राष्ट्रपति ने अधिसूचना जारी कर जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया। इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में संकल्प पेश किया था।
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नए सरकारी आदेश के मुताबिक, अब जम्मू-कश्मीर में 370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे। सिर्फ एक खंड प्रभावी रहेगा। दूसरा सबसे अहम फैसला यह है कि जम्मू-कश्मीर अब राज्य नहीं होगा। राज्य में अब तक 22 जिले थे। दो केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में 20 और लद्दाख में 2 जिले होंगे।
अमित शाह के बयान के मुताबिक, काफी समय से वहां के लोग मांग कर रहे थे कि इसे अलग केंद्रशासित प्रदेश की मान्यता मिले, जिससे यहां के निवासी अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकें।
जम्मू-कश्मीर में अब ये बदल गया
- अब देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में संपत्ति खरीद पाएगा।
- जम्मू-कश्मीर में अब अलग झंडा नहीं रहेगा। यानी राष्ट्रध्वज तिरंगा रहेगा।
- जम्मू-कश्मीर में अब दोहरी नागरिकता नहीं होगी। आर्टिकल 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में वोट का अधिकार सिर्फ वहां के स्थायी नागरिकों को ही था।
- जम्मू-कश्मीर अब अलग राज्य नहीं बल्कि केंद्र शासित प्रदेश होगा।
- कश्मीर विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश होगा।
- विधानसभा का कार्यकाल 6 साल की जगह 5 साल होगा।
- अनुच्छेद 370 के हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष अधिकार पूरी तरह से खत्म। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में भारतीय संविधान पूरी तरह से लागू होगा।
- लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया। यहां विधानसभा नहीं होगी और इसका प्रशासन चंडीगढ़ की तरह चलाया जाएगा।
- आरटीआई और सीएजी जैसे कानून भी यहां लागू होंगे।
- जम्मू-कश्मीर में देश का कोई भी नागरिक अब नौकरी पा सकता है।
गौरतलब है कि सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में एक ऐतिहासिक संकल्प पेश किया जिसमें जम्मू कश्मीर राज्य से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन- जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के दो केंद्र शासित क्षेत्रों के रूप में करने का प्रस्ताव किया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक संकल्प पेश किया जिसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 370 के सभी खंड जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होंगे। शाह ने कहा कि विगत में 1950 और 1960 के दशकों में तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने इसी तरीके से अनुच्छेद 370 में संशोधन किया था। हमने भी यही तरीका अपनाया है।
सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वह जम्मू कश्मीर राज्य में संविधान के अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन दो केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में करने संबंधी संकल्प का विरोध करते हैं।
इससे पहले आज सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर कैबिनेट की अहम बैठक हुई। यह मीटिंग करीब आधे घंटे चली। आपको बता दें कि इससे पहले सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक हुई जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और सुरक्षा से जुड़े अधिकारी शामिल थे।
राज्यसभा में अमित शाह के बयान से पहले कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कश्मीर की स्थिति का मसला उठाया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों को हाउस अरेस्ट किया गया है। ऐसे में गृह मंत्री को घाटी की स्थिति पर बयान देना चाहिए। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं।


