क्या-क्या देख रहे हैं? इससे अधिकांश माता-पिता अनभिज्ञ हैं। यही कारण है कि सोशल मीडिया के माध्यम से बच्चों तक अश्लील संदेश बेरोकटोक पहुंच रहे हैं। इन संदेशों को देखने के बाद उनके दिमाग में कुत्सित विचारों का जन्म होता है।
मध्य प्रदेश में कई मामलों में यह तथ्य सामने आए हैं कि मासूमों से दुष्कर्म, दुष्कृत्य, छेड़छाड़, यौन उत्पीडऩ से पहले अभियुक्तों ने पहले सोशल मीडिया के जरिये अश्लील विषयवस्तु देखी फिर बच्चों के साथ यौन अपराधों को अंजाम दिया। कई मामलों में बड़ों द्वारा बच्चों के प्रति व बच्चों द्वारा बच्चों के प्रति लैंगिंक अपराध के पीछे भी सोशल मीडिया बड़ा कारक बनकर उभरा है।
मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी ने तो यहां तक कहा है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को स्मार्टफोन न दिया जाये। 21 दिसंबर 2018 को इंदौर में पुलिस ने 19 वर्षीय छात्र को पकड़ा। वह, सोशल मीडिया ऐप्लिकेशन के जरिये वर्चुअल नम्बरों से 25 वर्षीय शिक्षिका को अश्लील संदेश भेजता था।
इतनी कम उम्र का छात्र ऐसे ऐप का प्रयोग कर रहा था कि उसका नंबर किसी को पता नहीं चलता था, लेकिन वांछित लोगों को संदेश भेजे जा सकते थे। इस ऐप के एक नंबर को ब्लॉक करने के बाद दूसरे नंबर से कॉल किया जा सकता था। परेशान शिक्षिका ने राज्य साइबर सेल में छह सितंबर को शिकायत दर्ज करायी थी।
पुलिस ने वॉट्सऐप के अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित मुख्यालय से जानकारी मंगाई तब जाकर आरोपी छात्र गिरफ्त में आया। छात्र ने कबूला कि वह सोशल मीडिया के जरिये अश्लील फिल्में देखने के बाद महिलाओं को परेशान करता था। मध्य प्रदेश में ऐसे मामलों का मामले कम आ रहे हैं, लेकिन इनकी बाढ़ जल्द आने की आशंका प्रबल हो रही है।
कुछ मामलों में मामले बच्चों से संबंधित होने के कारण परिवारजन घटनाओं को पुलिस तक नहीं लाते। राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री आसानी से उपलब्ध है। ऐसे में लडकों की सोच को गंदी होने से बचाने के लिये उनके माता-पिता को ध्यान रखना होगा।
मोबाइल फोन और कम्प्यूटर पर बच्चे क्या देख रहे हैं, इसकी निगरानी जरूरी है। अब समय आ गया है कि बच्चों की सोशल मीडिया प्रयोग को नियंत्रित किया जाए, वरना ऐसे अपराधों को रोक पाना असंभव होगा। इसके जो परिणाम सामने आएंगे वह घातक होंगे। यह स्मार्टफोन घातक हथगोला बने और फटे इससे पहले माता-पिता को सतर्क होना जरूरी है।


