जम्मू-कश्मीर में जारी असमंजस की स्थिति के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को नजरबंद कर दिया गया है। श्रीनगर में धारा 144 लगा दी गई है। वहीं मोबाइल इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है।
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मुख्य बातें
- महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला को श्रीनगर में नजरबंद किया गया
- पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन भी नजरबंद
- श्रीनगर में धारा 144 लागू, मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद
- उमर ने ट्वीट किया- मुझे और अन्य नेताओं को नजरबंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई
- महबूबा मुफ्ती ने कहा- हालात मुश्किल हैं, लेकिन कोई हमारी प्रतिबद्धता को तोड़ नहीं पाएगा
- रविवार को गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बीच बैठक हुई
जम्मू कश्मीर के हालात चिंताजनक बने हुए हैं। रविवार देर रात भारी तादात में सुरक्षाबलों की तैनाती के बाद अब पूरे जम्मू कश्मीर में इंटरनेट सेवाएं ठप्प कर दी गई है। घाटी में अचानक से हलचल बढ़ गई है और कई नेताओं को नजरबंद करने की खबर है। इसके अलावा राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आपातकालीन बैठक बुलाई जिसमें डीजीपी और मुख्य सचिव भी शामिल हुए।
बताया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला और सज्जाद लोन को नजरबंद कर दिया गया है। और घाटी में 5 अगस्त से श्रीनगर में धारा-144 लगा दी गई है, जो अगले आदेश तक लागू रहेगी। इस आदेश के मुताबिक भीड़ इकट्ठा नहीं हो पाएगी और शैक्षणिक संस्थान भी बंद रहेंगे। रैली या सार्वजनिक सभा आयोजित करने पर बैन लगा दिया गया है।
इसके साथ ही स्कूल और कॉलेज को भी बंद किया गया। राज्य में सचिवालय, पुलिस मुख्यालय, एयरपोर्ट और अन्य संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। सभी स्कूल और कॉलेज बंद कर दिये गए हैं और परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं।
इसके अलावा घाटी में इंटरनेट, फोन, केबल नेटवर्क आदि सेवाएं बंद कर दी गई हैं। और श्रीनगर जिले में धारा 144 भी लगा दी गई है। इस बीच जम्मू की उपायुक्त सुषमा चौहान ने सभी स्कूल-कॉलेज और अकादमिक संस्थान बंद करने के आदेश जारी किये हैं।
गौरतलब है कि जब से अमरनाथ यात्रियों को वापस बुलाया गया है और अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है, तभी से कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। और इन्हीं कयासों के बीच रविवार को वहां सर्वदलीय बैठक भी हुई। लेकिन देर रात घाटी में एकाएक हलचल बढ़ गई।
एनसी नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट में नजरबंद होने का दावा किया है। उन्होंने लिखा, ‘मुझे लगता है कि आज आधी रात से मुझे नजरबंद किया गया है और मुख्यधारा के अन्य नेताओं के लिए भी ये प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह पता करने का कोई तरीका नहीं है कि क्या यह सच है।’
वहीं अपने एक ट्वीट में महबूबा मुफ्ती ने कहा, ‘ऐसे मुश्किल समय में मैं लोगों को आश्वस्त करना चाहूंगी कि जो भी हो, हम साथ हैं और इससे लड़ेंगे। ‘
इससे पहले सर्वदलीय बैठक के बाद फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सभी दलों ने एकसुर में फैसला किया कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के विशेष दर्जे, उसकी पहचान और स्वायत्तता को बचाने के लिए एकजुट रहेंगे, चाहे किसी प्रकार के हमले या और कुछ भी हो।
दोनों नेताओं के नजरबन्द किये जाने के बाद कांग्रेस नेता शशि थरूर उमर अब्दुल्ला के समर्थन में आए और कहा कि आप अकेले नहीं हैं।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने उमर अब्दुल्ला के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, ‘आप अकेले नहीं हैं उमर अब्दुल्ला। हर लोकतांत्रिक भारतीय कश्मीर के मुख्यधारा के नेताओं के साथ खड़ा है क्यूंकि आप उसका सामना करेंगे जो भी देश के लिए सरकार के मन में है। संसद का सत्र अब भी चल रहा है और हमारी आवाज भी शांत नहीं होगी।
रविवार को दिनभर की हलचल के बीच यह भी खबर आई कि कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच जम्मू क्षेत्र में भी सुरक्षा बढ़ाई दी गयी है और सीमावर्ती पुंछ और राजौरी जिलों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक आतंकी हमलों की धमकी के मद्देनजर बीते दो दिनों में जम्मू जिले के अलग-अलग जिलों में आरएएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और बीएसएफ समेत विभिन्न केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कई कंपनियों को तैनात किया गया है।
पिछले कुछ दिनों से जारी घाटी में हलचल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अबुल्ला और उमर अब्दुल्ला भी चिंता जाहिर कर चुके हैं। उमर ने शनिवार को ही राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात भी की थी। हालांकि राज्यपाल ने साफ किया सुरक्षा के मद्देनजर ये कदम उठाए जा रहे हैं। उधर,जारी अनिश्चितता के माहौल में घाटी के जरूरी सामानों के स्टॉक कर रहे हैं।
शनिवार को पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी नजर आईं, जबकि एटीएम पर भी लोगों की लंबी लाइनें लगी रहीं। एक पेट्रोल पंप कर्मचारी मंजूर अहमद खान ने बताया कि श्रीनगर में पेट्रोल पंप पूरी तरह से खाली हो गए और लोग उत्तरी कश्मीर के जिलों से ईंधन खरीदने की कोशिश करते रहे। उधर,अधिकारियों ने अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों को वापस भेजने के प्रयास तेज कर दिए हैं। सड़क परिवहन प्रणाली के साथ-साथ वायु सेना के विमानों की व्यवस्था भी गई है। एक सरकारी सूत्र के मताबिक,’हम यत्रियों और पर्यटकों को घाटी छोड़ने के लिए 72 घंटे का समय दे रहे हैं।’
दरअसल जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में अतिरिक्त अर्ध-सैनिक बलों की तैनाती के बाद अडवाइजरी जारी किए जाने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी परिप्रेक्ष्य में कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 और धारा 35ए को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। साथ ही, जम्मू-कश्मीर राज्य को जम्मू, कश्मीर और लद्दाख, कुल तीन भागों में विभक्त करने की भी अनौपचारिक चर्चा फिजाओं में गूंज रही है।


